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प्रदेश में 18 रैंक चढ़े, नार्थ जोन में खिसक गए 26 पायदान
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डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, बाजार में नियमित सफाई, स्वच्छता संबंधी शिकायतों के निस्तारण ने नगर की स्वच्छता रैंकिंग को प्रदेश में तो 18 पायदान ऊपर चढ़ा दिया लेकिन नार्थ जोन के निकायों में नगर पालिका फिर पिछड़ गया है। नार्थ जोन के 200 निकायों में सोनभद्र (राबर्ट्सगंज) नगर पालिका 26 पायदान नीचे खिसक गया है।
भारत सरकार के आवासीय एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की तरफ से हर वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण की प्रतियोगिता कराई जाती है। इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार की ओर से नगर निकायों को काफी बजट भी दिया जाता है। इससे सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता संबंधित पेंटिंग, पोस्टर, बैनर लगवाने, सार्वजनिक शौचालय, डस्टबिन, कूड़ा निस्तारण का प्रबंधन समेत साफ-सफाई से जुड़े कई कार्य कराए जाते हैं। इन तमाम प्रयासों के बाद भी नगर पालिका परिषद क्षेत्र में स्वच्छता के मुकम्मल इंतजाम नहीं है।
हालांकि नगर पालिका प्रशासन की तरफ से साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर करने एवं डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कराने का दावा किया जाता रहा है। बहरहाल, स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में 50 हजार से नीचे की आबादी वाली नगर निकायों में पिछले वर्ष राबर्ट्सगंज नगर पालिका को प्रदेश में 58वीं रैंक प्राप्त हुई थी। इस वर्ष 18 रैंक के सुधार के साथ 40वीं रैंक पर पहुंच गया है। वहीं नार्थ जोन के 200 निकायों में पिछले वर्ष 51वां स्थान मिला था, जो इस वर्ष फिसलकर 77वें स्थान पर पहुंच गया है। रैंकिंग में नगर क्षेत्र में तालाबों के साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब रही है।
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किस क्षेत्र में अच्छे, कहां रहे पीछे
नगर की सड़कों पर साफ-सफाई, डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने, कूड़ा निस्तारण एवं व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ छह बिंदुओं पर हुए सर्वेक्षण में राबर्ट्सगंज नगर पालिका का प्रदर्शन बेहतर है। शिकायतों के निस्तारण सही तरीके से होने, नगर पालिका के सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति संतोषजनक मिली है। सबसे खराब स्थित नगर स्थित सार्वजनिक तालाबों की रही है।
2020 में थी अच्छी रैकिंग तो फिर कहां हुई चूक
नगर पालिका सोनभद्र की रैकिंग पिछले दो वर्ष से खराब हुई है। वर्ष 2020 की रैकिंग पर ध्यान दें तो उस समय नार्थ जोन में नगर पालिका को 23वां स्थान और प्रदेश स्तर पर 17वां स्थान प्राप्त हुआ था। हालांकि तब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का कम आकलन किया गया था। यदि इसकी तुलना पिछले दो वर्षो में प्राप्त हुई रैंकिंग से करें तो, यह संतोषजनक स्थिति में नहीं है।
स्वच्छता कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास चल रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद प्रदेश स्तर पर नगर पालिका सोनभद्र का बेहतरीन प्रदर्शन रहा है। एमआरएफ सेंटर का काम शुरू हो गया है। अगले वर्ष बेहतर स्थिति में पहुंचने की उम्मीद है। - नीरज कुमार, डीपीएम, स्वच्छ भारत मिशन (नगरीय)।
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भारत सरकार के आवासीय एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की तरफ से हर वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण की प्रतियोगिता कराई जाती है। इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार की ओर से नगर निकायों को काफी बजट भी दिया जाता है। इससे सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता संबंधित पेंटिंग, पोस्टर, बैनर लगवाने, सार्वजनिक शौचालय, डस्टबिन, कूड़ा निस्तारण का प्रबंधन समेत साफ-सफाई से जुड़े कई कार्य कराए जाते हैं। इन तमाम प्रयासों के बाद भी नगर पालिका परिषद क्षेत्र में स्वच्छता के मुकम्मल इंतजाम नहीं है।
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हालांकि नगर पालिका प्रशासन की तरफ से साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर करने एवं डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कराने का दावा किया जाता रहा है। बहरहाल, स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में 50 हजार से नीचे की आबादी वाली नगर निकायों में पिछले वर्ष राबर्ट्सगंज नगर पालिका को प्रदेश में 58वीं रैंक प्राप्त हुई थी। इस वर्ष 18 रैंक के सुधार के साथ 40वीं रैंक पर पहुंच गया है। वहीं नार्थ जोन के 200 निकायों में पिछले वर्ष 51वां स्थान मिला था, जो इस वर्ष फिसलकर 77वें स्थान पर पहुंच गया है। रैंकिंग में नगर क्षेत्र में तालाबों के साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब रही है।
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नगर की सड़कों पर साफ-सफाई, डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने, कूड़ा निस्तारण एवं व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ छह बिंदुओं पर हुए सर्वेक्षण में राबर्ट्सगंज नगर पालिका का प्रदर्शन बेहतर है। शिकायतों के निस्तारण सही तरीके से होने, नगर पालिका के सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति संतोषजनक मिली है। सबसे खराब स्थित नगर स्थित सार्वजनिक तालाबों की रही है।
2020 में थी अच्छी रैकिंग तो फिर कहां हुई चूक
नगर पालिका सोनभद्र की रैकिंग पिछले दो वर्ष से खराब हुई है। वर्ष 2020 की रैकिंग पर ध्यान दें तो उस समय नार्थ जोन में नगर पालिका को 23वां स्थान और प्रदेश स्तर पर 17वां स्थान प्राप्त हुआ था। हालांकि तब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का कम आकलन किया गया था। यदि इसकी तुलना पिछले दो वर्षो में प्राप्त हुई रैंकिंग से करें तो, यह संतोषजनक स्थिति में नहीं है।
स्वच्छता कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास चल रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद प्रदेश स्तर पर नगर पालिका सोनभद्र का बेहतरीन प्रदर्शन रहा है। एमआरएफ सेंटर का काम शुरू हो गया है। अगले वर्ष बेहतर स्थिति में पहुंचने की उम्मीद है। - नीरज कुमार, डीपीएम, स्वच्छ भारत मिशन (नगरीय)।