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खजुरी में दम तोड़ रहा खुले में शौचमुक्त अभियान
Updated Mon, 26 Jun 2017 11:47 PM IST
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सोनभद्र। केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत गांवों को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन दुद्धी ब्लॉक के खजुरी गांव में यह अभियान दम तोड़ रहा है। यहां ग्राम प्रधान की मनमानी चल रही है। वह खुद ठेकेदार बन गया है और 12 हजार रुपये की जगह सिर्फ आठ हजार रुपये की सामग्री लाभार्थियों को दे रहा है।
ब्लाक के खजुरी गांव निवासी सूर्यमणि, राजेंद्र प्रसाद, नूरजहां, कामिला देवी, साबरा देवी, बबली ने आरोप लगाया है कि खजुरी गांव में वर्ष 2016-17 व 17-18 में करीब सात सौ शौचालय निर्माण होने के लिए आये हैं जबकि अब तक 30 शौचालयों का निर्माण हुआ है। वह भी अधूरा है। ग्राम प्रधान लाभार्थियों को बालू आपूर्ति व गड्ढा खनने के लिए कहा जा रहा है। प्रधान आठ सौ ईंट तीन नंबर का, तीन तगाड़ी गिट्टी, तीन सरिया, एक दरवाजा, एक हडिय़ा के साथ मिस्त्री चार्ज 1200 रुपये देकर कुल आठ हजार रुपये खर्च करा जा रहा है। जो लाभार्थी खुद गढ्ढा खनने को और बालू लगाने को तैयार हैं, उसी को सामग्री दी जा रही है। शेष चार हजार रूपये गोलमाल कर दिया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसमें सेक्रेटरी और एडीओ पंचायत की भूमिका भी संदिग्ध है। एडीओ लाभार्थियों की सूची नहीं दे रहे। सेक्रेटरी हृदयनारायण सिंह का कहना है कि उन्हें ज्वाइन किये 10 दिन हुए हैं। देखकर ही बता पाएंगे की कितना बना है। खजुरी ग्राम प्रधान दीपरानी का कहना है कि सूची तो ज्यादा बन कर गयी थी, लेकिन वर्ष 16-17 में 60 शौचालय आए और 17-18 में 75 शौचालय आये, जिसमें से पिछले वर्ष का 60 शौचालय पूर्ण है। इस वर्ष के 75 में से 30 पूर्ण हैं। वे लाभार्थियों को सभी सामान के साथ बालू भी दे रही हैं। इसकी जांच कराई जा सकती है।
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ब्लाक के खजुरी गांव निवासी सूर्यमणि, राजेंद्र प्रसाद, नूरजहां, कामिला देवी, साबरा देवी, बबली ने आरोप लगाया है कि खजुरी गांव में वर्ष 2016-17 व 17-18 में करीब सात सौ शौचालय निर्माण होने के लिए आये हैं जबकि अब तक 30 शौचालयों का निर्माण हुआ है। वह भी अधूरा है। ग्राम प्रधान लाभार्थियों को बालू आपूर्ति व गड्ढा खनने के लिए कहा जा रहा है। प्रधान आठ सौ ईंट तीन नंबर का, तीन तगाड़ी गिट्टी, तीन सरिया, एक दरवाजा, एक हडिय़ा के साथ मिस्त्री चार्ज 1200 रुपये देकर कुल आठ हजार रुपये खर्च करा जा रहा है। जो लाभार्थी खुद गढ्ढा खनने को और बालू लगाने को तैयार हैं, उसी को सामग्री दी जा रही है। शेष चार हजार रूपये गोलमाल कर दिया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसमें सेक्रेटरी और एडीओ पंचायत की भूमिका भी संदिग्ध है। एडीओ लाभार्थियों की सूची नहीं दे रहे। सेक्रेटरी हृदयनारायण सिंह का कहना है कि उन्हें ज्वाइन किये 10 दिन हुए हैं। देखकर ही बता पाएंगे की कितना बना है। खजुरी ग्राम प्रधान दीपरानी का कहना है कि सूची तो ज्यादा बन कर गयी थी, लेकिन वर्ष 16-17 में 60 शौचालय आए और 17-18 में 75 शौचालय आये, जिसमें से पिछले वर्ष का 60 शौचालय पूर्ण है। इस वर्ष के 75 में से 30 पूर्ण हैं। वे लाभार्थियों को सभी सामान के साथ बालू भी दे रही हैं। इसकी जांच कराई जा सकती है।
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