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Sonebhadra News: गाजीपुर जिले में भ्रष्टाचार का आरोपी लेखाकार गिरफ्तार
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करीब 11 वर्ष पूर्व गाजीपुर जिले में पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण कार्य के दौरान हुए घोटाले के आरोपी लेखाकार को ईओडब्ल्यू की टीम ने रविवार की देर शाम गिरफ्तार किया। लेखाकार उप्र राजकीय निर्माण निगम भदोही में तैनात था। करोड़ों के घोटाले में उसकी तलाश की जा रही थी।
गाजीपुर जिले के भदौरा ब्लॉक क्षेत्र में पांच अलग-अलग स्थानों पर पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य वित्तीय वर्ष 2012-13 के दौरान किया जाना था। शासन ने कार्यदाई संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड भदोही (वाराणसी) को यह कार्य आवंटित किया था। इस कार्य के लिए शासन ने करीब 8.17 करोड़ रुपये अवमुक्त किया। इसमें से केवल 1.17 करोड़ रुपये का कार्य मानक के अनुरूप और पूर्ण किया जाना पाया गया। शेष सात करोड़ रुपये का कार्य अधूरा और मानक के अनुरूप नहीं मिला। शिकायत मिलने के बाद जांच अधिकारी तत्कालीन संयुक्त निदेशक पर्यटन वाराणसी अविनाश चंद्र मिश्रा ने 12 सितंबर 2017 को गाजीपुर के गहमर थाने में केस दर्ज कराया था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए शासन ने इसकी विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) वाराणसी को सौंप दिया। जांच कर्ता निरीक्षक सुनील कुमार वर्मा ने शासकीय धन के बंदरबांट में तत्कालीन परियोजना निदशक, उप अभियंता, लेखाकार के साथ ठेकेदारों को भी दोषी पाया। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसपी ईओडब्ल्यू लालसाहब यादव ने निरीक्षक सुनील वर्मा के नेतृत्व में टीम का गठन किया था। रविवार की देर शाम पुलिस ने आरोपी लेखाकार थाना रामपुर बरकोनिया के ग्राम छोड़ा निवासी प्रताप सिंह (61) को गिरफ्तार किया। प्रताप वतर्मान में विकास नगर कॉलोनी राबर्ट्सगंज में रहता था। उसे सोमवार को भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय वाराणसी के समक्ष रिमांड के लिए प्रस्तुत किया गया, जहां से कोर्ट ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। गिरफ्तार करने वाली टीम में ईओडब्ल्यू वाराणसी निरीक्षक सुनील वर्मा, मुख्य आरक्षी रामाश्रय सिंह और रोहित सिंह शामिल रहे।
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गाजीपुर जिले के भदौरा ब्लॉक क्षेत्र में पांच अलग-अलग स्थानों पर पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य वित्तीय वर्ष 2012-13 के दौरान किया जाना था। शासन ने कार्यदाई संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड भदोही (वाराणसी) को यह कार्य आवंटित किया था। इस कार्य के लिए शासन ने करीब 8.17 करोड़ रुपये अवमुक्त किया। इसमें से केवल 1.17 करोड़ रुपये का कार्य मानक के अनुरूप और पूर्ण किया जाना पाया गया। शेष सात करोड़ रुपये का कार्य अधूरा और मानक के अनुरूप नहीं मिला। शिकायत मिलने के बाद जांच अधिकारी तत्कालीन संयुक्त निदेशक पर्यटन वाराणसी अविनाश चंद्र मिश्रा ने 12 सितंबर 2017 को गाजीपुर के गहमर थाने में केस दर्ज कराया था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए शासन ने इसकी विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) वाराणसी को सौंप दिया। जांच कर्ता निरीक्षक सुनील कुमार वर्मा ने शासकीय धन के बंदरबांट में तत्कालीन परियोजना निदशक, उप अभियंता, लेखाकार के साथ ठेकेदारों को भी दोषी पाया। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसपी ईओडब्ल्यू लालसाहब यादव ने निरीक्षक सुनील वर्मा के नेतृत्व में टीम का गठन किया था। रविवार की देर शाम पुलिस ने आरोपी लेखाकार थाना रामपुर बरकोनिया के ग्राम छोड़ा निवासी प्रताप सिंह (61) को गिरफ्तार किया। प्रताप वतर्मान में विकास नगर कॉलोनी राबर्ट्सगंज में रहता था। उसे सोमवार को भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय वाराणसी के समक्ष रिमांड के लिए प्रस्तुत किया गया, जहां से कोर्ट ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। गिरफ्तार करने वाली टीम में ईओडब्ल्यू वाराणसी निरीक्षक सुनील वर्मा, मुख्य आरक्षी रामाश्रय सिंह और रोहित सिंह शामिल रहे।
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