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Sonebhadra News: सीएचसी-पीएचसी पर डॉक्टरों के 155 पद, तैनात हैं सिर्फ 83

Thu, 14 Mar 2024 11:31 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 14 Mar 2024 11:31 PM IST
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155 posts of doctors at CHC-PHC, only 83 are posted
जिले की बीमार स्वास्थ्य सेवाओं का उपचार करने के लिए विभागीय अधिकारी तैयार नहीं है। विभाग लगातार डॉक्टरों को ढूंढ रहा हैं, मगर नाकाम है। हाल यह है कि जिले में करीब 45 फीसदी चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। जो तैनात भी हैं, उनकी लापरवाही भी कम नहीं। नतीजा आमजन बेहतर दवा-उपचार के लिए परेशान हैं।
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जिला अस्पताल के मेडिकल काॅलेज में परिवर्तित होने के बावजूद 60 फीसदी पद रिक्त हैं। सबसे खराब स्थिति सीएमओ के अधीन 10 सीएचसी और 40 से अधिक पीएचसी की हैं। यहां कुल स्वीकृत 155 चिकित्सकों के सापेक्ष 127 की तैनाती है। इसमें 31 डॉक्टर वर्षों से लापता हैं, जबकि 13 डॉक्टर लंबे समय से पीजी करने गए हैं। इस तरह मौजूदा समय में सिर्फ 83 डॉक्टर ही मौके पर इलाज कर रहेे हैं। नियमित स्त्री रोग विशेषज्ञ के कुल 13 पद के सापेक्ष तीन की ही तैनाती है। बाल रोग विशेषज्ञों की स्थिति पर गौर करें तो सीएचसी-पीएचसी पर 15 बाल रोग विशेषज्ञों के नियमित पद हैं। इसमें 11 की ही तैनाती है। रेडियोलॉजिस्ट के करीब 10 पद रिक्त हैं। बेहोशी के 13 पदों पर सिर्फ चार चिकित्सक तैनात हैं। सर्जन के 11 नियमित पदों में भी सिर्फ दो नियुक्त हैं। इससे सामान्य प्रसव तो अनेक अव्यवस्थाओं के बाद हो जाता है लेकिन सीजर के लिए जिला मुख्यालय जाना ही मजबूरी होती है। कई बार छोटे ऑपरेशन के लिए भी मरीज को रेफर कर दिया जाता है। मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। दूरी की वजह से कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
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23 में 11 आए उनमें से भी आधे ने छोड़ा काम
सरकार की ओर से जिले के दुरूह इलाकों में स्थित सीएचसी और पीएचसी पर चिकित्सकों की तैनाती के उद्देश्य से नवंबर और दिसंबर में 23 चिकित्सकों का चयन किया था। इसमें से महज 11 ने ही कार्यभार ग्रहण किया। इसमें भी एक हड्डी रोग और एक सर्जन सहित कुल पांच ने काम छोड़ दिया। पूर्व में भी साक्षात्कार के जरिए कुछ पदों को भरने का प्रयास किया गया, जो असफल रहा।
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रेफरल हैं सीएचसी-पीएचसी
जिले के अस्पतालों में मानव संसाधनों की भारी कमी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव व्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। इससे मरीजों को उपचार के लिए गैर जनपद का सहारा लेना पड़ता है। पूर्व में कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों के तबादले का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। शाम होने के बाद यहां चिकित्सक और कर्मी कम ही नजर आते हैं।
दिव्यांग बोर्ड पर भी मंडरा रहा संकट
जिले में सीएचसी-पीएचसी पर अब एक भी हड्डी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होंगे। एक मात्र चिकित्सक का स्थानांतरण भी गैर जिले में हो गया है। उनके जल्द कार्यमुक्त होने की उम्मीद है। ऐसे में 200 किमी के दायरे में फैले जिले में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान किस तरह लोगों का उपचार मिल सकेगा, इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रत्येक सोमवार को सीएमओ कार्यालय में आयोजित होने वाले मेडिकल बोर्ड पर अब हड्डी के चिकित्सक न होने से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दिव्यांग प्रमाणपत्र में मेडिकल के लिए वाराणसी या फिर मिर्जापुर जाना होगा।


जिले में चिकित्सकों की कमी है, मगर उपलब्ध संसाधनों से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का पूरा प्रयास रहता है। रिक्त पदों पर तैनाती के लिए समय-समय पर उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया जाता है। जल्द ही कुछ डॉक्टर मिलने की उम्मीद हैं। -डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।
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