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लॉकडाउन में माइक्रो एटीएम बना ग्रामीणों के लिए कैश का सहारा, आठ हजार लोगों ने उठाया लाभ
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कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए घोषित लॉकडाउन के दौरान ग्रामीणों को सबसे ज्यादा दिक्कत नकद धनराशि को लेकर हो रही है। जिला प्रशासन की तरफ से माइक्रो एटीएम के जरिए ग्रामीणों को उनके गांव में घर तक पहुंच कर कैश धनराशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अब तक करीब आठ हजार लोग इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं।
व्यवस्था के सुचारू संचालन तथा डाक व पंचायत विभाग के बीच समन्वय के लिए सीडीओ अजय कुमार द्विवेदी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। किस गांव में कौन सा डाककर्मी किस तिथि को माइक्रो एटीएम के साथ पहुंचेगा, इसके लिए डाककर्मियों व पंचायत कर्मियों की रोस्टर बनाकर ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। सभी को कंट्रोल रूम से जोड़ दिया गया है।
कंट्रोल रूम से संबंधित डाककर्मी के अलावा ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव को एक दिन पहले सूचना दी जाती है कि माइक्रो एटीएम फलां तिथि को गांव में उपलब्ध रहेगा। ताकि ग्रामीण गांव में एक जगह मौजूद होकर सोशल डिस्टेंस मेंटेन कर जरूरत के अनुरूप कैश रकम निकाल सकें। ग्रामीणों के बीच यह व्यवस्था लाकडाउन के दौरान तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक सप्ताह के करीब 8000 ग्रामीण माइक्रो एटीएम से कई लाख रुपये कैश का ट्रांजेक्शन कर चुके हैं।
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सीडीओ का कहना है कि फिलहाल जिले में 48 माइक्रो एटीएम उपलब्ध हैं। इसके लिए 48 डाककर्मियों की ड्यूटी लगाकर रोस्टर निर्धारित कर दिया गया है। हालांकि अभी 28 डाककर्मी ही ड्यूटी पर आ रहे हैं। जल्द ही अन्य 20 डाककर्मी भी ड्यूटी पर आ जाएंगे।श तब प्रतिदिन के कैश ट्रांजेक्शन में और तेजी आएगी। अभी तक करीब 8000 ग्रामीण इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। प्रतिदिन औसतन एक हजार से अधिक ग्रामीण माइक्रो एटीएम से कैश ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। जब 20 डाककर्मी और आ जाएंगे तो कैश ट्रांजेक्शन में तेजी से वृद्धि होगी। ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण लॉकडाउन के दौरान इस व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे।
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व्यवस्था के सुचारू संचालन तथा डाक व पंचायत विभाग के बीच समन्वय के लिए सीडीओ अजय कुमार द्विवेदी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। किस गांव में कौन सा डाककर्मी किस तिथि को माइक्रो एटीएम के साथ पहुंचेगा, इसके लिए डाककर्मियों व पंचायत कर्मियों की रोस्टर बनाकर ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। सभी को कंट्रोल रूम से जोड़ दिया गया है।
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कंट्रोल रूम से संबंधित डाककर्मी के अलावा ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव को एक दिन पहले सूचना दी जाती है कि माइक्रो एटीएम फलां तिथि को गांव में उपलब्ध रहेगा। ताकि ग्रामीण गांव में एक जगह मौजूद होकर सोशल डिस्टेंस मेंटेन कर जरूरत के अनुरूप कैश रकम निकाल सकें। ग्रामीणों के बीच यह व्यवस्था लाकडाउन के दौरान तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक सप्ताह के करीब 8000 ग्रामीण माइक्रो एटीएम से कई लाख रुपये कैश का ट्रांजेक्शन कर चुके हैं।
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सीडीओ का कहना है कि फिलहाल जिले में 48 माइक्रो एटीएम उपलब्ध हैं। इसके लिए 48 डाककर्मियों की ड्यूटी लगाकर रोस्टर निर्धारित कर दिया गया है। हालांकि अभी 28 डाककर्मी ही ड्यूटी पर आ रहे हैं। जल्द ही अन्य 20 डाककर्मी भी ड्यूटी पर आ जाएंगे।श तब प्रतिदिन के कैश ट्रांजेक्शन में और तेजी आएगी। अभी तक करीब 8000 ग्रामीण इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। प्रतिदिन औसतन एक हजार से अधिक ग्रामीण माइक्रो एटीएम से कैश ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। जब 20 डाककर्मी और आ जाएंगे तो कैश ट्रांजेक्शन में तेजी से वृद्धि होगी। ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण लॉकडाउन के दौरान इस व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे।