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30 एकड़ में बनेगा सीमेंट प्लांट, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
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सोनभद्र। सीमेंट बनाने से जुड़ी एक निजी कंपनी ने अब अपनी एक फैक्ट्री बिल्ली-मारकुंडी और कोटा ग्राम पंचायत के बीच में लगाने का निर्णय लिया है। यह सीमेंट कंपनी करीब 30 एकड़ जमीन में स्थापित होगी। इसे लेकर सीमेंट कंपनी ने पहल कर दी है। जमीनों की खरीद आदि की प्रक्रिया के लिए कंपनी ने प्रशासन से सर्किल रेट आदि की जानकारी भी जुटा ली है।
एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि सीमेंट कंपनी बिल्ली-मारकुंडी व कोटा ग्राम पंचायत के बीच सीमेंट फैक्ट्री लगाने की पहल कर रही है। भौगोलिक दृष्टि से जंगलों पहाड़ों से घिरे जिले में खनिज संपदाओं की प्रचुरता है। औद्योगिक दृष्टि से यह जिला काफी संपन्न है। जिले में एल्यूमीनियम के उत्पादन में विश्व में ख्याति रखने वाला हिंडाल्को है तो कोयला उत्पादन वाला क्षेत्र भी यहीं है। करीब पांच दशक पूर्व जब सोनभद्र मिर्जापुर जिले में शामिल था, तब चुर्क, डाला और चुनार में सरकार ने सीमेंट फैक्ट्री की स्थापना की थी। इसी चुर्क सीमेंट फैक्ट्री में बने सीमेंट का प्रयोग रिहंद डैम बनाने में हुआ था। लंबे समय तक हजारों श्रमिकों और उनके परिवार के जीविकोपार्जन का साधन रही तीनों फैक्ट्रियां घाटे में आ गईं तो उन्हें प्राइवेट संस्थान को बेच दिया गया। वर्तमान में सिर्फ डाला की सीमेंट फैक्ट्री एक निजी संस्थान खरीद कर संचालित की जा रही है। अब डाला के ही पास बिल्ली-मारकुंडी और कोटा ग्राम पंचायत के बीच में एक अन्य नामी सीमेंट कंपनी जमीन की तलाश कर रही है। कंपनी से जुड़े अफसर मंडलायुक्त कार्यालय के साथ ही जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क साध चुके हैं। यदि जिले में एक और सीमेंट फैक्ट्री स्थापित होती है तो यहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
जमीन खरीदने की प्रक्रिया समझने आए थे कंपनी के प्रतिनिधि
सोनभद्र। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि एक निजी कंपनी को सीमेंट कारखाना लगाने के लिए 30 एकड़ जमीन चाहिए। कंपनी ग्रामीणों की जमीन खरीदने और ग्राम समाज की जमीन व अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों की जमीन खरीदने के लिए प्रशासन की अनुमति की प्रक्रिया में जुटी हुई है। कंपनी के कुछ लोग इस सिलसिले में आए थे लेकिन यह अभी लंबी प्रक्रिया है।
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एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि सीमेंट कंपनी बिल्ली-मारकुंडी व कोटा ग्राम पंचायत के बीच सीमेंट फैक्ट्री लगाने की पहल कर रही है। भौगोलिक दृष्टि से जंगलों पहाड़ों से घिरे जिले में खनिज संपदाओं की प्रचुरता है। औद्योगिक दृष्टि से यह जिला काफी संपन्न है। जिले में एल्यूमीनियम के उत्पादन में विश्व में ख्याति रखने वाला हिंडाल्को है तो कोयला उत्पादन वाला क्षेत्र भी यहीं है। करीब पांच दशक पूर्व जब सोनभद्र मिर्जापुर जिले में शामिल था, तब चुर्क, डाला और चुनार में सरकार ने सीमेंट फैक्ट्री की स्थापना की थी। इसी चुर्क सीमेंट फैक्ट्री में बने सीमेंट का प्रयोग रिहंद डैम बनाने में हुआ था। लंबे समय तक हजारों श्रमिकों और उनके परिवार के जीविकोपार्जन का साधन रही तीनों फैक्ट्रियां घाटे में आ गईं तो उन्हें प्राइवेट संस्थान को बेच दिया गया। वर्तमान में सिर्फ डाला की सीमेंट फैक्ट्री एक निजी संस्थान खरीद कर संचालित की जा रही है। अब डाला के ही पास बिल्ली-मारकुंडी और कोटा ग्राम पंचायत के बीच में एक अन्य नामी सीमेंट कंपनी जमीन की तलाश कर रही है। कंपनी से जुड़े अफसर मंडलायुक्त कार्यालय के साथ ही जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क साध चुके हैं। यदि जिले में एक और सीमेंट फैक्ट्री स्थापित होती है तो यहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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जमीन खरीदने की प्रक्रिया समझने आए थे कंपनी के प्रतिनिधि
सोनभद्र। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि एक निजी कंपनी को सीमेंट कारखाना लगाने के लिए 30 एकड़ जमीन चाहिए। कंपनी ग्रामीणों की जमीन खरीदने और ग्राम समाज की जमीन व अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों की जमीन खरीदने के लिए प्रशासन की अनुमति की प्रक्रिया में जुटी हुई है। कंपनी के कुछ लोग इस सिलसिले में आए थे लेकिन यह अभी लंबी प्रक्रिया है।
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