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सिरसिया गांव में महज एक हैंडपंप सहारा
Updated Tue, 08 May 2018 11:00 PM IST
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सोनभद्र। घोरावल ब्लॉक के हिंद़ुआरी-मिर्जापुर मार्ग के आसपास के गांवों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। ब्लॉक के सिरसिया गांव में स्थिति काफी गंभीर है। यहां 50 घरों की बस्ती में लगे चार में से तीन हैंडपंप बेकार पड़े हैं। सिर्फ एक हैंडपंप काम कर रहा। ऐसे में लोग पानी खरीद कर पी रहे और बाकी काम घाघर मुख्य नहर के पानी से निबटा रहे हैं।
गर्मी बढ़ने के साथ पानी की किल्लत से ग्रामीण जूझ रहे हैं। तापमान बढ़ने के साथ ही जल स्तर भी तेजी से नीचे खिसक रहा है। इससे लोगों को और भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। क्षेत्र के सिरसिया, सदर ब्लॉक के अतरवां, खैराही, भरूहा, भगौती, पाड़र, पटैला आदि गांवों में पानी का गंभीर संकट हो गया है। ग्रामीणों का सहारा हैंडपंप ही है लेकिन ज्यादातर हैंडपंप खराब पड़े हैं। टैंकर से पानी की आपूर्ति हो रही है लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। खैराही गांव में तो टैंकर भी नहीं चल रहा। क्षेत्र के अजय शर्मा, राकेश, ओमप्रकाश, संजय दूबे, विनोद का कहना है कि पानी के संकट के चलते 20 रुपये प्रति बोतल पानी प्रतिदिन खरीद कर पीने को विवश हैं। पाड़र गांव में करीब 50 घरों की बस्ती एक हैंडपंप है। मचोलवा में भी यह हाल है। सिरसिया गांव में तो वर्तमान में घाघर मुख्य नहर संचालित हो गई है। इसलिए यहां के लोग नहाने और कपड़ा धोने का काम नहर के पानी से चला रहे हैं। मवेशियों के लिए भी थोड़ी राहत है। लेकिन शुद्घ पेयजल लोगों को नहीं मुहैया हो पा रहा है। क्षेत्र के श्याम लाल, बैजू, मिठाई लाल, सोहन, सुनील सिंह, संतोष, मोहम्मद अब्बास, नंदलाल, रामवचन ने प्रत्येक गांव में दो से तीन टैंकर लगाकर पानी की आपूर्ति कराने की मांग की है।
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गर्मी बढ़ने के साथ पानी की किल्लत से ग्रामीण जूझ रहे हैं। तापमान बढ़ने के साथ ही जल स्तर भी तेजी से नीचे खिसक रहा है। इससे लोगों को और भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। क्षेत्र के सिरसिया, सदर ब्लॉक के अतरवां, खैराही, भरूहा, भगौती, पाड़र, पटैला आदि गांवों में पानी का गंभीर संकट हो गया है। ग्रामीणों का सहारा हैंडपंप ही है लेकिन ज्यादातर हैंडपंप खराब पड़े हैं। टैंकर से पानी की आपूर्ति हो रही है लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। खैराही गांव में तो टैंकर भी नहीं चल रहा। क्षेत्र के अजय शर्मा, राकेश, ओमप्रकाश, संजय दूबे, विनोद का कहना है कि पानी के संकट के चलते 20 रुपये प्रति बोतल पानी प्रतिदिन खरीद कर पीने को विवश हैं। पाड़र गांव में करीब 50 घरों की बस्ती एक हैंडपंप है। मचोलवा में भी यह हाल है। सिरसिया गांव में तो वर्तमान में घाघर मुख्य नहर संचालित हो गई है। इसलिए यहां के लोग नहाने और कपड़ा धोने का काम नहर के पानी से चला रहे हैं। मवेशियों के लिए भी थोड़ी राहत है। लेकिन शुद्घ पेयजल लोगों को नहीं मुहैया हो पा रहा है। क्षेत्र के श्याम लाल, बैजू, मिठाई लाल, सोहन, सुनील सिंह, संतोष, मोहम्मद अब्बास, नंदलाल, रामवचन ने प्रत्येक गांव में दो से तीन टैंकर लगाकर पानी की आपूर्ति कराने की मांग की है।
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