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भाइयों की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
Updated Fri, 13 Nov 2015 11:54 PM IST
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शुक्रवार को सुबह हर मुहल्ले में अपने-अपने घरों को साफसुथरा कर बहनों ने भैया दूज का व्रत रख कर पूजा की। इस मौके पर यमदूत भगवान से अपने-अपने भाईयों के लिए लंबी उम्र की कामना की और चना, सुपाड़ी और मिठाई की पूजा कर भाईयों को प्रसाद के रूप में खिलाई।
भैया दूज का त्योहार शुक्रवार को राबर्ट्सगंज नगर के बाईपास रोड, विकास नगर कालोनी, हर्षनगर कालोनी, ब्रम्हनगर, चंडी होटल, धर्मशाला चौक, मेन चौक, न्यू कालोनी, रेलवे फाटक आदि जगहों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से भैया दूज का व्रत रखकर पूजा की। व्रती महिलाओं के मुताबिक कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भैया दूज मनाया जाता है और इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।
ब्रज मंडल में इस दिन बहनें यमुना नदी में खड़ी होकर भाईयों को तिलक लगाती हैं। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसके अनुसार इस दिन भगवान यमराज ने अपनी बहन यमुना को दर्शन दिया था जो बहुत दिनों से उनसे मिलने के लिए व्याकुल थी। अपने घर भाई के आगमन से यमुना बहुत खुश हुई और भाई का स्वागत किया।
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जाते समय यमराज ने यमुना को वरदान दिया कि इस दिन जो भी भाई-बहन के घर जाकर उससे तिलक लगवाएगा और उसके हाथों का बना भोजन खाएगा उसकी आयु बढ़ेगी और उसे यमलोक नहीं जाना पड़ेगा। तभी से भाई दूज मनाने की प्रथा की शुरुआत हुई। इसी प्रकार से बभनी, चोपन, चुर्क, रेणुकूट, दुद्धी, विंढमगंज, म्योरपुर, रामगढ़, खलियारी, शाहगंज, घोरावल, ओबरा, सलखन, करमा, केकराही, मधुपुर, सुकृत क्षेत्रों में भी भैया दूज पर्व मनाया गया।
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भैया दूज का त्योहार शुक्रवार को राबर्ट्सगंज नगर के बाईपास रोड, विकास नगर कालोनी, हर्षनगर कालोनी, ब्रम्हनगर, चंडी होटल, धर्मशाला चौक, मेन चौक, न्यू कालोनी, रेलवे फाटक आदि जगहों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से भैया दूज का व्रत रखकर पूजा की। व्रती महिलाओं के मुताबिक कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भैया दूज मनाया जाता है और इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।
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ब्रज मंडल में इस दिन बहनें यमुना नदी में खड़ी होकर भाईयों को तिलक लगाती हैं। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसके अनुसार इस दिन भगवान यमराज ने अपनी बहन यमुना को दर्शन दिया था जो बहुत दिनों से उनसे मिलने के लिए व्याकुल थी। अपने घर भाई के आगमन से यमुना बहुत खुश हुई और भाई का स्वागत किया।
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जाते समय यमराज ने यमुना को वरदान दिया कि इस दिन जो भी भाई-बहन के घर जाकर उससे तिलक लगवाएगा और उसके हाथों का बना भोजन खाएगा उसकी आयु बढ़ेगी और उसे यमलोक नहीं जाना पड़ेगा। तभी से भाई दूज मनाने की प्रथा की शुरुआत हुई। इसी प्रकार से बभनी, चोपन, चुर्क, रेणुकूट, दुद्धी, विंढमगंज, म्योरपुर, रामगढ़, खलियारी, शाहगंज, घोरावल, ओबरा, सलखन, करमा, केकराही, मधुपुर, सुकृत क्षेत्रों में भी भैया दूज पर्व मनाया गया।