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प्यासे जंगली जीव सड़क हादसों में तोड़ रहे दम
Updated Sun, 22 Apr 2018 11:48 PM IST
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पेड़ों के कटान से रेणुकूट वन प्रभाग का जंगल सिमटता जा रहा है। वन माफिया पेड़ों के कटान में इस कदर हावी है कि जंगल का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। इससे पर्यावरण की क्षति होने से बरसात भी कम हो रही है। गर्मी में पानी की तलाश में जंगली जानवर बस्तियों की तरफ रूख कर रहे और सड़क पार करने के दौरान वाहनों की चपेट में आ जा रहे है।
तपन बढ़ने से वन्य जीवों को न तो छाव मिल रही और न ही उनकी प्यास ही बुझ रही है। पानी की तलाश में जंगली जानवर दम तोड़ रहे है । नगर की तरफ रुख करने के दौरान रविवार को दुद्धी बीआरसी कार्यालय पर एक बंदर पहुंच गया और जमकर उत्पात मचाया। बताया गया कि वह हाथीनाला जंगल से भटक कर वहां पहुंचा था। शनिवार की रात जाबर गांव में एक लोमड़ी जंगल से भटक कर पानी की तलाश में नगरीय क्षेत्र में आ गई। ठेमा नदी के तरफ जाते समय सड़क पार करने के दौरान वह हादसे की शिकार हो गई। प्रत्यक्षदर्शी गौतम ने बताया कि रात में उक्त लोमड़ी ट्रक की चपेट में आ गई।हैरत की बात यह है कि जीवों की जान जा रही लेकिन वन विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए है। जंगलों में जानवरों के प्यास बुझाने का इंतजाम नहीं किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश अग्रहरि ने कहा कि वन विभाग जंगल वाले क्षेत्र में जगह-जगह गड्ढे खोदकर टैंकर से 15 जून तक जल भरवा दे तो वन्य जीव इस तरह जंगल से भटक कर नगर क्षेत्र में नहीं आएंगे और बेवजह दुर्घटना के शिकार नही होंगे।
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तपन बढ़ने से वन्य जीवों को न तो छाव मिल रही और न ही उनकी प्यास ही बुझ रही है। पानी की तलाश में जंगली जानवर दम तोड़ रहे है । नगर की तरफ रुख करने के दौरान रविवार को दुद्धी बीआरसी कार्यालय पर एक बंदर पहुंच गया और जमकर उत्पात मचाया। बताया गया कि वह हाथीनाला जंगल से भटक कर वहां पहुंचा था। शनिवार की रात जाबर गांव में एक लोमड़ी जंगल से भटक कर पानी की तलाश में नगरीय क्षेत्र में आ गई। ठेमा नदी के तरफ जाते समय सड़क पार करने के दौरान वह हादसे की शिकार हो गई। प्रत्यक्षदर्शी गौतम ने बताया कि रात में उक्त लोमड़ी ट्रक की चपेट में आ गई।हैरत की बात यह है कि जीवों की जान जा रही लेकिन वन विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए है। जंगलों में जानवरों के प्यास बुझाने का इंतजाम नहीं किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश अग्रहरि ने कहा कि वन विभाग जंगल वाले क्षेत्र में जगह-जगह गड्ढे खोदकर टैंकर से 15 जून तक जल भरवा दे तो वन्य जीव इस तरह जंगल से भटक कर नगर क्षेत्र में नहीं आएंगे और बेवजह दुर्घटना के शिकार नही होंगे।
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