{"_id":"5be5ca14bdec22696c1d2469","slug":"171541786132-sonebhadra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तपस्या श्रद्धा और भक्ति पर टिके हैं नैतिक मूल्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तपस्या श्रद्धा और भक्ति पर टिके हैं नैतिक मूल्य
Updated Fri, 09 Nov 2018 11:33 PM IST
विज्ञापन
सोनभद्र। राबटर्सगंज के इमरती कालोनी में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ किया गया। इसके लिए दोपहर में काशी धर्मपीठाधीश्वर जगद् गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद महाराज की अगुवाई में भव्य शोभायात्रा और कलशयात्रा निकाली गई। गाजे-बाजे के साथ कड़ी सुरक्षा में इमरती कालोनी से निकली शोभायात्रा शोभनाथ मंदिर से होते हुए ज्ञानयज्ञ स्थल पर पहुंची। इसमें 1001 कुंवारी कन्याओं और महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में भाग लिया। शोभायात्रा में सजी झांकी आकर्षण का केंद्र रही।
भागवत वाचन में स्वामी नारायणानंद महाराज ने कहा कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए मन में दृढ़ संकल्प होना आवश्यक है। मनुष्य के दृढ़ संकल्प से ही धर्म, कर्म, यज्ञ, व्रत और भागवत श्रवण आदि संभव होता है। उन्होंने कहा कि सृष्टि में नैतिक मूल्यों को टिकाए रखने के लिए लोगों का तपस्वी होना जरूरी है। क्यों कि समर्थ लोगों की तपस्या, श्रद्धा और भक्ति ही अच्छे मूल्यों को टिकाए रखती है। कहा कि साधना, उपासना करते हुए भी बार-बार पथ से विचलित होना पड़ता है। ऐसी असफलताएं ही जीवन लक्ष्य में बाधक हैं। शक्ति उपासकों को यह बात कभी नहीं भूलनी चाहिए कि महान कार्यों को करने के लिए महान तपस्या करनी पड़ती है। कष्टों, कठिनाइयों, विपरीत परिस्थितियों को सहन करना पड़ता है। क्योंकि बिना कठिनाई झेले कोई सत्कर्म नहीं हो सकता। विश्व में कई संस्कृतियां नष्ट हो गई लेकिन वैदिक संस्कृति बनी रही। कहा कि भारतीय संस्कृति ही विश्व संस्कृति है जिसका संबंध सीधे ईश्वर के साथ है। उसकी रक्षा करने के लिए सनातन धर्म में अनेक देवी-देवताओं के अवतार होते हैं। इसका तात्पर्य है कि जहां मानवीय शक्ति कमजोर हो जाती है, वहां भक्त ईश्वर की आराधना करते हैं। ईश्वरीय शक्ति आकर दुष्टों का संहार कर धर्म की मर्यादा स्थापित करती है। राज्यसभा सांसद रामशकल, शिव प्रसाद पांडेय, पारसनाथ पांडेय, ओमप्रकाश पांडेय, नागेंद्र दुबे, हरि शुक्ल, राममणि सारस्वत, महेंद्र दुबे, नागेश्वर तिवारी, गिरिजाशंकर ओझा आदि ने पादुका पूजन एवं माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
विज्ञापन
भागवत वाचन में स्वामी नारायणानंद महाराज ने कहा कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए मन में दृढ़ संकल्प होना आवश्यक है। मनुष्य के दृढ़ संकल्प से ही धर्म, कर्म, यज्ञ, व्रत और भागवत श्रवण आदि संभव होता है। उन्होंने कहा कि सृष्टि में नैतिक मूल्यों को टिकाए रखने के लिए लोगों का तपस्वी होना जरूरी है। क्यों कि समर्थ लोगों की तपस्या, श्रद्धा और भक्ति ही अच्छे मूल्यों को टिकाए रखती है। कहा कि साधना, उपासना करते हुए भी बार-बार पथ से विचलित होना पड़ता है। ऐसी असफलताएं ही जीवन लक्ष्य में बाधक हैं। शक्ति उपासकों को यह बात कभी नहीं भूलनी चाहिए कि महान कार्यों को करने के लिए महान तपस्या करनी पड़ती है। कष्टों, कठिनाइयों, विपरीत परिस्थितियों को सहन करना पड़ता है। क्योंकि बिना कठिनाई झेले कोई सत्कर्म नहीं हो सकता। विश्व में कई संस्कृतियां नष्ट हो गई लेकिन वैदिक संस्कृति बनी रही। कहा कि भारतीय संस्कृति ही विश्व संस्कृति है जिसका संबंध सीधे ईश्वर के साथ है। उसकी रक्षा करने के लिए सनातन धर्म में अनेक देवी-देवताओं के अवतार होते हैं। इसका तात्पर्य है कि जहां मानवीय शक्ति कमजोर हो जाती है, वहां भक्त ईश्वर की आराधना करते हैं। ईश्वरीय शक्ति आकर दुष्टों का संहार कर धर्म की मर्यादा स्थापित करती है। राज्यसभा सांसद रामशकल, शिव प्रसाद पांडेय, पारसनाथ पांडेय, ओमप्रकाश पांडेय, नागेंद्र दुबे, हरि शुक्ल, राममणि सारस्वत, महेंद्र दुबे, नागेश्वर तिवारी, गिरिजाशंकर ओझा आदि ने पादुका पूजन एवं माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
विज्ञापन