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जिले में बढ़ रही एचआईवी रोगियों की संख्या
Updated Thu, 29 Nov 2018 10:47 PM IST
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सोनभद्र। जनपद में प्रत्येक वर्ष एचआईवी रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह हाल तब है जब उत्तर प्रदेश राज्य एडस सोसाइटी द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा। जिला अस्पताल में वर्ष 2013-14 से अब तक 24977 लोगों की जांच की गई। इसमें 319 लोग एचआईवी से पीड़ित पाए गए हैं। बीएचयू वाराणसी के डॉक्टरों द्वारा एचआईवी से पीड़ित लोगों का उपचार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में वर्ष 2013-14 में 4426 लोगों की जांच की गई, जिसमें 33 एचआईवी से पीड़ित मिले। 2014-15 में 3483 लोगों की जांच हुई, इनमें 49 रोगी मिले। 2015-16 में 4090 की जांच हुई 66 रोगी मिले, 2016-17 में 4066 की जांच हुई, जिसमें 38 पीड़ित मिले, 2017-18 में 4565 लोगों की जांच हुई जिसमें 79 रोगी मिले और 2018-19 में 29 नवंबर तक 4041 लोगों की जांच हुई, जिसमें 64 मरीज मिले। इसके बाद मरीजों को बीएचयू रेफर कर दिया गया। जांच में मारकुंडी खनन क्षेत्र में सर्वाधिक एचआईवी के मरीज मिले हैं। खनन क्षेत्रों मेें जिले के अलावा गैर जनपदों से भी श्रमिक कार्य करने को आते हैं। इन श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं होता, इसलिए उनको कौन सा रोग है इसका पता नहीं चल पाता है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त या रक्त उत्पाद के चढ़ाए जाने से एसआईवी फैलता है। कहा कि एचआईवी एक ऐसा वाइरस है जो कि केवल मानव शरीर में हो सकता है तथा मुनष्य की प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे कम कर देता है या नष्ट कर देता है। एचआईवी से एड्स की अवस्था तक पहुंचने में पांच से दस साल लगते है। एड्स के मुख्य लक्षण वजन घटना, एक माह से अधिक बुखार, दस्त रहना है। कहा कि एड्स से बचने के लिए जीवन साथी के प्रति वफादारी करें, नियमित सही ढंग से कंडोम का प्रयोग करें।
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स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में वर्ष 2013-14 में 4426 लोगों की जांच की गई, जिसमें 33 एचआईवी से पीड़ित मिले। 2014-15 में 3483 लोगों की जांच हुई, इनमें 49 रोगी मिले। 2015-16 में 4090 की जांच हुई 66 रोगी मिले, 2016-17 में 4066 की जांच हुई, जिसमें 38 पीड़ित मिले, 2017-18 में 4565 लोगों की जांच हुई जिसमें 79 रोगी मिले और 2018-19 में 29 नवंबर तक 4041 लोगों की जांच हुई, जिसमें 64 मरीज मिले। इसके बाद मरीजों को बीएचयू रेफर कर दिया गया। जांच में मारकुंडी खनन क्षेत्र में सर्वाधिक एचआईवी के मरीज मिले हैं। खनन क्षेत्रों मेें जिले के अलावा गैर जनपदों से भी श्रमिक कार्य करने को आते हैं। इन श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं होता, इसलिए उनको कौन सा रोग है इसका पता नहीं चल पाता है।
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इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त या रक्त उत्पाद के चढ़ाए जाने से एसआईवी फैलता है। कहा कि एचआईवी एक ऐसा वाइरस है जो कि केवल मानव शरीर में हो सकता है तथा मुनष्य की प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे कम कर देता है या नष्ट कर देता है। एचआईवी से एड्स की अवस्था तक पहुंचने में पांच से दस साल लगते है। एड्स के मुख्य लक्षण वजन घटना, एक माह से अधिक बुखार, दस्त रहना है। कहा कि एड्स से बचने के लिए जीवन साथी के प्रति वफादारी करें, नियमित सही ढंग से कंडोम का प्रयोग करें।
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