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इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल का विरोध शुरू
Updated Sun, 05 Nov 2017 11:46 PM IST
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सोनभद्र (अनपरा )। आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल के दूरगामी परिणामों को देखते हुए संसद के शीतकालीन सत्र में रखने और पारित कराने की जल्दबाजी न करने की मांग की है। इस बिल को पास करने से पहले बिजली इंजीनियरों, कर्मचारियों एवं उपभोक्ताओं के साथ विगत दो दशक से किये जा रहे प्रयोगों पर विस्तृत वार्ता की जाए।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दूबे ने केंद्रीय विद्युत मंत्री आरके सिंह को पत्र भेजा है। कहा कि सुधारों के नाम पर विशेषज्ञों की राय के विपरीत विगत दो दशकों में देश के सभी बिजली बोर्ड का विघटन कर निगमीकरण और निजीकरण किया गया। जिसका दुष्परिणाम यह है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 बनाने के समय बिजली बोर्ड का कुल घाटा 43 हजार करोड़ था वह अब बढ़ कर 4.14 लाख करोड़ और देनदारियां बढ़ कर 4.22 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। पहले शहरों के लिए आरएपीडीआरपी योजना थी और गांव के लिए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना। जिनका नाम बदल कर अब आईपीडीएस और पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना कर दिया गया है जिससे कोई परिवर्तन नहीं होने वाला है। इसी प्रकार बिजली वितरण कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए पिछली सरकार ने वित्तीय पुनसंरचना योजना लागू की थी जो विफल रही। अब सरकार ने उदय योजना लागू की है जो एफ आरपी का ही नया नाम है । अब हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्य योजना की घोषणा की गयी है। उन्होंने कहा कि मात्र नाम बदलने के बजाय ऊर्जा नीति बदलने की जरूरत है। बताया कि जल्दबाजी में बिल पारित कराने की एक तरफा कोशिश के विरोध में बिजली कर्मचारियों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर दिया जाएगा।
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आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दूबे ने केंद्रीय विद्युत मंत्री आरके सिंह को पत्र भेजा है। कहा कि सुधारों के नाम पर विशेषज्ञों की राय के विपरीत विगत दो दशकों में देश के सभी बिजली बोर्ड का विघटन कर निगमीकरण और निजीकरण किया गया। जिसका दुष्परिणाम यह है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 बनाने के समय बिजली बोर्ड का कुल घाटा 43 हजार करोड़ था वह अब बढ़ कर 4.14 लाख करोड़ और देनदारियां बढ़ कर 4.22 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। पहले शहरों के लिए आरएपीडीआरपी योजना थी और गांव के लिए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना। जिनका नाम बदल कर अब आईपीडीएस और पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना कर दिया गया है जिससे कोई परिवर्तन नहीं होने वाला है। इसी प्रकार बिजली वितरण कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए पिछली सरकार ने वित्तीय पुनसंरचना योजना लागू की थी जो विफल रही। अब सरकार ने उदय योजना लागू की है जो एफ आरपी का ही नया नाम है । अब हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्य योजना की घोषणा की गयी है। उन्होंने कहा कि मात्र नाम बदलने के बजाय ऊर्जा नीति बदलने की जरूरत है। बताया कि जल्दबाजी में बिल पारित कराने की एक तरफा कोशिश के विरोध में बिजली कर्मचारियों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर दिया जाएगा।
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