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नक्सल क्षेत्र में स्वच्छता अभियान की उड़ रही धज्जी
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:08 PM IST
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सोनभद्र। जिले में विगत कई साल से स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम संचालित हो रहा। इसके तहत गांवों को खुले में शौचमुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित है। दो अक्तूबर 2018 तक पूरे जिले को ओडीएफ घोषित किया जाना है। लेकिन इसकी प्रगति काफी धीमी है। इसका अंदाजा जिले के उन चार ब्लॉकों से लगाया जा सकता है, जहां के एक भी गांव ओडीएफ नहीं घोषित हुए। ऐसा प्रतीत होता है जैसे विभाग ने पूरी ताकत सिर्फ राबर्ट्सगंज और घोरावल ब्लॉक में ही झोंकी है।
जिले में आठ ब्लॉक हैं। इसमें राबर्ट्सगंज में 140, घोरावल 144, चतरा 60, नगवां 52, चोपन 61, दुद्धी 60, म्योरपुर 80 और बभनी ब्लॉक में 40 ग्राम पंचायतें हैं। इस तरह जिले में कुल 637 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों को खुले में शौचमुक्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। गांव-गांव में निगरानी समितियां गठित की गई हैं जो सुबह और शाम खुले में शौच बंद करने के लिए निगरानी कर रही हैं लेकिन ओडीएफ गांवों को लेकर कार्य प्रगति काफी धीमी मानी जा रही है। इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि नगवां के 52, दुद्धी के 60, चोपन के 61 और म्योरपुर के 80 कुल 253 गांवों में से एक भी गांव को अब तक ओडीएफ नहीं घोषित किया जा सका है। चतरा के 60 में से एक और बभनी के 40 में से एक गांव ही ओडीएफ हुए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के जिला कोआर्डिनेटर अनिल केशरी का कहना है कि सभी ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियां कार्य कर रही हैं। शौचालयों का निर्माण भी करीब सौ से अधिक गांवों में अंतिम चरण में है। अगस्त तक इन सौ गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा सकता है। बताया कि बालू न मिलने से शौचालयों का निर्माण प्रभावित हो रहा है।
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जिले में आठ ब्लॉक हैं। इसमें राबर्ट्सगंज में 140, घोरावल 144, चतरा 60, नगवां 52, चोपन 61, दुद्धी 60, म्योरपुर 80 और बभनी ब्लॉक में 40 ग्राम पंचायतें हैं। इस तरह जिले में कुल 637 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों को खुले में शौचमुक्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। गांव-गांव में निगरानी समितियां गठित की गई हैं जो सुबह और शाम खुले में शौच बंद करने के लिए निगरानी कर रही हैं लेकिन ओडीएफ गांवों को लेकर कार्य प्रगति काफी धीमी मानी जा रही है। इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि नगवां के 52, दुद्धी के 60, चोपन के 61 और म्योरपुर के 80 कुल 253 गांवों में से एक भी गांव को अब तक ओडीएफ नहीं घोषित किया जा सका है। चतरा के 60 में से एक और बभनी के 40 में से एक गांव ही ओडीएफ हुए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के जिला कोआर्डिनेटर अनिल केशरी का कहना है कि सभी ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियां कार्य कर रही हैं। शौचालयों का निर्माण भी करीब सौ से अधिक गांवों में अंतिम चरण में है। अगस्त तक इन सौ गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा सकता है। बताया कि बालू न मिलने से शौचालयों का निर्माण प्रभावित हो रहा है।
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