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सीबीआई जांच हो तो जेल में होंगे खनिज संपदा के लुटेरे
Mon, 07 Jan 2019 11:37 PM IST
मनदीप श्रीवास्तव
sonbhadra news
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Published by: मनदीप श्रीवास्तव
Updated Mon, 07 Jan 2019 11:37 PM IST
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सोनभद्र। खनन माफिया के सिंडिकेट, खनिज, राजस्व, पुलिस और सफेदपोशों के गठजोड़ ने जिले में ऊंची पहाड़ी वाली जगहों को खाईं बना दिया है तो कई जगह नदी की धारा को रोक कर बालू का खनन किया। खनन को लेकर लोकायुक्त की जांच में कई लोगों का बयान हुआ लेकिन कार्रवाई किसी पर नहीं हुई। अवैध खनन और बिना परमिट के वाहनों को पार कराने का खेल अभी भी चल रहा है। हमीरपुर जिले में खनन को लेकर सीबीआई की जांच, छापेमारी और पूछताछ के बाद माना जा रहा है कि जांच की आंच जिले तक पहुंचेगी।
जिले में सिंडिकेट का ही असर है कि पट्टा आवंटन हो या एनओसी का मामला, सभी में बार-बार मानकों को तार-तार कर दिया गया। सुरक्षित वन भूमि के रूप में दर्ज भू-भाग पर भी पट्टे जारी किए गए हैं। पट्टों की आड़ में सैकड़ों हेक्टेअर वन भूमि का पत्थर खोदने पर 2012 में ओबरा थाने में वन विभाग ने डेढ़ सौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। गलत तरीके से खनन के साथ नियमों को दरकिनार कर एनओसी देने का भी मामला सामने आया लेकिन आठ माह बाद खनन शुरू हो गया।
बसपा सरकार में पौंटी चड्ढा, सपा सरकार में हरियाणा की छिंकारा तो भाजपा सरकार में प्राइवेट लोग सिंडिकेट चलाते रहे। गाहे-बगाहे अवैध खनन की आरसी जारी होती है लेकिन सेटिंग के बाद मामला रफा दफा हो जाता है। इस समय बालू और पत्थर की चंद की खदानें चल रही हैं मगर मध्यप्रदेश से आने वाले बालू और गिट्टी लदे वाहनों को पार कराने की पूरी सेटिंग रहती है।
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इनोवा देकर अफसर को फंसा दिया था
खनन में वर्चस्व के लिए सिंडिकेट के चार से पांच लोगों की टीम मददगारों और अफसरों के लिए लग्जरी वाहन खरीदती है। एक अधिकारी के फार्म हाउस पर जाने के लिए सिंडिकेट में शामिल एक नेता ने इनोवा कार उपलब्ध कराई थी। हर बात लीक होने के बाद अफसर कार्रवाई करते कि उनका तबादला हो गया। आजकल वही नेता पत्थर खनन शुरू कराने के लिए सिंडिकेट बनाने में जुटे हैं। बिना परमिट के ये लोग पत्थर की खदान में परिवहन करा रहे हैं। यह वही नेता हैं जिनसे लोकायुक्त ने लखनऊ में पूछताछ की थी।
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जिले में सिंडिकेट का ही असर है कि पट्टा आवंटन हो या एनओसी का मामला, सभी में बार-बार मानकों को तार-तार कर दिया गया। सुरक्षित वन भूमि के रूप में दर्ज भू-भाग पर भी पट्टे जारी किए गए हैं। पट्टों की आड़ में सैकड़ों हेक्टेअर वन भूमि का पत्थर खोदने पर 2012 में ओबरा थाने में वन विभाग ने डेढ़ सौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। गलत तरीके से खनन के साथ नियमों को दरकिनार कर एनओसी देने का भी मामला सामने आया लेकिन आठ माह बाद खनन शुरू हो गया।
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बसपा सरकार में पौंटी चड्ढा, सपा सरकार में हरियाणा की छिंकारा तो भाजपा सरकार में प्राइवेट लोग सिंडिकेट चलाते रहे। गाहे-बगाहे अवैध खनन की आरसी जारी होती है लेकिन सेटिंग के बाद मामला रफा दफा हो जाता है। इस समय बालू और पत्थर की चंद की खदानें चल रही हैं मगर मध्यप्रदेश से आने वाले बालू और गिट्टी लदे वाहनों को पार कराने की पूरी सेटिंग रहती है।
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इनोवा देकर अफसर को फंसा दिया था
खनन में वर्चस्व के लिए सिंडिकेट के चार से पांच लोगों की टीम मददगारों और अफसरों के लिए लग्जरी वाहन खरीदती है। एक अधिकारी के फार्म हाउस पर जाने के लिए सिंडिकेट में शामिल एक नेता ने इनोवा कार उपलब्ध कराई थी। हर बात लीक होने के बाद अफसर कार्रवाई करते कि उनका तबादला हो गया। आजकल वही नेता पत्थर खनन शुरू कराने के लिए सिंडिकेट बनाने में जुटे हैं। बिना परमिट के ये लोग पत्थर की खदान में परिवहन करा रहे हैं। यह वही नेता हैं जिनसे लोकायुक्त ने लखनऊ में पूछताछ की थी।