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काव्यमंचों से फिल्मी गीतों पर तक बनाई पहुंच
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सोनभद्र। अति पिछड़े जिले के बुड़हर की संकरी गलियों में पली बड़ी रचना साहित्य के क्षेत्र में एक दिन अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर पहचान बनाती नजर आएंगी.. यह किसी ने सोचा भी नहीं था। ..लेकिन सीमेंट फैक्ट्री कर्मी वेदव्यास देव पांडेय और शिक्षक ऊषारानी पांडेय की लाडली रचना तिवारी ने न केवल अपनी रचनाओं, कविताओं और गीतों से सोनभद्र को पहचान दिलाई बल्कि पूर्वांचल का गौरव भी बन गई।
जहां कई काव्य संग्रहों में उनकी कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं। वहीं उनके गीत ख्वाबों में आते हो आधी रात कोई देख न ले...को जानी मानी फिल्म गीतकार अलका याग्निक और जावेद अख्तर अपना स्वर भी दे चुके हैं। मौजूदा समय दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा चेन्नई से पीएचडी कर रहीं रचना तिवारी ने इंटर तक की पढ़ाई चुर्क इंटर कॉलेज से और स्नातक की पढ़ाई ओबरा से की। दस मार्च 1970 को जन्मी रचना की रुचि बचपन से ही साहित्य की तरफ थीं। मां शिक्षिका थीं, इस कारण महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद की रचनाएं घर पर ही उपलब्ध थीं। बताती हैं कि इसे वह पढ़ा करती थीं। इसके लिए उन्होंने कई बार डांट भी सुनीं लेकिन लेखन के प्रति रुचि कम नहीं हुई। 11वीं में सीमेंट समाचार पत्रिका में पहली कविता प्रकाशित हुई तो सपनों के पंख लग गए। बीए की पढ़ाई पूरी होते-होते रचना की गिनती गिनी-चुनी कवियत्रियों में होने लगी। स्थानीय स्तर पर कई काव्य गोष्ठियों में शिरकत के बाद 2003 में तियरा में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करने का मौका मिला तो रचना ने यहां भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा दिया। इसके बाद मधुरिमा साहित्य गोष्ठी सहित कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुति दी। इसके लिए उन्हें महादेवी वर्मा पुरस्कार, झांसी की रानी पुरस्कार, साहित्य गौरव, पं. रूपनारायण त्रिपाठी सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं। 2009 में लखनऊ के यशपाल सभागार में हुए सम्मान में उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित गीतकार सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। 2014 में उन्हें लोस चुनाव में जिले से मतदाता चुनाव की ब्रांड अंबेसडर भी चुना गया था।
इनसेट
महिलाएं-युवतियां तय करें उद्देश्य, बढ़ें आगे
सोनभद्र। रचना तिवारी कहती है कि प्रत्येक लड़की, महिला को औरत होने पर गर्व करना चाहिए। जीवन में आगे बढ़ने के लिए एक उद्देश्य, लक्ष्य तय करें। बड़े स्तर पर न हो सके, तो गली-मोहल्ले स्तर पर ही सकारात्मक कदम बढ़ाएं।
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जहां कई काव्य संग्रहों में उनकी कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं। वहीं उनके गीत ख्वाबों में आते हो आधी रात कोई देख न ले...को जानी मानी फिल्म गीतकार अलका याग्निक और जावेद अख्तर अपना स्वर भी दे चुके हैं। मौजूदा समय दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा चेन्नई से पीएचडी कर रहीं रचना तिवारी ने इंटर तक की पढ़ाई चुर्क इंटर कॉलेज से और स्नातक की पढ़ाई ओबरा से की। दस मार्च 1970 को जन्मी रचना की रुचि बचपन से ही साहित्य की तरफ थीं। मां शिक्षिका थीं, इस कारण महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद की रचनाएं घर पर ही उपलब्ध थीं। बताती हैं कि इसे वह पढ़ा करती थीं। इसके लिए उन्होंने कई बार डांट भी सुनीं लेकिन लेखन के प्रति रुचि कम नहीं हुई। 11वीं में सीमेंट समाचार पत्रिका में पहली कविता प्रकाशित हुई तो सपनों के पंख लग गए। बीए की पढ़ाई पूरी होते-होते रचना की गिनती गिनी-चुनी कवियत्रियों में होने लगी। स्थानीय स्तर पर कई काव्य गोष्ठियों में शिरकत के बाद 2003 में तियरा में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करने का मौका मिला तो रचना ने यहां भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा दिया। इसके बाद मधुरिमा साहित्य गोष्ठी सहित कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुति दी। इसके लिए उन्हें महादेवी वर्मा पुरस्कार, झांसी की रानी पुरस्कार, साहित्य गौरव, पं. रूपनारायण त्रिपाठी सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं। 2009 में लखनऊ के यशपाल सभागार में हुए सम्मान में उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित गीतकार सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। 2014 में उन्हें लोस चुनाव में जिले से मतदाता चुनाव की ब्रांड अंबेसडर भी चुना गया था।
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महिलाएं-युवतियां तय करें उद्देश्य, बढ़ें आगे
सोनभद्र। रचना तिवारी कहती है कि प्रत्येक लड़की, महिला को औरत होने पर गर्व करना चाहिए। जीवन में आगे बढ़ने के लिए एक उद्देश्य, लक्ष्य तय करें। बड़े स्तर पर न हो सके, तो गली-मोहल्ले स्तर पर ही सकारात्मक कदम बढ़ाएं।
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