घोरावल। आजादी के सत्तर साल बीतने के बाद भी अति पिछड़े व आदिवासी बहुल घोरावल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बेहद दयनीय है। तहसील क्षेत्र में एक सामुदायिक और चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं लेकिन कहीं भी उपचार के समुचित प्रबंध नहीं हैं। चिकित्सकों, कर्मचारियों और संसाधनों की कमी के कारण ये अस्पताल रेफरल यूनिट बनकर रह गए हैं। घोरावल तहसील मुख्यालय पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। यहां के अधीक्षक का पद डिप्टी सीएमओ रैंक का है, जो पिछले एक वर्ष से खाली है। डॉ. गुरू प्रसाद मौर्या कार्यवाहक अधीक्षक हैं। यहां जनरल सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन, आई सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, गाइनकोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिक एवं पीडियाट्रिक समेत विशेषज्ञ चिकित्सकों के सात पद सृजित है, लेकिन लंबे अरसे से सभी पद खाली चल रहे हैं। टेकभनीशियन न होने से एक्स-रे मशीन धूल फांक रही है। अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है ही नहीं। यहां सर्दी, जुकाम, बुखार और मामूली चोट का ही इलाज हो पाता है। यह अस्पताल रिफरल यूूनिट बनकर रह गया है। यही हाल शाहगंज, परसौना, जोगिनी व कर्मा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का है। क्षेत्र के कृष्णा शर्मा, सियाराम यादव, संदीप दूबे, सफेदलाल बैसवार, काजू अग्रहरि, दिनेश मिश्रा का कहना है कि घोरावल क्षेत्र में चिकित्सा व्यवस्था बेहद खराब है, जिसके कारण गरीब जनता झोलाछाप डॉक्टरों और फर्जी अस्पतालों के चक्कर पिस रही है।