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Sonebhadra News: ओबरा-सी से 6 लाख घरों को मिलेगी बिजली, आज पहली इकाई का पीएम करेंगे लोकार्पण
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ओबरा। राज्य उत्पादन निगम की ओबरा सी तापीय परियोजना की 660 मेगावाट क्षमता वाली पहली इकाई का शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कानपुर से लोकार्पण करेंगे। इस इकाई को फरवरी 2024 से कॉमर्शियल लोड पर चलाया जा रहा है। इतनी ही क्षमता वाली दूसरी इकाई का फुल लोड पर संचालन सफल हो चुका है, लेकिन इसे अभी कॉमर्शियल लोड पर नहीं लिया गया है। करीब 13 हजार करोड़ से तैयार हुई 1320 मेगावाट वाली ओबरा-सी परियोजना की दोनों इकाइयों के शुरू होने से छह लाख घरों को बिजली उपलब्ध होगी।
प्रधानमंत्री कानपुर से वर्चुअल माध्यम से इकाई का लोकार्पण करेंगे। ओबरा के गांधी मैदान में इसका सीधा प्रसारण होगा। करीब एक हजार लोग इस समारोह के साक्षी बनेंगे। इसके लिए बृहस्पतिवार की शाम तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया। मैदान में भव्य पंडाल और मंच बनाया गया है। मध्य में बड़ी स्क्रीन लगाई गई है। ओबरा विधायक व सूबे के समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड, सपा सांसद छोटेलाल खरवार सहित जिले के अन्य जनप्रतिनिधि व अधिकारी कार्यक्रम में शामिल होंगे। उत्पादन निगम की ओर से राज्य मुख्यालय से निदेशक तकनीकी अश्विनी त्रिपाठी हिस्सा लेंगे। ओबरा परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक इं. आरके अग्रवाल ने तैयारियों का जायजा लिया। एसडीएम विवेक मिश्र, सीओ हर्ष पांडेय, तापीय परियोजना के जीएम प्रशासन इं. एसएन मिश्रा, डीजीएम इं. एके राय सहित अन्य अफसरों के साथ कार्यक्रम स्थल सुरक्षा व अन्य बिंदुओं पर जानकारी ली। सीजीएम ने बताया कि दोपहर करीब ढाई बजे परियोजना की पहली इकाई का लोकार्पण होगा। दूसरी इकाई को अभी पूर्ण क्षमता के साथ चलाया जा रहा है। जल्द ही इसे भी कॉमर्शियल लोड पर लिया जाएगा। दोनों इकाइयों के संचालन से ओबरा परियोजना की कुल क्षमता 2320 मेगावाट हो जाएगी। पहले से संचालित ओबरा-बी परियोजना की क्षमता एक हजार मेगावाट की है।
बता दें कि ओबरा राज्य उत्पादन निगम की सबसे पुरानी परियोजना है। पहले ओबरा-ए से 600 मेगावाट बिजली बनती थी, मगर तकनीकी कारणों से इस परियोजना को बंद कर दिया गया था। इसकी जगह नई ओबरा-सी की स्थापना की गई है।
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2016 से शुरू हुआ था निर्माण
ओबरा-सी का निर्माण दिसंबर 2016 से शुरू हुआ था। इसमें 660 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। शुरुआत में इसकी लागत 10 हजार 400 करोड़ था। इसे वर्ष 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन पहले तकनीकी कारणों और फिर कोरोना महामारी से इसके निर्माण में देरी हुई। परियोजना की कुल लागत 13 हजार करोड़ रुपये पहुंच गई। दक्षिण कोरिया की दुसान पावर इंडिया सिस्टम ने इसका निर्माण किया है। पहली इकाई का पूर्ण क्षमता से सफल ट्रायल दिसंबर 2023 में हुआ था, जबकि फरवरी 2024 में इसे कॉमर्शियल लोड पर लिया गया।
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प्रधानमंत्री कानपुर से वर्चुअल माध्यम से इकाई का लोकार्पण करेंगे। ओबरा के गांधी मैदान में इसका सीधा प्रसारण होगा। करीब एक हजार लोग इस समारोह के साक्षी बनेंगे। इसके लिए बृहस्पतिवार की शाम तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया। मैदान में भव्य पंडाल और मंच बनाया गया है। मध्य में बड़ी स्क्रीन लगाई गई है। ओबरा विधायक व सूबे के समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड, सपा सांसद छोटेलाल खरवार सहित जिले के अन्य जनप्रतिनिधि व अधिकारी कार्यक्रम में शामिल होंगे। उत्पादन निगम की ओर से राज्य मुख्यालय से निदेशक तकनीकी अश्विनी त्रिपाठी हिस्सा लेंगे। ओबरा परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक इं. आरके अग्रवाल ने तैयारियों का जायजा लिया। एसडीएम विवेक मिश्र, सीओ हर्ष पांडेय, तापीय परियोजना के जीएम प्रशासन इं. एसएन मिश्रा, डीजीएम इं. एके राय सहित अन्य अफसरों के साथ कार्यक्रम स्थल सुरक्षा व अन्य बिंदुओं पर जानकारी ली। सीजीएम ने बताया कि दोपहर करीब ढाई बजे परियोजना की पहली इकाई का लोकार्पण होगा। दूसरी इकाई को अभी पूर्ण क्षमता के साथ चलाया जा रहा है। जल्द ही इसे भी कॉमर्शियल लोड पर लिया जाएगा। दोनों इकाइयों के संचालन से ओबरा परियोजना की कुल क्षमता 2320 मेगावाट हो जाएगी। पहले से संचालित ओबरा-बी परियोजना की क्षमता एक हजार मेगावाट की है।
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बता दें कि ओबरा राज्य उत्पादन निगम की सबसे पुरानी परियोजना है। पहले ओबरा-ए से 600 मेगावाट बिजली बनती थी, मगर तकनीकी कारणों से इस परियोजना को बंद कर दिया गया था। इसकी जगह नई ओबरा-सी की स्थापना की गई है।
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2016 से शुरू हुआ था निर्माण
ओबरा-सी का निर्माण दिसंबर 2016 से शुरू हुआ था। इसमें 660 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। शुरुआत में इसकी लागत 10 हजार 400 करोड़ था। इसे वर्ष 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन पहले तकनीकी कारणों और फिर कोरोना महामारी से इसके निर्माण में देरी हुई। परियोजना की कुल लागत 13 हजार करोड़ रुपये पहुंच गई। दक्षिण कोरिया की दुसान पावर इंडिया सिस्टम ने इसका निर्माण किया है। पहली इकाई का पूर्ण क्षमता से सफल ट्रायल दिसंबर 2023 में हुआ था, जबकि फरवरी 2024 में इसे कॉमर्शियल लोड पर लिया गया।