{"_id":"56fea9404f1c1b9131f00108","slug":"40-villages-were-not-naxal-power","type":"story","status":"publish","title_hn":"नक्सल प्रभावित 40 गांवों में नहीं पहुंची बिजली ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नक्सल प्रभावित 40 गांवों में नहीं पहुंची बिजली
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Fri, 01 Apr 2016 10:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नक्सल प्रभावित इलाके के 40 गांवों, मजरों में अब तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। हालत यह है कि कहीं खंभे हैं तो तार नहीं, कहीं खंभे-तार हैं तो बिजली नहीं। दिलचस्प मामला यह है कि इनमें से अधिकांश गांवों का कागज पर ही विद्युतीकरण कर दिया गया है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए ढिबरी-लालटेन ही सहारा बना हुआ है।
पूर्ववर्ती बसपा सरकार के समय नक्सल प्रभावित इलाकों में विद्युतीकरण का जोर-शोर से अभियान चला था। इस दौरान कई गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंची। विभागीय उदासीनता के चलते जहां तार खिंचे गए थे, उनके से अधिकांश तार या तो टूट कर गिर गए या फिर कबाड़चोरों की भेंट चढ़ गए। छत्तीसगढ़ से सटे बीजपुर इलाके का नेमना, खम्हरिया-झीलो की आधी बस्ती, रजमिलान, झारखंड से सटे पिंडारी से वसुहारी तक की 28 किमी एरिया में 25 से अधिक गांव, पटवध इलाके का खुटिया टोला, पड़री का सहपुरवा, गिधिया का दामर टोला में खंभे तो गड़े हैं, पर तार नहीं है। सोढ़ा में पचास खंभे, चेरुई में 150 खंभे, पौनी पांच खंभे, सुअरसोत-बाकी मार्ग पर बीस खंभे गाड़कर लंबे समय से छोड़ दिए गए हैं। देवरी, भीखमपुर में गड़े खंभों से तार नदारद है।
पनिकपकला, पल्हारी गांव का पपड़हवा टोला, बैजनाथ, मरकुड़ी, मंगरदह में भी खंभे गाड़ कर विद्युतीकरण कार्य ठप कर दिया गया है। मारकुड़ी में तीन-चार वर्ष पूर्व विद्युतीकरण के लिए खंभे गिरे थे, जो अभी भी उसी हाल में पड़े हैं। निगाई में लकड़ी के खंभे से बिजली आपूर्ति हो रही थी। मौजूदा समय में यह खंभे भी टूट जाने से बिजली आपूर्ति बंद है, लेकिन बिजली बिल भेजना जारी है। सबसे दिलचस्प मामला बिहार से सटे नगवां ब्लाक के अति नक्सल प्रभावित बांकी गांव का है। इस गांव में पांच वर्ष पहले विद्युतीकरण के नाम पर खंभे गाड़ कर तार खींचने के साथ ट्रंासफार्मर भी स्थापित कर दिए गए लेकिन अब तक इस गांव को बिजली नसीब नहीं हो सकी।
विज्ञापन
सदर विधायक अविनाश कुशवाहा कहते हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर वस्तुस्थिति की जानकारी दे दी है। वहीं अधीक्षण अभियंता विद्युत सुभाष चंद्र यादव ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। संबंधितों से पूरी जानकारी ली जाएगी। अगर इस मामले में संबंधितों की लापरवाही मिलती है तो जरूरी कार्रवाई भी होगी।
विज्ञापन
पूर्ववर्ती बसपा सरकार के समय नक्सल प्रभावित इलाकों में विद्युतीकरण का जोर-शोर से अभियान चला था। इस दौरान कई गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंची। विभागीय उदासीनता के चलते जहां तार खिंचे गए थे, उनके से अधिकांश तार या तो टूट कर गिर गए या फिर कबाड़चोरों की भेंट चढ़ गए। छत्तीसगढ़ से सटे बीजपुर इलाके का नेमना, खम्हरिया-झीलो की आधी बस्ती, रजमिलान, झारखंड से सटे पिंडारी से वसुहारी तक की 28 किमी एरिया में 25 से अधिक गांव, पटवध इलाके का खुटिया टोला, पड़री का सहपुरवा, गिधिया का दामर टोला में खंभे तो गड़े हैं, पर तार नहीं है। सोढ़ा में पचास खंभे, चेरुई में 150 खंभे, पौनी पांच खंभे, सुअरसोत-बाकी मार्ग पर बीस खंभे गाड़कर लंबे समय से छोड़ दिए गए हैं। देवरी, भीखमपुर में गड़े खंभों से तार नदारद है।
विज्ञापन
पनिकपकला, पल्हारी गांव का पपड़हवा टोला, बैजनाथ, मरकुड़ी, मंगरदह में भी खंभे गाड़ कर विद्युतीकरण कार्य ठप कर दिया गया है। मारकुड़ी में तीन-चार वर्ष पूर्व विद्युतीकरण के लिए खंभे गिरे थे, जो अभी भी उसी हाल में पड़े हैं। निगाई में लकड़ी के खंभे से बिजली आपूर्ति हो रही थी। मौजूदा समय में यह खंभे भी टूट जाने से बिजली आपूर्ति बंद है, लेकिन बिजली बिल भेजना जारी है। सबसे दिलचस्प मामला बिहार से सटे नगवां ब्लाक के अति नक्सल प्रभावित बांकी गांव का है। इस गांव में पांच वर्ष पहले विद्युतीकरण के नाम पर खंभे गाड़ कर तार खींचने के साथ ट्रंासफार्मर भी स्थापित कर दिए गए लेकिन अब तक इस गांव को बिजली नसीब नहीं हो सकी।
विज्ञापन
सदर विधायक अविनाश कुशवाहा कहते हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर वस्तुस्थिति की जानकारी दे दी है। वहीं अधीक्षण अभियंता विद्युत सुभाष चंद्र यादव ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। संबंधितों से पूरी जानकारी ली जाएगी। अगर इस मामले में संबंधितों की लापरवाही मिलती है तो जरूरी कार्रवाई भी होगी।