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कनहर विस्थापितों के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया संज्ञान
Updated Mon, 27 Nov 2017 11:26 PM IST
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सोनभद्र। स्वराज अभियान की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य अखिलेंद्र प्रताप सिंह के जरिए कनहर सिंचाई बांध से विस्थापित हो रहे गांवों में दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री को भेजे पत्र को मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान में लेकर प्रमुख सचिव राजस्व एवं आपदा और न्याय को आवश्यक कार्यवाही का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष सचिव शुभ्रांत कुमार शुक्ला के निर्देश पर प्रमुख सचिव राजस्व और आपदा ने डीएम सोनभद्र को नियमानुसार कार्यवाही का आदेश दिया है। जिस पर डीएम ने दुद्धी एसडीएम से आख्या तलब की है।
मजदूर किसान मंच के प्रभारी और स्वराज अभियान की राज्य कार्यसमिति के सदस्य दिनकर कपूर ने बताया कि दो नवंबर को कनहर सिंचाई बांध से विस्थापित हो रहे सुदंरी, बैरखड़, भीसुर, कोरची, कुदरी, अमवार आदि गांवों में स्वराज अभियान की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने दौरा किया था और मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था। पत्र में कनहर सिंचाई परियोजना के विस्थापित परिवारों को भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत मुआवजा देने, विस्थापितों की सूची का दुरस्तीकरण कर छूटे हुए विस्थापित परिवारों को इसमें जोड़ने, विस्थापित गांवों में वन भूमि पर पुश्तैनी बसे आदिवासियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों को वनाधिकार कानून के तहत टाइटिल प्रदान करने, कनहर सिंचाई परियोजना को अतिशीघ्र पूरा करने और सर्वोच्च रूप से दहशत एवं आतंक के वातावरण को समाप्त करने लिए आंदोलनकारियों पर लदे सभी मुकदमे वापस लेने की मांग उठायी थी।
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मजदूर किसान मंच के प्रभारी और स्वराज अभियान की राज्य कार्यसमिति के सदस्य दिनकर कपूर ने बताया कि दो नवंबर को कनहर सिंचाई बांध से विस्थापित हो रहे सुदंरी, बैरखड़, भीसुर, कोरची, कुदरी, अमवार आदि गांवों में स्वराज अभियान की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने दौरा किया था और मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था। पत्र में कनहर सिंचाई परियोजना के विस्थापित परिवारों को भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत मुआवजा देने, विस्थापितों की सूची का दुरस्तीकरण कर छूटे हुए विस्थापित परिवारों को इसमें जोड़ने, विस्थापित गांवों में वन भूमि पर पुश्तैनी बसे आदिवासियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों को वनाधिकार कानून के तहत टाइटिल प्रदान करने, कनहर सिंचाई परियोजना को अतिशीघ्र पूरा करने और सर्वोच्च रूप से दहशत एवं आतंक के वातावरण को समाप्त करने लिए आंदोलनकारियों पर लदे सभी मुकदमे वापस लेने की मांग उठायी थी।
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