{"_id":"5a73653c4f1c1b8d268b7c3c","slug":"81517511996-sonebhadra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाराणसी में उपचार के दौरान कैदी की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाराणसी में उपचार के दौरान कैदी की मौत
Updated Fri, 02 Feb 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोनभद्र (सलखन)। बीएचयू में बुधवार को उपचार के दौरान जिला कारागार गुर्मा में बंद हरिशंकर (27) की मौत हो गई।
डिप्टी जेलर रमाकांत दोहरे के मुताबिक अप्रैल 2017 से ओबरा थाना क्षेत्र के सेक्टर सात निवासी हरिशंकर उर्फ चिंटू एनडीपीएस एक्ट के तहत बंद था। पांच दिन पूर्व हरिशंकर को बुखार आया तो उसका इलाज कारागार के अस्पताल मेें कराया गया। कई दिन इलाज होने के बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां प्राथमिक उपचार करने के बाद डॉक्टर ने उसे बीएचयू के लिए रेफर कर दिया। बीएचयू में बुधवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। जेलर ने बताया कि शव का पीएम करवा कर घरवालों को दे दिया गया। बताते चले कि आनन-फानन में वर्ष 2016-17 में जिला कारागार शुरू कर दिया गया, लेकिन अभी भी कारागार में पेयजल, चिकित्सा आदि की सुविधाएं नहीं है। इसका खामियाजा बंदियों को भुगतना पड़ रहा है। यहां तक जिला कारागार में रोगियों को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक की व्यवस्था नहीं है।
विज्ञापन
डिप्टी जेलर रमाकांत दोहरे के मुताबिक अप्रैल 2017 से ओबरा थाना क्षेत्र के सेक्टर सात निवासी हरिशंकर उर्फ चिंटू एनडीपीएस एक्ट के तहत बंद था। पांच दिन पूर्व हरिशंकर को बुखार आया तो उसका इलाज कारागार के अस्पताल मेें कराया गया। कई दिन इलाज होने के बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां प्राथमिक उपचार करने के बाद डॉक्टर ने उसे बीएचयू के लिए रेफर कर दिया। बीएचयू में बुधवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। जेलर ने बताया कि शव का पीएम करवा कर घरवालों को दे दिया गया। बताते चले कि आनन-फानन में वर्ष 2016-17 में जिला कारागार शुरू कर दिया गया, लेकिन अभी भी कारागार में पेयजल, चिकित्सा आदि की सुविधाएं नहीं है। इसका खामियाजा बंदियों को भुगतना पड़ रहा है। यहां तक जिला कारागार में रोगियों को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक की व्यवस्था नहीं है।