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Sonebhadra News: पर्यावरण नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई के लिए रहें तैयार

Sun, 07 Sep 2025 11:12 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Sep 2025 11:12 PM IST
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Be prepared for action if environmental rules are ignored
सोनभद्र। जिले की आबोहवा में सैकड़ों टन जहरीले रसायन हर साल घुलते हैं। इसको देखते हुए बारिश का सीजन खत्म होने के साथ ही वायु प्रदूषण में तेजी से वृद्धि रोकने के लिए अभी से कवायद शुरू हो गई है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से सभी परियोजनाओं और क्रशर प्लांटों को नोटिस जारी कर पर्यावरण नियमों का कड़ाई से अनुपालन करने का निर्देश दिया गया है। केंद्र सरकार की तरफ से चलाए जा रहे क्लीन एयर प्रोग्राम के मद्देनजर नियमों की अनदेखी पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
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जिले में लगभग 250 क्रशर प्लांट, नौ तापीय विद्युत संयंत्र, दो केमिकल, एक अल्युमिनियम, एक सीमेंट और एक कार्बन फैक्ट्री स्थापित है। एनजीटी कोर कमेटी की अगस्त 2015 की रिपोर्ट बताती है कि जिला और सीमावर्ती सिंगरौली में विद्युत उत्पादन के लिए हर दिन लगभग सवा तीन लाख टन कोयला जलाया जा रहा है। इससे प्रतिदिन एक लाख टन से ज्यादा फ्लाई ऐश निकल रही है। इसके जरिये यहां की आबोहवा में हर दिन 14 किलो मरकरी, 20 टन श्वसनीय धूल कण, 2394 टन सल्फर डाई आक्साइड, 1400 किलो आर्सेनिक, 1900 किलो क्रोमियम, 1220 किलो शीशा, 30 हजार किलो फ्लोराइड और नाइट्रेट की भी बड़ी मात्रा घुल रही है।
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प्रदूषण का स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
विशेषज्ञों का दावा है कि मरकरी यानी पारा की अधिकता से दिमागी बीमारी, आर्सेनिक से कैंसर, क्रोनियम से जिगर, आंत संबंधी बीमारी, शीशे से बांझपन, गर्भपात की समस्या, गुर्दे की बीमारी और फ्लोराइड से हडि्डयां खोखली हो रही हैं। नाइट्रेट की अधिकता कैंसर के साथ ही बेबी सिंड्रोम का खतरा बढ़ा रही है। हालात को देखते हुए जहां एनजीटी और सरकार की तरफ से कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं, 2020 से अनपरा क्षेत्र में नेशनल एयर क्लीन प्रोग्राम चलाया जा रहा है। हालात को देखते हुए, पिछले दिनों पूरे जिले में एयर क्लीन प्रोग्राम जैसा कार्यक्रम चलाए जाने की मांग की गई, जिस पर राज्य और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जरूरी निर्देश भी जारी किए गए थे।
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सोनभद्र में बारिश के सीजन के बाद प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगती है। इस पर नियंत्रण के लिए, पूरे जिले में क्लीन एयर प्रोग्राम की तरह पहल का निर्णय लिया गया है। इसके लिए सभी परियोजनाओं-क्रशर प्लांटों को नोटिस जारी कर पर्यावरण नियमों-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के लिए कहा गया है। -आरके सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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