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Sonebhadra News: प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने से मेडिकल कॉलेज में घट रहे आयुष्मान के मामले
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मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए पहुंचे मरीज। -संवाद
- फोटो : पुलिस लाइन में परेड़ लगाते पुलिस कर्मी। विभाग स्रोत
सोनभद्र। आयुष्मान के जरिये किसी भी अस्पताल-संस्थान को किसी मरीज के उपचार के एवज में जो धनराशि उपलब्ध कराई जाती है, उसकी 25 प्रतिशत धनराशि डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टॉफ पर खर्च की जाती है। मेडिकल कॉलेज में यह धनराशि एक साल से डॉक्टरों-स्वास्थ्य कर्मियों को नहीं दी जा रही है। इसका सीधा असर उनके कामकाज पर पड़ रहा है। नतीजा मरीज भी घट रहे हैं।
डिस्चार्ज पेपर पर मिलने वाली दवाओं को भी यहां उपलब्ध न कराए जाने के कारण जहां मेडिसिन विभाग में पिछले कई महीनों से आयुष्मान के जरिये उपलब्ध होने वाली मरीजों की संख्या शून्य है। प्रसूति विभाग की भी कुछ यही स्थिति है। वहीं आर्थो, जनरल सर्जरी, प्रसूति विभाग में भी इसमें 50 से 75 फीसदी की गिरावट आई है।
मेडिकल कॉलेज में जहां पूर्व में आयुष्मान के जरिये करीब 80 मरीजों के ऑपरेशन होते थे। प्रोत्साहन राशि न दिए जाने का परिणाम यह हुआ कि इसकी संख्या घटकर 35 पर आ गई है। इसी तरह जनरल सर्जरी में जहां आयुष्मान कोटे से करीब 50 मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है। वह घटकर करीब 15 पर आ गई है। मिलने वाली धनराशि का 25 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के साथ ही, इंस्ट्रूमेंट खरीद पर खर्च होने वाली 10 फीसदी राशि का भी उपयोग न किए जाने से ऑपरेशन-उपचार के लिए कई जरूरी उपकरणों की भी उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसके चलते भी मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान मरीजों को मिलने वाली सेवा पर असर पड़ा है। डिस्चार्ज पेपर पर मरीज को मिलने वाली महंगी दवाओं की भी व्यवस्था न किए जाने के चलते मेडिसिन और प्रसूति विभाग में आने वाले मरीज ही, मेडिकल कॉलेज की बजाय निजी अस्पतालों को तरजीह देने लगे हैं। वहां उन्हें डिस्चार्ज पेपर पर अस्पताल की तरफ से ही दवा उपलब्ध कराई जाती है।
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केस एक::
रामगढ़ क्षेत्र निवासी सूरज ने बताया कि मां ललिता देवी बाथरुम में फिसलने से गिरने के कारण कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी। आयुष्मान से मेडिकल कॉलेज के उपचार कराने आया तो ऑपरेशन में देर हाेने पर रेफर कराकर वाराणसी ले गए।
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केस दो::
कोन क्षेत्र निवासी धर्मावती को सर्जरी करानी थी। यहां आयुष्मान से उपचार में परेशानियों के बारे में जानकारी मिली। डिस्चार्ज पेपर की दवाएं भी बाहर से लेने के बारे में बताया गया तो परिजन बाहर से ही लौट गए।
प्राचार्य को स्थिति से अवगत कराया गया है। उन्होंने इसके लिए एक आंतरिक कमेटी भी गठित की है। इसके जरिये समस्या के समाधान का प्रयास भी किया जा रहा है। पूरी उम्मीद है कि जून से स्थिति बदलनी शुरू हो जाएगी। -डॉ. बलवंत पटेल, नोडल आयुष्मान, मेडिकल कॉलेज।
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आयुष्मान के जरिए मरीजों के उपचार के बाद अस्पताल को जो भी धनराशि उपलब्ध कराई जाती है उसमें प्रोत्साहन राशि शामिल होती है। अगर किसी डॉक्टर-स्टॉफ को यह धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है तो इससे सीधे उन्हें अवगत कराया जा सकता है। प्रोत्साहन राशि क्यूं नहीं दी जा रही, इसके बारे में जानकारी ली जाएगी। किसी के स्तर पर जानबूझकर लापरवाही की शिकायत मिली तो उसके संबंध में आवश्यक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। -डाॅ. कीर्ति आजाद बिंद, नोडल आयुष्मान, सोनभद्र।
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डिस्चार्ज पेपर पर मिलने वाली दवाओं को भी यहां उपलब्ध न कराए जाने के कारण जहां मेडिसिन विभाग में पिछले कई महीनों से आयुष्मान के जरिये उपलब्ध होने वाली मरीजों की संख्या शून्य है। प्रसूति विभाग की भी कुछ यही स्थिति है। वहीं आर्थो, जनरल सर्जरी, प्रसूति विभाग में भी इसमें 50 से 75 फीसदी की गिरावट आई है।
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मेडिकल कॉलेज में जहां पूर्व में आयुष्मान के जरिये करीब 80 मरीजों के ऑपरेशन होते थे। प्रोत्साहन राशि न दिए जाने का परिणाम यह हुआ कि इसकी संख्या घटकर 35 पर आ गई है। इसी तरह जनरल सर्जरी में जहां आयुष्मान कोटे से करीब 50 मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है। वह घटकर करीब 15 पर आ गई है। मिलने वाली धनराशि का 25 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के साथ ही, इंस्ट्रूमेंट खरीद पर खर्च होने वाली 10 फीसदी राशि का भी उपयोग न किए जाने से ऑपरेशन-उपचार के लिए कई जरूरी उपकरणों की भी उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसके चलते भी मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान मरीजों को मिलने वाली सेवा पर असर पड़ा है। डिस्चार्ज पेपर पर मरीज को मिलने वाली महंगी दवाओं की भी व्यवस्था न किए जाने के चलते मेडिसिन और प्रसूति विभाग में आने वाले मरीज ही, मेडिकल कॉलेज की बजाय निजी अस्पतालों को तरजीह देने लगे हैं। वहां उन्हें डिस्चार्ज पेपर पर अस्पताल की तरफ से ही दवा उपलब्ध कराई जाती है।
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केस एक::
रामगढ़ क्षेत्र निवासी सूरज ने बताया कि मां ललिता देवी बाथरुम में फिसलने से गिरने के कारण कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी। आयुष्मान से मेडिकल कॉलेज के उपचार कराने आया तो ऑपरेशन में देर हाेने पर रेफर कराकर वाराणसी ले गए।
केस दो::
कोन क्षेत्र निवासी धर्मावती को सर्जरी करानी थी। यहां आयुष्मान से उपचार में परेशानियों के बारे में जानकारी मिली। डिस्चार्ज पेपर की दवाएं भी बाहर से लेने के बारे में बताया गया तो परिजन बाहर से ही लौट गए।
प्राचार्य को स्थिति से अवगत कराया गया है। उन्होंने इसके लिए एक आंतरिक कमेटी भी गठित की है। इसके जरिये समस्या के समाधान का प्रयास भी किया जा रहा है। पूरी उम्मीद है कि जून से स्थिति बदलनी शुरू हो जाएगी। -डॉ. बलवंत पटेल, नोडल आयुष्मान, मेडिकल कॉलेज।
आयुष्मान के जरिए मरीजों के उपचार के बाद अस्पताल को जो भी धनराशि उपलब्ध कराई जाती है उसमें प्रोत्साहन राशि शामिल होती है। अगर किसी डॉक्टर-स्टॉफ को यह धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है तो इससे सीधे उन्हें अवगत कराया जा सकता है। प्रोत्साहन राशि क्यूं नहीं दी जा रही, इसके बारे में जानकारी ली जाएगी। किसी के स्तर पर जानबूझकर लापरवाही की शिकायत मिली तो उसके संबंध में आवश्यक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। -डाॅ. कीर्ति आजाद बिंद, नोडल आयुष्मान, सोनभद्र।