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नाले का दूषित पानी पी रहे हैं छिकड़ाडाड़ के ग्रामीण
Updated Thu, 09 Aug 2018 12:36 AM IST
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डाला। चोपन ब्लॉक के छिकड़ाडाड़ गांव के लोग नाले का दूषित पानी पी रहे हैं। क्षेत्र में शुद्घ पेयजल की आपूर्ति का इंतजाम नहीं है। इससे लोग विभिन्न तरह के जल जनित रोगों के शिकार हो रहे हैं। बुधवार को इससे क्षुब्ध ग्रामीणों ने गांव में प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। शुद्घ पेयजल की आपूर्ति की मांग की।
चोपन ब्लॉक के कोटा ग्राम पंचायत के कई टोले शुद्ध पानी की व्यवस्था से कोसों दूर हैं। यहां के रहवासियों के लिए नदी-नाले व तालाब का दूषित पानी ही सहारा है। दूषित पानी पीने से तरह-तरह की बीमारियां हो रहीं। ग्रामीणों ने सरकार व जिला प्रशासन के विरूद्ध गांव में प्रदर्शन कर नाराजगी जताया। कहा कि सरकार को जनता ने पूर्ण बहुमत देकर प्रदेश कि गद्दी पर बैठाया है। वह सरकार गांव में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने संबंधित मूलभूत समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। गांव निवासी नौरतन, सुरेंद्र कुमार, रविशंकर, फूलवंती देवी, दौलतिया, अनीता, सविता, रेशम, फूल कुमारी, आशा, विमलेश कुमार, ऊषा, विद्यासागर, अंशू, पूनम, प्रियंका ने कहा कि जंगल में रहने वालों का जीवन जंगली जानवरों से भी बदतर है। तीन पुस्तों से लोग नाले, तालाब का ही गंदा पानी पी रहे हैं। बीसों घरों में रहने वाले सैकडों लोगों के बीच एक हैंडपंप तक नहीं लग सका। जून माह में छिकडाडांड मे आये सदर विधायक को लोगो ने पानी की समस्या से अवगत कराया था, जिसपर विधायक ने लोगो को आश्वस्त किया था कि जल्द शुद्ध पेयजल के लिए नया हैंडपंप लग जायेगा। दो माह बीत गए लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेताया कि सरकार का यही रवैया रहा तो आने वाले लोकसभा चुनाव मे ग्रामीण जनता उन्हें सबक सिखाने से नहीं चुकेगी।
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चोपन ब्लॉक के कोटा ग्राम पंचायत के कई टोले शुद्ध पानी की व्यवस्था से कोसों दूर हैं। यहां के रहवासियों के लिए नदी-नाले व तालाब का दूषित पानी ही सहारा है। दूषित पानी पीने से तरह-तरह की बीमारियां हो रहीं। ग्रामीणों ने सरकार व जिला प्रशासन के विरूद्ध गांव में प्रदर्शन कर नाराजगी जताया। कहा कि सरकार को जनता ने पूर्ण बहुमत देकर प्रदेश कि गद्दी पर बैठाया है। वह सरकार गांव में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने संबंधित मूलभूत समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। गांव निवासी नौरतन, सुरेंद्र कुमार, रविशंकर, फूलवंती देवी, दौलतिया, अनीता, सविता, रेशम, फूल कुमारी, आशा, विमलेश कुमार, ऊषा, विद्यासागर, अंशू, पूनम, प्रियंका ने कहा कि जंगल में रहने वालों का जीवन जंगली जानवरों से भी बदतर है। तीन पुस्तों से लोग नाले, तालाब का ही गंदा पानी पी रहे हैं। बीसों घरों में रहने वाले सैकडों लोगों के बीच एक हैंडपंप तक नहीं लग सका। जून माह में छिकडाडांड मे आये सदर विधायक को लोगो ने पानी की समस्या से अवगत कराया था, जिसपर विधायक ने लोगो को आश्वस्त किया था कि जल्द शुद्ध पेयजल के लिए नया हैंडपंप लग जायेगा। दो माह बीत गए लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेताया कि सरकार का यही रवैया रहा तो आने वाले लोकसभा चुनाव मे ग्रामीण जनता उन्हें सबक सिखाने से नहीं चुकेगी।
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