अनपरा तापीय परियोजना में कोयला संकट: निगम की तीन इकाइयां बंद, हर दिन 2.88 मिलियन यूनिट बिजली का नुकसान
कोयले की कमी के चलते हरदुआगंज डी की 250 मेगावाट की नौवीं इकाई, पारीछा बी की 210 मेगावाट की चौथी और पारीछा सी की 250 मेगावाट की पांचवीं इकाई बंद हो गई। अनपरा ए से 120 मेगावाट उत्पादन कम किया गया है।
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कोयले के अभाव में हरदुआगंज की एक व पारीछा विद्युत गृह की दो इकाइयों को बंद करना पड़ा है। वहीं कोयले के निरंतर कम होते स्टॉक को देखते हुए अनपरा ए को कम लोड पर चलाया जा रहा है।
सोनभद्र जिले की अनपरा तापीय बिजली घरों के समक्ष कोयले की किल्लत गंभीर चुनौती बनकर खड़ी है। खदानों के मुहाने पर स्थित बिजली घर तो किसी प्रकार अभी बागडोर थामे हैं, मगर सुदूर स्थित इकाइयां कोयले के अभाव में बंद होने लगी हैं। कोयले के अभाव में हरदुआगंज डी की 250 मेगावाट की नौवीं इकाई बंद हो गई है। इसी क्रम में पारीछा बी की 210 मेगावाट की चौथी व पारीछा सी की 250 मेगावाट की पांचवीं इकाई को बंद करना पड़ा।
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60 फीसदी लोड पर चल रही इकाइयां
इसके साथ ही उत्पादनरत इकाइयों को भी 60 फीसदी लोड पर ही संचालित किया जा रहा है। खदानों के समीप स्थित परियोजनाओं में भी कोयले के स्टॉक की स्थिति गंभीर है। कोल परियोजनाओं से कोयले की आपूर्ति कम होने के कारण दिन-प्रतिदिन स्टॉक कम हो रहा है। इसे देखते हुए अनपरा परियोजना प्रबंधन की ओर से अनपरा ए की 210-210 मेगावाट क्षमता वाली तीनों इकाइयों से 40-40 मेगावाट विद्युत उत्पादन कम किया गया है।
इससे प्रदेश को प्रतिदिन 2.88 मिलियन यूनिट बिजली का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर जल्द स्थिति में बदलाव नहीं हुआ तो अनपरा में भी इकाइयों का संचालन बाधित हो सकता है। समस्या की गंभीरता को देखते हुए उत्पादन निगम के एमडी के सोमवार को एनसीएल के सीएमडी से वार्ता का शेड्यूल निर्धारित किया गया है।
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16 हजार टन कोयले की नहीं हो रही आपूर्ति
अनपरा परियोजना के एक्सईएन कोल ट्रांसपोर्ट डिविजन अजय प्रताप सिंह ने बताया कि वर्तमान में रेल रैक से कोयले की आपूर्ति नहीं होने से परियोजना को सामान्य दिनों के सापेक्ष 16 हजार टन कोयले की कम आपूर्ति हो पा रही है। इससे स्टॉक लगातार कम होता जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर व्याप्त है कोयला संकट
इस समय राष्ट्रीय स्तर पर कोयला संकट व्याप्त है। इसलिए बिजली घरों को कोयले की आपूर्ति के निर्धारण के लिए केंद्र स्तर पर कोयला, बिजली व रेलवे मंत्रालय के साथ केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की संयुक्त टीम गठित की गई है। टीम भुगतान के आधार पर कोयले की आपूर्ति का निर्धारण कर रही है।