Coal Crisis: बिजली घरों में कोयले के लिए हाहाकार, ऊर्जांचल में फल-फूल रहा काला कारोबार
बिजली घरों के लिए आवंटित कोयले को फर्जी कागजात के सहारे मंडी तक पहुंचाया जा रहा है। बेखौफ धंधेबाज और ट्रांसपोर्टर कोयले में बिजली घरों के लिए हानिकारक चारकोल मिलाकर करोड़ों का वारा-न्यारा कर रहे हैं।
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एक तरफ जहां देश की ऊर्जा जरूरतों के आधार स्तंभ बिजली घर कोयले की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ ऊर्जांचल परिक्षेत्र (सोनभद्र) में कोयले का काला कारोबार जमकर फल-फूल रहा है। बिजली घरों के लिए आवंटित कोयले को फर्जी कागजात के सहारे मंडी तक पहुंचाने के बाद बेखौफ धंधेबाज व ट्रांसपोर्टर कोयले में बिजली घरों के लिए हानिकारक चारकोल मिलाकर करोड़ों का वारा-न्यारा कर रहे हैं। विद्युत गृहों में व्याप्त कोयला संकट को अवैध कारोबार का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
बेतहाशा मुनाफा होने के कारण कोयले को काला हीरा कहा जाता है। यही कारण है कि जल्द से जल्द धन कुबेर बनने की चाह में दबंग व रसूखदार मौका मिलते ही कोयले की कालिमा से हाथ रंगने में नहीं चूकते। लगभग डेढ़ दशक पूर्व कोयला चोरी को लेकर ऊर्जांचल में सीबीआई की छापामारी के बाद कुछ वर्षों तक परिक्षेत्र में इस काले कारोबार पर अवश्य अंकुश लगा था।
अवैध कारोबार का सिलसिला बदस्तूर जारी
मगर उसके बाद स्वरूप बदलकर कोयला के अवैध कारोबार का सिलसिला बदस्तूर जारी है। पुलिस उच्चाधिकारियों के निर्देशन में कुछ माह पूर्व पुलिस ने जिले के तीन थाना क्षेत्रों से पावर प्लांट के नाम पर चंदासी कोयला मंडी की राह पकड़ चुके दो दर्जन ट्रकों को पकड़ा था।
मगर महज चालकों के खिलाफ कार्रवाई कर प्रशासन ने भी अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। इससे अवैध धंधे में लिप्त सिंडिकेट पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।काफी दिनों से कोयले में चारकोल मिलावट का खेल बड़े पैमाने पर जारी है।
बताया जा रहा है कि पहले तो चोरी-छिपे ट्रकों से कोयले में मिलावट के लिए स्टील फैक्ट्रियों से चारकोल मंगाया जा रहा था लेकिन अब तो सीधे रेल रैक से ही चारकोल मंगाया जा रहा है। जंगल स्थित सलइबनवां स्टेशन के समीप उसे डंप कर ट्रकों से लोडिंग साइड पर भेजकर मिलावट का खेल खेला जा रहा है।
बिजली घरों के लिए खतरनाक है चारकोल
जानकारों का कहना है कि चारकोल स्टील फैक्ट्रियों से निकलने वाला अपशिष्ट है। देखने में यह बिल्कुल कोयले जैसा दिखता है। कोयले में मिलाने के बाद पहली नजर में इसकी पहचान विशेषज्ञों के लिए भी मुश्किल है। कोयले के साथ बिजली घरों में इसका प्रयोग करने पर कोयला तो जलने के बाद राख बनकर ब्वायलर से बाहर निकल जाता है लेकिन लौह अयस्क होने के कारण चारकोल जलने की जगह पिघलकर ब्वायलर की सतह से चिपक जाता है। इससे ब्वायलर को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है।
फिर से सीबीआई कार्रवाई की उठ रही आवाज
लोगों का मानना है कि कोयले के काले कारोबार में अकूत कमाई हो रही है। इससे अवैध कारोबारियों के सिंडिकेट ने धनबल के सहारे सभी संबंधितों को शांत करा दिया है। राष्ट्रीय संपत्ति को हो रहे नुकसान को देखते हुए परिक्षेत्र में काले कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए फिर से सीबीआई की कार्रवाई जरूरी है।
अधिक होता है वजन
लौह अयस्क का अपशिष्ट होने के कारण चारकोल में सामान्य कोयले के सापेक्ष कई गुना अधिक वजन होता है। इससे वास्तविक कोयले की मात्रा कम होने के बाद भी चारकोल मिश्रण होने के कारण वजन बढ़ जाता है। इससे उपभोक्ता को जहां नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं अवैध कारोबारियों का सिंडिकेट मालामाल हो रहा है। सूत्रों के अनुसार अभी 15 रैक चारकोल अनलोड किया गया है। रैक से और चारकोल मंगाया जा रहा है।
सलईबनवां रेलवे स्टेशन के नजदीक चारकोल अनलोड करने की कोई सूचना नहीं है। ई-ऑक्शन के तहत वहां पावर प्लांटों के लिए कोयला अनलोड किया गया है। -दीपक कुमार, डीटीओ चोपन।