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Sonebhadra News: जिले के 1427 राजस्व गांवों में तैनात हुईं 7135 जल सखियां
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अब ग्रामीण इलाकों में दूषित पानी पीने से लोगों को निजात मिलेगी। जल स्रोतों की जांच कर लोगों को अलर्ट किया जाएगा। इसके लिए जल जीवन मिशन के तहत 629 ग्राम पंचायतों को जांच किट मुहैया करा दी गई है। जिले के 1427 राजस्व गांवों में तैनात 7127 जल सखियां किट से जल स्रोतों की जांच करेंगी। प्रत्येक सैंपल की जांच रिपोर्ट अपलोड करने पर जल सखियों की टीम को 20 रुपये मानदेय देने का निर्देश दिया गया है। कुछ गांवों में जल सखियों ने हैंडपंप, कूप समेत अन्य जल स्रोतों की जांच करना शुरू कर दिया है।
जिले के औद्योगिक क्षेत्रों के साथ ही पहाड़ी इलाकों के सैकड़ों गांवों में लगे हैंडपंप समेत अन्य जलस्रोतों से दूषित पानी निकल रहे हैं। दूषित पानी का सेवन करने से लोगों को फ्लोराइड समेत अन्य बीमारी हो रही है। पूर्व में प्रशासन की ओर से शुद्द पेयजल मुहैया कराने के लिए फ्लोराइड प्रभावित दो सौ से अधिक गांवों में रिमूवल प्लांट लगाए गए थे, लेकिन वर्तमान में अधिकांश खराब है। विवश होकर ग्रामीण दूषित पानी का सेवन कर रहे हैं। अब दूषित पेयजल का पता कर लोगों को जागरूक करने की दिशा में पहल तेज कर दी गई है। एनआरएलम के जिला प्रबंधक एमजे रवि ने बताया कि जिले के लगभग 1427 गांवों में जल सखी तैनात कर दी गई है। प्रत्येक गांव में पांच जल सखी है। ग्राम प्रधानों को जलस्रोतों की जांच करने के लिए कीट मुहैया कराते हुए जल सखियों को सैंपलिंग करने के लिए ट्रेनिंग भी दे दी गई है। कई गावों में जल सखियों ने सैंपलिंग कर रिपोर्ट अपलोड करने मेें जुट गई है। टीम एक जांच रिपोर्ट अपलोड करेगी तो उसे 20 रुपये मानदेय के रुप में दिया जाता है। ग्रामीणों को दूषित पानी उगलने वाले हैंडपंप समेत अन्य जलस्रोतों के पानी का सेवन न करने के लिए जागरूक किया जाएगा।
प्रत्येक ग्राम पंचायतों को जांच कीट मुहैया करा दी गई है। जल सखियों को ग्राम प्रधान से कीट लेकर जलस्रोतों की जांच कर रिपोर्ट अपलोड करने को कहा गया है।
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अनुराग पांडेय, डिस्ट्रिक मैनेजर जल जीवन मिशन
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जिले के औद्योगिक क्षेत्रों के साथ ही पहाड़ी इलाकों के सैकड़ों गांवों में लगे हैंडपंप समेत अन्य जलस्रोतों से दूषित पानी निकल रहे हैं। दूषित पानी का सेवन करने से लोगों को फ्लोराइड समेत अन्य बीमारी हो रही है। पूर्व में प्रशासन की ओर से शुद्द पेयजल मुहैया कराने के लिए फ्लोराइड प्रभावित दो सौ से अधिक गांवों में रिमूवल प्लांट लगाए गए थे, लेकिन वर्तमान में अधिकांश खराब है। विवश होकर ग्रामीण दूषित पानी का सेवन कर रहे हैं। अब दूषित पेयजल का पता कर लोगों को जागरूक करने की दिशा में पहल तेज कर दी गई है। एनआरएलम के जिला प्रबंधक एमजे रवि ने बताया कि जिले के लगभग 1427 गांवों में जल सखी तैनात कर दी गई है। प्रत्येक गांव में पांच जल सखी है। ग्राम प्रधानों को जलस्रोतों की जांच करने के लिए कीट मुहैया कराते हुए जल सखियों को सैंपलिंग करने के लिए ट्रेनिंग भी दे दी गई है। कई गावों में जल सखियों ने सैंपलिंग कर रिपोर्ट अपलोड करने मेें जुट गई है। टीम एक जांच रिपोर्ट अपलोड करेगी तो उसे 20 रुपये मानदेय के रुप में दिया जाता है। ग्रामीणों को दूषित पानी उगलने वाले हैंडपंप समेत अन्य जलस्रोतों के पानी का सेवन न करने के लिए जागरूक किया जाएगा।
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प्रत्येक ग्राम पंचायतों को जांच कीट मुहैया करा दी गई है। जल सखियों को ग्राम प्रधान से कीट लेकर जलस्रोतों की जांच कर रिपोर्ट अपलोड करने को कहा गया है।
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अनुराग पांडेय, डिस्ट्रिक मैनेजर जल जीवन मिशन