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अमीरे शहर को हासिल बहार आज भी है
Updated Thu, 28 Dec 2017 10:33 PM IST
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सोनभद्र। मशहूर शायर मिर्जा असद उल्ला बेग खां उर्फ गालिब के 121 वें जन्मदिन पर मित्र मंच की ओर से बुधवार की रात स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह राबर्ट्सगंज में गालिब जयंती मनाई गई। इसमें महफिल-ए-मुशायरा का आयोजन हुआ। प्रख्यात शायरों ने एक से बढ़कर गजल और शायरी पेशकर खूब वाहवाही लूटी।
नगर पालिका चेयरमैन वीरेंद्र जायसवाल ने मिर्जा गालिब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और शम्मा रोशन कर कार्यक्रम की शुरूआत की। उन्होंने गजल भी पेश किया। मुशायरा की अध्यक्षता गौहर मिर्जापुरी और संचालन भदोही के शायर कासिम नदीमी ने किया। मशहूर शायर जमील खैराबादी ने अपनी गजलों से महफिल को ऊचाइयां दी। उन्होंने अमीरे शहर को हासिल बहार आज भी है, तबाह हाल मगर दस्त कार आज भी है। मुफलिसी तू मेरे बच्चों को हेकारत से न देख, हौसलामंद हैं हर बोझ उठा लेते। जैसे अनेक शेर सुनाकर वाहवाही लूटी। शायरा फलक सुल्तानपुरी वादे पे एतबार किया था यही कहे, हर लम्हा इंतजार किया था यही कहे, पहरों तुम्हारी याद में नीदें हराम की, मैने भी तुमसे प्यार किया था यही कहे। ये तेरा झूठा है इंकार यही कहना है बारम्बार न हमको भूल सकोगे। सुनाकर वाहवाही लूटी। शायर ओवैस इलाहावादी हुश्ने इत्तेफाक देखिये, आज उनकी दीद हो गयी, हसरतें मचल-मचल गयीं और मेरी ईद हो गयी। बहर बनारसी पल भर को आराम नहीं है, जबकि कोई काम नहीं है। अब्दुल हई, मैं अब खामोश रहता हूॅ, किसी से कुछ नहीं कहता। बाबा हसरत ने कभी-कभी ये भी मुद्दा है, घंटी घड़ियाल अजान की बातें शेर सुनाया। प्रद्युम्न त्रिपाठ ी ने हम आपको सलाम करते है, नजर मोहम्मद नजर ने ऑखों के अश्क पीये जा रहे है हम गजल पेश किया। अध्यक्षता कर रहे गौहर मिर्जापुरी ने अपनी उम्दा शायरी और कविताओं से श्रोताओं को खुश कर दिया। कार्यक्रम का संचालन अशोक श्रीवास्तव एडवोकेट ने किया। मित्र मंच के संयोजक विकास वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान नगर पालिका रावर्ट्सगंज के पूर्व चेयरमैन विजय कुमार जैन, राम प्रसाद यादव, चंद्रकांत शर्मा, उमेश जालान, आकाशबाणी ओबरा के निदेशक जीपी निराला, साहित्यकार रामनाथ शिवेंद्र, अमरनाथ अजेय, ज्ञानेंद शरण राय मौजूद रहे।
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नगर पालिका चेयरमैन वीरेंद्र जायसवाल ने मिर्जा गालिब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और शम्मा रोशन कर कार्यक्रम की शुरूआत की। उन्होंने गजल भी पेश किया। मुशायरा की अध्यक्षता गौहर मिर्जापुरी और संचालन भदोही के शायर कासिम नदीमी ने किया। मशहूर शायर जमील खैराबादी ने अपनी गजलों से महफिल को ऊचाइयां दी। उन्होंने अमीरे शहर को हासिल बहार आज भी है, तबाह हाल मगर दस्त कार आज भी है। मुफलिसी तू मेरे बच्चों को हेकारत से न देख, हौसलामंद हैं हर बोझ उठा लेते। जैसे अनेक शेर सुनाकर वाहवाही लूटी। शायरा फलक सुल्तानपुरी वादे पे एतबार किया था यही कहे, हर लम्हा इंतजार किया था यही कहे, पहरों तुम्हारी याद में नीदें हराम की, मैने भी तुमसे प्यार किया था यही कहे। ये तेरा झूठा है इंकार यही कहना है बारम्बार न हमको भूल सकोगे। सुनाकर वाहवाही लूटी। शायर ओवैस इलाहावादी हुश्ने इत्तेफाक देखिये, आज उनकी दीद हो गयी, हसरतें मचल-मचल गयीं और मेरी ईद हो गयी। बहर बनारसी पल भर को आराम नहीं है, जबकि कोई काम नहीं है। अब्दुल हई, मैं अब खामोश रहता हूॅ, किसी से कुछ नहीं कहता। बाबा हसरत ने कभी-कभी ये भी मुद्दा है, घंटी घड़ियाल अजान की बातें शेर सुनाया। प्रद्युम्न त्रिपाठ ी ने हम आपको सलाम करते है, नजर मोहम्मद नजर ने ऑखों के अश्क पीये जा रहे है हम गजल पेश किया। अध्यक्षता कर रहे गौहर मिर्जापुरी ने अपनी उम्दा शायरी और कविताओं से श्रोताओं को खुश कर दिया। कार्यक्रम का संचालन अशोक श्रीवास्तव एडवोकेट ने किया। मित्र मंच के संयोजक विकास वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान नगर पालिका रावर्ट्सगंज के पूर्व चेयरमैन विजय कुमार जैन, राम प्रसाद यादव, चंद्रकांत शर्मा, उमेश जालान, आकाशबाणी ओबरा के निदेशक जीपी निराला, साहित्यकार रामनाथ शिवेंद्र, अमरनाथ अजेय, ज्ञानेंद शरण राय मौजूद रहे।
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