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विधि विधान से पूजे गए सिद्धि विनायक
sonbhadra
Updated Thu, 13 Sep 2018 11:07 PM IST
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म्योरपुर में गुरूद्वारा के पास गणेश महोत्सव में पूजन-अर्चन में शामिल लोग।
- फोटो : sonbhadra
सोनभद्र/ शाहगंज/दुद्धी। राबर्ट्सगंज में के शीतला मंदिर के पास और गुरुद्वारा के सामने गणेश महोत्सव गुरुवार से शुरू हो गया। यहां महोत्सव एक सप्ताह तक चलेगा। यहां श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की पूजा अर्चना किया और प्रसाद वितरित किया। गणेश चतुर्थी के अवसर पर शाहगंज के गणेश मंदिर छोटकापुर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर भक्ति जागरण कार्यक्रम हुआ।
गणेश मंदिर की स्थापना स्व. कलिका प्रसाद के पुत्रों ने उनके याद में बनवाया था। एकलौते गणेश मंदिर होने की वजह से यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। गणेश का विधिवत श्रृंगार किया जाता है। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर गणपति बप्पा मोरया के नारों से गुज उठा। इस अवसर पर अशोक श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव, अनिल पाठक मौजूद रहे।
उधर, दुद्धी में गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर बृहस्पतिवार को पंचदेव परिसर, महावीर परिसर सहित कई नगरों के विभिन्न स्थानों पर गणपति बप्पा के प्रतिमाओं का मंत्रोच्चार के बाद विधिवत पूजन अर्चन के बाद गणेश प्रतिमाओं को पूजा पंडालों में स्थापित किया गया। पूजा पंडालों को विद्युत झालरों से आकर्षण ढंग से सजाया गया है। पूजा पंडालों में भगवान गणेश के दर्शन पूजन के लिए भक्तों का भीड़ पूजा पंडालों में उमड़ रहा है।
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वहीं, म्योरपुर में कस्बा स्थित गुरुद्वारा के पास गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्रीगणपति सेवा समिति के तत्वाधान में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विधि विधान से गौरीसुत गणेश का पूजन अर्चन हुआ। इस दौरान मुन्ना पंडित ने मूर्ति की स्थापना कराया। यहां विधि विधान से पूजन किया गया। भगवान गणेश के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
बड़ी संख्या में माताओं-बहनों ने पंडाल में पहुंचकर गणेश की पूजा किया। पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर रामु प्रसाद, सरदार सतवीर सिंह, आलोक अग्रहरि, प्रिंस, अखिलेश, नीरज, पुष्पेंद्र अग्रहरि, आनंद तिवारी, अभिषेक, पिंटू, रिषभ, गोलू, सोनू सिंह, शुभम, बिट्टू, रिक्की, मोनू केशरी और आशीष समेत कमेटी के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे।
अनपरा में ऊर्जांचल में बृहस्पतिवार को गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर सुबह विधि-विधान पूर्वक पूजन अर्र्चन कर श्रद्धालुओं द्वारा गणेश प्रतिमाओं को स्थापित किया गया। दस दिन चलने वाले इस पर्व को गणेश देवता के जन्म के तौर पर मनाते है। दस दिनों में 16 रूपों की पूजा की जाती है।
बृहस्पतिवार को अनपरा कालोनी, ककरी कालोनी, बीना, खड़िया, जयंत आदि स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा सुबह विधि-विधान पूर्वक पूजन अर्चन कर गणेश की प्रतिमाओं को स्थापित किया गया। पंडित श्याम नारायण दूबे ने बताया कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था इसलिए हर वर्ष इस दिन को गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनायी जाती है।
भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्यान्ह काल के दौरान हुआ था इसलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। अनंत चतुर्थी के दिन इस त्यौहार का समापन होता है।
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गणेश मंदिर की स्थापना स्व. कलिका प्रसाद के पुत्रों ने उनके याद में बनवाया था। एकलौते गणेश मंदिर होने की वजह से यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। गणेश का विधिवत श्रृंगार किया जाता है। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर गणपति बप्पा मोरया के नारों से गुज उठा। इस अवसर पर अशोक श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव, अनिल पाठक मौजूद रहे।
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उधर, दुद्धी में गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर बृहस्पतिवार को पंचदेव परिसर, महावीर परिसर सहित कई नगरों के विभिन्न स्थानों पर गणपति बप्पा के प्रतिमाओं का मंत्रोच्चार के बाद विधिवत पूजन अर्चन के बाद गणेश प्रतिमाओं को पूजा पंडालों में स्थापित किया गया। पूजा पंडालों को विद्युत झालरों से आकर्षण ढंग से सजाया गया है। पूजा पंडालों में भगवान गणेश के दर्शन पूजन के लिए भक्तों का भीड़ पूजा पंडालों में उमड़ रहा है।
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वहीं, म्योरपुर में कस्बा स्थित गुरुद्वारा के पास गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्रीगणपति सेवा समिति के तत्वाधान में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विधि विधान से गौरीसुत गणेश का पूजन अर्चन हुआ। इस दौरान मुन्ना पंडित ने मूर्ति की स्थापना कराया। यहां विधि विधान से पूजन किया गया। भगवान गणेश के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
बड़ी संख्या में माताओं-बहनों ने पंडाल में पहुंचकर गणेश की पूजा किया। पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर रामु प्रसाद, सरदार सतवीर सिंह, आलोक अग्रहरि, प्रिंस, अखिलेश, नीरज, पुष्पेंद्र अग्रहरि, आनंद तिवारी, अभिषेक, पिंटू, रिषभ, गोलू, सोनू सिंह, शुभम, बिट्टू, रिक्की, मोनू केशरी और आशीष समेत कमेटी के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे।
अनपरा में ऊर्जांचल में बृहस्पतिवार को गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर सुबह विधि-विधान पूर्वक पूजन अर्र्चन कर श्रद्धालुओं द्वारा गणेश प्रतिमाओं को स्थापित किया गया। दस दिन चलने वाले इस पर्व को गणेश देवता के जन्म के तौर पर मनाते है। दस दिनों में 16 रूपों की पूजा की जाती है।
बृहस्पतिवार को अनपरा कालोनी, ककरी कालोनी, बीना, खड़िया, जयंत आदि स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा सुबह विधि-विधान पूर्वक पूजन अर्चन कर गणेश की प्रतिमाओं को स्थापित किया गया। पंडित श्याम नारायण दूबे ने बताया कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था इसलिए हर वर्ष इस दिन को गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनायी जाती है।
भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्यान्ह काल के दौरान हुआ था इसलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। अनंत चतुर्थी के दिन इस त्यौहार का समापन होता है।