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मांगों के समर्थन में चिकित्सकों ने भरी हूंकार
Updated Tue, 18 Sep 2018 12:12 AM IST
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सोनभद्र। सातवें वेतन आयोग के क्रम में प्राप्त मूल वेतन का 35 प्रतिशत प्रैक्टिस बंदी का भत्ता एक जनवरी 2016 से देने समेत अन्य मांगों को लेकर सोमवार को जिला अस्पताल में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ ने सीएमएस के नाम से उनके दफ्तर में मांगपत्र सौंपा। इस दौरान मांगों के समर्थन में डॉक्टरों ने नारेबाजी की। मांगें पूर्ण न होने पर वृहद आंदोलन करने की चेतावनी दी।
जिलाध्यक्ष केके सिंह ने कहा कि वर्षों से विभागीय प्रोन्नतियां लंबित है, जबकि विभिन्न स्तरों पर प्रोन्नति हेतु भारी संख्या में चिकित्सक मौजूद है। विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनकी विशेषता के सापेक्ष वेतन, भत्ते तथा उनकी विशेषता के अनुरूप संसाधन एवं समुचित कार्य दशाएं उपलब्ध कराएं। सचिव डॉ. आरएन सिंह ने कहा कि ग्रामीण भत्ता मूल वेतन का 25 प्रतिशत, पोस्टमार्टम भत्ता, प्रति केस सौ रुपये से बढ़ाकर दो हजार किया जाए। दंत संवर्ग के चिकित्सकों को भी विशिष्ट एसीपी का लाभ एक दिसंबर 2008 से मिले। डॉ. प्रमोद प्रजापति ने कहा कि स्वैच्छिक सेवा नियुक्ति के अधिकार को कायम रखते हुए समस्त लंबित आवेदनों को तत्काल निस्तारित करें। डॉ. संदीप ने कहा कि बिडिंग के माध्यम से आने वाले डॉक्टरों को मात्र आठ घंटे का ढाई लाख रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है, जबकि नियमित चिकित्सकों को सेवा मेें आने के समय सातों दिन 24 घंटे काम करने के लिए मात्र 60 से 70 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। डॉ. पीके सिंह ने कहा कि कार्य के लिए घंटे निर्धारित किया जाए तथा राजपत्रित अवकाश में केवल इमरजेंसी सेवाएं ही चालू रखी जाए। डॉ. एके गरौटिया ने कहा कि ड्यूटी के दौरान चिकित्सकों की सुरक्षा की व्यवस्था की जाए। डॉ. अनुराग वर्मा आदि मौजूद रहे।
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जिलाध्यक्ष केके सिंह ने कहा कि वर्षों से विभागीय प्रोन्नतियां लंबित है, जबकि विभिन्न स्तरों पर प्रोन्नति हेतु भारी संख्या में चिकित्सक मौजूद है। विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनकी विशेषता के सापेक्ष वेतन, भत्ते तथा उनकी विशेषता के अनुरूप संसाधन एवं समुचित कार्य दशाएं उपलब्ध कराएं। सचिव डॉ. आरएन सिंह ने कहा कि ग्रामीण भत्ता मूल वेतन का 25 प्रतिशत, पोस्टमार्टम भत्ता, प्रति केस सौ रुपये से बढ़ाकर दो हजार किया जाए। दंत संवर्ग के चिकित्सकों को भी विशिष्ट एसीपी का लाभ एक दिसंबर 2008 से मिले। डॉ. प्रमोद प्रजापति ने कहा कि स्वैच्छिक सेवा नियुक्ति के अधिकार को कायम रखते हुए समस्त लंबित आवेदनों को तत्काल निस्तारित करें। डॉ. संदीप ने कहा कि बिडिंग के माध्यम से आने वाले डॉक्टरों को मात्र आठ घंटे का ढाई लाख रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है, जबकि नियमित चिकित्सकों को सेवा मेें आने के समय सातों दिन 24 घंटे काम करने के लिए मात्र 60 से 70 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। डॉ. पीके सिंह ने कहा कि कार्य के लिए घंटे निर्धारित किया जाए तथा राजपत्रित अवकाश में केवल इमरजेंसी सेवाएं ही चालू रखी जाए। डॉ. एके गरौटिया ने कहा कि ड्यूटी के दौरान चिकित्सकों की सुरक्षा की व्यवस्था की जाए। डॉ. अनुराग वर्मा आदि मौजूद रहे।
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