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सड़क निर्माण में वन विभाग का अड़चन
Updated Sun, 25 Feb 2018 11:32 PM IST
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अनपरा । अनपरा के भाट क्षेत्र के खजुरा में स्थित छह किमी लम्बी सड़क के निर्माण में फिर अड़ंगा लगा दिया है । इसके पहले भी दो बार अड़ंगा लगाये जाने से इस क्षेत्र का विकास नहीं हो रहा है । बतादे कि ये सड़क अनपरा को ओबरा से भी जोड़ती है । वन विभाग की इस करतूत से लोगों में आक्रोश है ।
म्योरपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत कुलडोमरी में 42 टोला है। जिसकी जनसंख्या करीब एक लाख है। अनपरा से ओबरा तक फैले इस ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर महज ठगी हुई है। कुलडोमरी की 70 फीसद आबादी पहाड़ों पर आबाद है । यहां के लोगों को पानीए बिजली और सड़क सुविधा है ही नहीं। जिसके कारण विस्थापित आदिवासी का विकास रुका हुआ है। अनपरा से लोझरा होते हुए पक्की सड़क खजुरा तक जाती है। जिसकी लंबाई 16 किलोमीटर है लेकिन 16 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब दो घंटे लगते हैं। अधिकतर सड़कें बन चुकी है जबकि लोझरा से खजुरा के बीच छह किलोमीटर का रास्ता बहुत ही खराब है। जिसमें बड़े.बड़े पत्थर बोल्डर है। वन विभाग द्वारा एनओसी न दिए जाने के कारण अभी तक सड़क का काम अधर में लटका हुआ है।
लोझरा से खजुरा तक छह किमी सड़क का निर्माण न होने से ग्रामीण को एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं मिलती। जिला पंचायत सदस्य बालकेश्वर सिंह ने वर्ष 2015 में एनसीएल सीएसआर के तहत सड़क बनवाने के लिए टेंडर पास कराया था लेकिन वन विभाग की उदासीनता के कारण सड़क नहीं बन सकी। सड़क न बनने से भाट क्षेत्र में आने वाले खजुरा, बिहवा, गुलालीडीह, हरिपुर, बरोहिया, सगनारा, चंदूबहरा व धनबहवा आदि गांव का विकास पूरी तरह से थम गया है। इन गांवों के लोगों को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्था भी नहीं मिलती।
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म्योरपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत कुलडोमरी में 42 टोला है। जिसकी जनसंख्या करीब एक लाख है। अनपरा से ओबरा तक फैले इस ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर महज ठगी हुई है। कुलडोमरी की 70 फीसद आबादी पहाड़ों पर आबाद है । यहां के लोगों को पानीए बिजली और सड़क सुविधा है ही नहीं। जिसके कारण विस्थापित आदिवासी का विकास रुका हुआ है। अनपरा से लोझरा होते हुए पक्की सड़क खजुरा तक जाती है। जिसकी लंबाई 16 किलोमीटर है लेकिन 16 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब दो घंटे लगते हैं। अधिकतर सड़कें बन चुकी है जबकि लोझरा से खजुरा के बीच छह किलोमीटर का रास्ता बहुत ही खराब है। जिसमें बड़े.बड़े पत्थर बोल्डर है। वन विभाग द्वारा एनओसी न दिए जाने के कारण अभी तक सड़क का काम अधर में लटका हुआ है।
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लोझरा से खजुरा तक छह किमी सड़क का निर्माण न होने से ग्रामीण को एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं मिलती। जिला पंचायत सदस्य बालकेश्वर सिंह ने वर्ष 2015 में एनसीएल सीएसआर के तहत सड़क बनवाने के लिए टेंडर पास कराया था लेकिन वन विभाग की उदासीनता के कारण सड़क नहीं बन सकी। सड़क न बनने से भाट क्षेत्र में आने वाले खजुरा, बिहवा, गुलालीडीह, हरिपुर, बरोहिया, सगनारा, चंदूबहरा व धनबहवा आदि गांव का विकास पूरी तरह से थम गया है। इन गांवों के लोगों को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्था भी नहीं मिलती।
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