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बीएसएनएलकर्मियों ने प्रदर्शन कर उठाई आवाज
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सोनभद्र। ऑल यूनियन, एसोसिएशन आफ बीएसएनएल की तरफ से पांच सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को भी बीएसएनएल अधिकारियों-कर्मचारियों ने राबटर्सगंज स्थित दफ्तर पर प्रदर्शन कर आवाज उठाई।
एसडीई शैलेष निगम, धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बीएसएनएल को 4जी स्पेक्ट्रम का आवंटन करने सहित अन्य मांगों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पंकज यादव, राजेश कुमार ने बीएसएनएल की भूमि प्रबंधन नीति को अनुमोदित करने की मांग की। कहा कि बीएसएनएल स्थापना के समय संपत्तियों के स्थानांतरण संबंधी जो भी निर्णय लागू किए गए थे, उसे अतिशीघ्र लागू किया जाए। आशीष कुमार द्विवेदी, शिव सत्यशरण सिंह, महेंद्र शर्मा, सुरेंद्रधर दुबे का कहना था कि बीएसएनएल को बैंक से ऋण लेने के प्रस्ताव के लिए लेटर आफ कंफर्ट की जरूरत है। इसे जल्द जारी किया जाए। बीएसएनएल के मोबाइल सेवा का आटसोर्सिंग के माध्यम से संचालन-रखरखाव के प्रस्ताव को अविलंब निरस्त करने की भी मांग जोर-शोर से उठाई गई। शकील अहमद, रामनारायण, सूर्यभान, राधेश्याम, चंद्रशेखर, छविराज यादव, कैलाश यादव आदि का कहना था कि जब बीसएनएल नहीं तो लोगों को इनकमिंग तक के लिए अच्छी-खासी रकम अदा करनी पड़ती थी। अगर बीएसएनएल के वित्तीय सेहत पर ध्यान नहीं दिया गया तो फिर से पुरानी स्थिति बनने की नौबत आ सकती है।
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एसडीई शैलेष निगम, धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बीएसएनएल को 4जी स्पेक्ट्रम का आवंटन करने सहित अन्य मांगों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पंकज यादव, राजेश कुमार ने बीएसएनएल की भूमि प्रबंधन नीति को अनुमोदित करने की मांग की। कहा कि बीएसएनएल स्थापना के समय संपत्तियों के स्थानांतरण संबंधी जो भी निर्णय लागू किए गए थे, उसे अतिशीघ्र लागू किया जाए। आशीष कुमार द्विवेदी, शिव सत्यशरण सिंह, महेंद्र शर्मा, सुरेंद्रधर दुबे का कहना था कि बीएसएनएल को बैंक से ऋण लेने के प्रस्ताव के लिए लेटर आफ कंफर्ट की जरूरत है। इसे जल्द जारी किया जाए। बीएसएनएल के मोबाइल सेवा का आटसोर्सिंग के माध्यम से संचालन-रखरखाव के प्रस्ताव को अविलंब निरस्त करने की भी मांग जोर-शोर से उठाई गई। शकील अहमद, रामनारायण, सूर्यभान, राधेश्याम, चंद्रशेखर, छविराज यादव, कैलाश यादव आदि का कहना था कि जब बीसएनएल नहीं तो लोगों को इनकमिंग तक के लिए अच्छी-खासी रकम अदा करनी पड़ती थी। अगर बीएसएनएल के वित्तीय सेहत पर ध्यान नहीं दिया गया तो फिर से पुरानी स्थिति बनने की नौबत आ सकती है।
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