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कहीं देर से पहुंचा पेपर तो कहीं फोटो स्टेट कराकर हुई परीक्षा
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ाबर्ट्सगंज प्राथमिक विद्यालय में परीक्षा देते छात्र-छात्राएं।
- फोटो : SONBHADRA
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कोरोना के कारण दो वर्षों से ठप परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षा बृहस्पतिवार से आरंभ हुई। पूर्व सूचना के बावजूद परीक्षा में कई केंद्रों पर अव्यवस्था दिखी। कहीं देर से पेपर पहुंचा तो कहीं फोटो स्टेट कराकर परीक्षा ली गई। कई विद्यालयों के शिक्षक सुबह नौ बजे तक बीआरसी और एनपीआरसी पर ही पेपर पाने के लिए जुटे रहे। हालांकि विभाग ने ज्यादातर केंद्रों पर सकुशल परीक्षा संपन्न होने का दावा किया है।
जिले के 2061 विद्यालयों में पहले दिन हिंदी का पेपर था। कक्षा एक के बच्चों की परीक्षा मौखिक ली गई, जबकि दूसरी से आठवीं तक के बच्चों ने लिखित परीक्षा दी। प्राथमिक स्तर पर 1,54,935 बच्चे पंजीकृत हैं। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर 85127 बच्चों का नामांकन है। परिषद की ओर से सिर्फ पेपर उपलब्ध कराया जाना था। उत्तर पुस्तिका की व्यवस्था विद्यालयों को अपने स्तर से करनी थी। कई दिन पहले ही यह निर्देश जारी होने के बावजूद बृहस्पतिवार को परीक्षा आरंभ होने तक शिक्षक इसकी व्यवस्था में परेशान दिखे। रौंप स्थित सदर बीआरसी पर नौ बजे तक कई विद्यालयों के शिक्षक पेपर मिलने का इंतजार ही करते रहे, जबकि परीक्षा सवा नौ बजे से शुुरू होनी थी। देर से पेपर मिलने के कारण वहां परीक्षाएं भी विलंबित हुईं। वहीं कई इलाकों में पर्याप्त प्रश्नपत्र न पहुंचने से फजीहत हुई। आनन-फानन फोटो कॉपी कराकर प्रश्नपत्र वितरित किया गया। सदर, घोरावल, करमा, चोपन, चतरा क्षेत्रों में यह समस्या बनी रही।
कार्रवाई के डर से बचते रहे शिक्षक
विभाग की ओर से परीक्षा के संबंध में शिक्षकों से बातचीत की गई तो वे कार्रवाई के डर से सवालों से बचते नजर आये। वे विभाग की ओर से की गई अनियमितता से काफी निराश रहे। वहीं कुछ शिक्षकों ने बताया कि प्रश्नपत्र कम मिला है। वहीं कुछ ने बताया कि कक्षा चार की परीक्षा में जो प्रश्न पूछे गए हैं वो सिलेबस में था ही नहीं।
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पहले दिन की परीक्षा सकुशल रही। सभी स्थानों पर समय से पेपर पहुंचवाने की व्यवस्था की गई थी। कुछ जगहों पर पैकिंग के कारण पेपर की संख्या में कमी और अधिकता की बात सामने आई। बाद में जिसे दुरुस्त करा लिया गया। बच्चे परीक्षा को लेकर उत्साहित रहे। - हरिवंश कुमार, बीएसए, सोनभद्र
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जिले के 2061 विद्यालयों में पहले दिन हिंदी का पेपर था। कक्षा एक के बच्चों की परीक्षा मौखिक ली गई, जबकि दूसरी से आठवीं तक के बच्चों ने लिखित परीक्षा दी। प्राथमिक स्तर पर 1,54,935 बच्चे पंजीकृत हैं। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर 85127 बच्चों का नामांकन है। परिषद की ओर से सिर्फ पेपर उपलब्ध कराया जाना था। उत्तर पुस्तिका की व्यवस्था विद्यालयों को अपने स्तर से करनी थी। कई दिन पहले ही यह निर्देश जारी होने के बावजूद बृहस्पतिवार को परीक्षा आरंभ होने तक शिक्षक इसकी व्यवस्था में परेशान दिखे। रौंप स्थित सदर बीआरसी पर नौ बजे तक कई विद्यालयों के शिक्षक पेपर मिलने का इंतजार ही करते रहे, जबकि परीक्षा सवा नौ बजे से शुुरू होनी थी। देर से पेपर मिलने के कारण वहां परीक्षाएं भी विलंबित हुईं। वहीं कई इलाकों में पर्याप्त प्रश्नपत्र न पहुंचने से फजीहत हुई। आनन-फानन फोटो कॉपी कराकर प्रश्नपत्र वितरित किया गया। सदर, घोरावल, करमा, चोपन, चतरा क्षेत्रों में यह समस्या बनी रही।
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कार्रवाई के डर से बचते रहे शिक्षक
विभाग की ओर से परीक्षा के संबंध में शिक्षकों से बातचीत की गई तो वे कार्रवाई के डर से सवालों से बचते नजर आये। वे विभाग की ओर से की गई अनियमितता से काफी निराश रहे। वहीं कुछ शिक्षकों ने बताया कि प्रश्नपत्र कम मिला है। वहीं कुछ ने बताया कि कक्षा चार की परीक्षा में जो प्रश्न पूछे गए हैं वो सिलेबस में था ही नहीं।
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पहले दिन की परीक्षा सकुशल रही। सभी स्थानों पर समय से पेपर पहुंचवाने की व्यवस्था की गई थी। कुछ जगहों पर पैकिंग के कारण पेपर की संख्या में कमी और अधिकता की बात सामने आई। बाद में जिसे दुरुस्त करा लिया गया। बच्चे परीक्षा को लेकर उत्साहित रहे। - हरिवंश कुमार, बीएसए, सोनभद्र