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अधूरा रह गया ग्राम सचिवालय का सपना
Updated Sat, 13 Oct 2018 01:09 AM IST
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सोनभद्र। जिले की ग्राम पंचायतों में स्थित पंचायत भवनों को ऑनलाइन कर ग्राम सचिवालय बनाने का सपना अधूरा रह गया। पांच हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में एक ही छत के नीचे ग्राम पंचायत से जुड़ी सभी सेवाएं देने के लिए वर्षों पूर्व तैयार की जाने वाली योजना अब तक अमल में नहीं आ सकी। जिले के 637 ग्राम पंचायतों में से अब तक एक को भी आनलाइन नहीं किया जा सका। इससे ग्रामीणों को हर कार्य के लिए पंचायत सचिव और प्रधान के घर का चक्कर काटना पड़ता है।
यूपी सरकार ने करीब पांच वर्ष पूर्व यह तय किया था कि पांच हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में ग्राम सचिवालय बनाया जाएगा। इसमें एक ही छत के नीचे पंचायत राज विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी, शिक्षा, जिला पूर्ति समेत अन्य विभागों की ग्राम पंचायत स्तरीय कार्य की व्यवस्था की जानी थी। इसके लिए पंचायत भवनों को आनलाइन किया जाना था ताकि लोगों का ग्राम पंचायत स्तरीय कार्य आसानी से हो सके। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी ग्राम पंचायत को आनलाइन नहीं किया जा सका। जबकि जिले में दस हजार से अधिक आबादी वाले 13 गांव खड़िया, सलखन, बभनी, कचनरवा, चिल्काडाड़, कोटा, अनपरा, पनारी, बिल्ली-मारकुंडी, जुगैल, परासी, कुलडोमरी और कोटा हैं। इसी तरह पांच हजार से अधिक आबादी वाले 32 गांव मुर्धवा, बढ़ौली, करइल, किरविल, ककरी, हर्रा, पेढ़, निगाई, बीड़र, भरहरी, सरईगाढ़, पटवध, कनहरा, पीपरखाड़, कुड़वा, पिंडारी, आरंगपानी, लोहरा, औड़ी, जरहां, सिरसिया ठकुराई, बहुअरा, धिरा, बघाड़ू, सुकृत, जमशीला, मारकुंडी, पड़रछ, परसोई, बीजपुर, बागेसोती, मधुपुर हैं। यदि इन गांवों को आनलाइन कर दिया जाए तो लोगों को राशन कार्ड, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, कुटुंब रजिस्टर की नकद आदि आसानी से मिल सकेगा। लेकिन शासन की ओर से वर्षों पूर्व शुरू की गई इस पहल को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। उधर जिला पंचायत राज अधिकारी आरके भारती का कहना है कि पंचायत सचिवालयों के निर्माण के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में पता कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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यूपी सरकार ने करीब पांच वर्ष पूर्व यह तय किया था कि पांच हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में ग्राम सचिवालय बनाया जाएगा। इसमें एक ही छत के नीचे पंचायत राज विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी, शिक्षा, जिला पूर्ति समेत अन्य विभागों की ग्राम पंचायत स्तरीय कार्य की व्यवस्था की जानी थी। इसके लिए पंचायत भवनों को आनलाइन किया जाना था ताकि लोगों का ग्राम पंचायत स्तरीय कार्य आसानी से हो सके। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी ग्राम पंचायत को आनलाइन नहीं किया जा सका। जबकि जिले में दस हजार से अधिक आबादी वाले 13 गांव खड़िया, सलखन, बभनी, कचनरवा, चिल्काडाड़, कोटा, अनपरा, पनारी, बिल्ली-मारकुंडी, जुगैल, परासी, कुलडोमरी और कोटा हैं। इसी तरह पांच हजार से अधिक आबादी वाले 32 गांव मुर्धवा, बढ़ौली, करइल, किरविल, ककरी, हर्रा, पेढ़, निगाई, बीड़र, भरहरी, सरईगाढ़, पटवध, कनहरा, पीपरखाड़, कुड़वा, पिंडारी, आरंगपानी, लोहरा, औड़ी, जरहां, सिरसिया ठकुराई, बहुअरा, धिरा, बघाड़ू, सुकृत, जमशीला, मारकुंडी, पड़रछ, परसोई, बीजपुर, बागेसोती, मधुपुर हैं। यदि इन गांवों को आनलाइन कर दिया जाए तो लोगों को राशन कार्ड, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, कुटुंब रजिस्टर की नकद आदि आसानी से मिल सकेगा। लेकिन शासन की ओर से वर्षों पूर्व शुरू की गई इस पहल को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। उधर जिला पंचायत राज अधिकारी आरके भारती का कहना है कि पंचायत सचिवालयों के निर्माण के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में पता कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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