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फिर सांसत में किसान
Sonbhadra
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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केकराही। धान खरीद की शासन की मंशा धरी की धरी रह गई है। एक अक्तूबर से धान खरीदने का शासन का निर्देश बेकार साबित हो रहा है। साधन सहकारी समितियों और संघों पर धान की खरीद नहीं हो रही है। इससे किसानों में असंतोष है। किसान समिति का चक्कर काट कर वापस हो जा रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने निर्देश दिया था कि इस बार एक अक्तूबर से ही किसानों के धान की खरीद की जाएगी। इसके लिए रुपये और बोरों की कमी नहीं होने दी जाएगी। लेकिन शासन की मंशा धरी की धरी रह गई है। जिन किसानों की फसल तैयार हो गई है वे अपना धान बेंचने के लिए समितियों का चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। समितियों से जुड़े सचिवों का कहना है कि मिलर धान खरीदने को तैयार नहीं हो रहे हैं। पीसीएफ के लिए अभी दो मिल ही अटैच हो सकी है। अभी तक पिछले साल का 64 हजार कुंतल धान मिलरों पर बकाया है। इसी वजह से मिलरों से अटैचमेंट नहीं हो पा रहा है। पिछले साल का एक लाख 15 हजार कुंटल चावल मिलरों ने दिया ही नहीं। पिछले साल एक हजार 80 रुपये प्रति कुंतल धान की खरीद थी जो इस वर्ष बढ़ कर 1250 प्रति कुंतल हो गई है। ऐसे में किसानों को फायदा मिलने वाला था लेकिन खरीद न होने से किसानों के समक्ष संकट खड़ा हो गया है। किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिरकार उनके धान की खरीद कब से होगी। किसान सेवा सहकारी समिति करमा के सचिव बीके श्रीवास्तव का कहना है कि मिलर अटैच नहीं हो पाने से खरीद नहंी हो पा रही है।
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प्रदेश सरकार ने निर्देश दिया था कि इस बार एक अक्तूबर से ही किसानों के धान की खरीद की जाएगी। इसके लिए रुपये और बोरों की कमी नहीं होने दी जाएगी। लेकिन शासन की मंशा धरी की धरी रह गई है। जिन किसानों की फसल तैयार हो गई है वे अपना धान बेंचने के लिए समितियों का चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। समितियों से जुड़े सचिवों का कहना है कि मिलर धान खरीदने को तैयार नहीं हो रहे हैं। पीसीएफ के लिए अभी दो मिल ही अटैच हो सकी है। अभी तक पिछले साल का 64 हजार कुंतल धान मिलरों पर बकाया है। इसी वजह से मिलरों से अटैचमेंट नहीं हो पा रहा है। पिछले साल का एक लाख 15 हजार कुंटल चावल मिलरों ने दिया ही नहीं। पिछले साल एक हजार 80 रुपये प्रति कुंतल धान की खरीद थी जो इस वर्ष बढ़ कर 1250 प्रति कुंतल हो गई है। ऐसे में किसानों को फायदा मिलने वाला था लेकिन खरीद न होने से किसानों के समक्ष संकट खड़ा हो गया है। किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिरकार उनके धान की खरीद कब से होगी। किसान सेवा सहकारी समिति करमा के सचिव बीके श्रीवास्तव का कहना है कि मिलर अटैच नहीं हो पाने से खरीद नहंी हो पा रही है।
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