सोनभद्र। जिले के दुरुह-नक्सल क्षेत्र के रहवासियों के लिए खुशखबरी है। जिले के 60 स्वास्थ्य उपकेंद्रों को आरोग्य केंद्र (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) के रूप में तब्दील किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। चयनित उपकेंद्रों पर मरीजों का मलेरिया, टाइफाइड समेत 12 रोगों की जांच कर बेहतर उपचार किया जाएगा। जिले के छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 26 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के 139 पद स्वीकृत हैं, लेकिन उपलब्ध 99 हैं। इनमें से नियमित कार्यरत सिर्फ 78 डॉक्टर हैं। 18 डॉक्टर अनुपस्थित हैं, उतने ही पीजी कोर्स करने के लिए गए और चार डॉक्टर त्यागपत्र दे चुके हैं। जरूरत के अनुसार डॉक्टर समेत अन्य कर्मियों के न होने से रामपुर बरकोनिया, सूअरसोत, माची, कोन, जुगैल, पड़रक्ष, सोढ़ा, रामपुर बरकोनिया, पेढ़, बर्दिया, कजियारी, बलियारी, पोखरिया, सेमिया, घोरिया, रिजुल, बागेसोती, शिल्पी, सांगोबाध समेत अन्य क्षेत्रों के रहवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि शासन ने प्रथम चरण में जिले में संचालित 212 उपकेंद्रों में से 60 उपकेंद्रों को आरोग्य केंद्र (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) रूप में चयनित करने का निर्देश दिया है। सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि प्रथम चरण में नक्सल-दुरूह क्षेत्र के 60 स्वास्थ्य उपकेंद्रों को आरोग्य केंद्र (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) रूप में चयनित करने की प्रक्रिया जारी है। चयनित केंद्रों पर मरीजों के 12 रोगों का जांच कर बेहतर उपचार किया जाएगा। कहा कि स्वास्थ्य कर्मी गंभीर मरीजों को एंबुलेंस से नजदीकी पीएचसी, सीएचसी और जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल भेजेंगे। अभी तक एक भी उपकेंद्र पर स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था नहीं होने से रोगियों को दूर-दराज स्थित राजकीय अस्पतालों या निजी पैथालॉजी सेंटरों पर जांच कराने के लिए पड़ता है।