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जान जोखिम में डालकर विद्यार्थी पढने जाने को मजबूर
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बीजपुर। म्योरपुर विकास खंड के ग्राम सभा पिंडारी के बिच्छी नदी का टूटा पुल दो वर्ष बाद भी जुगाड़ पर संचालित हो रहा है। पुल का अनुरक्षण नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला पंचायत कोटे से निर्मित सड़क व पुल जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा है।
ग्राम प्रधान धीरेंद्र जायसवाल ग्रामीणों की सुविधा के लिए पारिश्रमिक श्रम के सहयोग से अस्थाई जुगाड़ पुल बनाकर आवागमन की सुविधा प्रदान की है लेकिन इस व्यवस्था से प्रतिदिन विद्यालय आने जाने वाले बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं। ग्राम प्रधान ब्लॉक, तहसील और जिला के अधिकारियों को पत्र देकर पुल को बनवाने के लिए गुहार लगा चुके हैं, परंतु अधिकारियों की उदासीनता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्राम प्रधान धीरेंद्र जायसवाल, दीना नाथ, सुरेंद्र, शंकर दयाल ने बताया कि ग्राम सभा पिंडारी से नगराज टोले को जोड़ने वाली सड़क के बीच बिच्छी नदी पर बना पुल दो वर्ष पूर्व भारी वर्षा के पानी के दबाव से टूटकर नदी में बह गया जिससे ग्रामीणों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को नगराज से सेवकाडाँड़ होकर मुख्य मार्ग पहुँचने में 25 किमी की दूर तय करना पड़ता था। दूरी को कम करने के लिए ग्राम प्रधान ने जुगाड़ लगाकर पुल से आवागमन शुरू तो करा दिया है परंतु पुल से कभी भी हादसा घटित हो सकता है। बॉस बल्ली गाड़कर बनाया गया पुल को लकड़ी के सड़ने से बैठने का भी खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग का ध्यान आकृष्ट कराते हुए पुल के अनुरक्षण की मांग की है।
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ग्राम प्रधान धीरेंद्र जायसवाल ग्रामीणों की सुविधा के लिए पारिश्रमिक श्रम के सहयोग से अस्थाई जुगाड़ पुल बनाकर आवागमन की सुविधा प्रदान की है लेकिन इस व्यवस्था से प्रतिदिन विद्यालय आने जाने वाले बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं। ग्राम प्रधान ब्लॉक, तहसील और जिला के अधिकारियों को पत्र देकर पुल को बनवाने के लिए गुहार लगा चुके हैं, परंतु अधिकारियों की उदासीनता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्राम प्रधान धीरेंद्र जायसवाल, दीना नाथ, सुरेंद्र, शंकर दयाल ने बताया कि ग्राम सभा पिंडारी से नगराज टोले को जोड़ने वाली सड़क के बीच बिच्छी नदी पर बना पुल दो वर्ष पूर्व भारी वर्षा के पानी के दबाव से टूटकर नदी में बह गया जिससे ग्रामीणों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को नगराज से सेवकाडाँड़ होकर मुख्य मार्ग पहुँचने में 25 किमी की दूर तय करना पड़ता था। दूरी को कम करने के लिए ग्राम प्रधान ने जुगाड़ लगाकर पुल से आवागमन शुरू तो करा दिया है परंतु पुल से कभी भी हादसा घटित हो सकता है। बॉस बल्ली गाड़कर बनाया गया पुल को लकड़ी के सड़ने से बैठने का भी खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग का ध्यान आकृष्ट कराते हुए पुल के अनुरक्षण की मांग की है।
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