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जमीन चिन्हित हुई, नही बनें विद्यालय
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सोनभद्र। जिले में आदिवासियों की संख्या काफी ज्यादा है। लेकिन उनके बच्चों की शिक्षा को लेकर कोई सरकारें गंभीर नही रहीं। आदिवासी बच्चों के लिए रॉबर्ट्सगंज, नगवां और बभनी क्षेत्र में करीब दस साल पूर्व इंटर कालेज भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिली। जमीन भी चिह्नित कर ली गई लेकिन अब तक बजट ही नही आया। इससे बच्चों का आवासीय विद्यालय अब तक नही बन सका है।
जिले को आदिवासी बाहुल्य माना जाता है। यहां के म्योरपुर, बभनी, दुद्धी, चोपन और नगवां ब्लॉक में आदिवासियों की संख्या ज्यादा है। लेकिन इन वर्ग के लोगों को अब भी बुनियादी सुविधाएं सही मायने में मुहैया नहीं हैं। आदिवासी बालक-बालिकाओं के लिए वर्ष 2004-05 में तत्कालीन सरकार ने आवासीय इंटर कालेज का निर्माण कराने को निर्णय लिया था। इसको लेकर पहल इस सीमा तक हो गई थी कि जमीन का चिह्नांकन भी कर लिया गया था। राबर्ट्सगंज ब्लॉक के लोढ़ी ग्राम पंचायत में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग आवासी कालेज के लिए दस हेक्टेयर जमीन, नगवां ब्लॉक के सियरिया गांव में बालिका शिक्षा के लिए पांच हेक्टेयर जमीन और बभनी में भी पांच हेक्टेयर जमीन चिह्नित कर ली गई थी। जनजाति विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार इन जमीनों का अधिग्रहण भी हो चुका है। लेकिन करीब दस वर्ष से कालेज भवन बनाने का मामला अधर में लटका पड़ा है। अब यह मामला पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चला गया है। वजह कि तब से अब तक जितनी भी सरकारें आईं, किसी ने भी आदिवासी इंटर कालेज के लिए जनजाति विकास विभाग को बजट ही नहीं दिया। जबकि सामान्य तौर पर कालेजों पर पढ़ने वाली छात्राओं को विभाग की ओर से साइकिल, पुस्तकें पूर्व में नि:शुल्क दी जाती रही हैं। बजट न मिलने के नाते इन विद्यालयों का निर्माण अधर में लटका हुआ है। इस बाबत मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार द्विवेदी का कहना है कि इस मामले को संज्ञान में लेकर शासन स्तर पर पत्राचार किया जाएगा।
जिले को आदिवासी बाहुल्य माना जाता है। यहां के म्योरपुर, बभनी, दुद्धी, चोपन और नगवां ब्लॉक में आदिवासियों की संख्या ज्यादा है। लेकिन इन वर्ग के लोगों को अब भी बुनियादी सुविधाएं सही मायने में मुहैया नहीं हैं। आदिवासी बालक-बालिकाओं के लिए वर्ष 2004-05 में तत्कालीन सरकार ने आवासीय इंटर कालेज का निर्माण कराने को निर्णय लिया था। इसको लेकर पहल इस सीमा तक हो गई थी कि जमीन का चिह्नांकन भी कर लिया गया था। राबर्ट्सगंज ब्लॉक के लोढ़ी ग्राम पंचायत में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग आवासी कालेज के लिए दस हेक्टेयर जमीन, नगवां ब्लॉक के सियरिया गांव में बालिका शिक्षा के लिए पांच हेक्टेयर जमीन और बभनी में भी पांच हेक्टेयर जमीन चिह्नित कर ली गई थी। जनजाति विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार इन जमीनों का अधिग्रहण भी हो चुका है। लेकिन करीब दस वर्ष से कालेज भवन बनाने का मामला अधर में लटका पड़ा है। अब यह मामला पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चला गया है। वजह कि तब से अब तक जितनी भी सरकारें आईं, किसी ने भी आदिवासी इंटर कालेज के लिए जनजाति विकास विभाग को बजट ही नहीं दिया। जबकि सामान्य तौर पर कालेजों पर पढ़ने वाली छात्राओं को विभाग की ओर से साइकिल, पुस्तकें पूर्व में नि:शुल्क दी जाती रही हैं। बजट न मिलने के नाते इन विद्यालयों का निर्माण अधर में लटका हुआ है। इस बाबत मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार द्विवेदी का कहना है कि इस मामले को संज्ञान में लेकर शासन स्तर पर पत्राचार किया जाएगा।
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