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पराली जलाने से रोकने के लिए 14 टीमें गठित

Thu, 29 Oct 2020 10:44 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2020 10:44 PM IST
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14 teams formed to prevent stubble burning
सोनभद्र। कलेक्ट्रेट सभागार में बृहस्पतिवार को हुई समन्वय समिति की बैठक में फसल अवशेष (पराली) न जलाने में सहयोग की अपील की र्गई। जिलाधिकारी ने कहा कि पराली न जलाकर पर्यावरण संतुलन बनाया जा सकता है। पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिए 14 टीमें बनाई गई हैं जो निगरानी करेंगी। अगर कोई पराली जलाते पाया गया तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा।
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जिलाधिकारी ने कहा कि कंबाइन से कटाई, मड़ाई के बाद फसल अवशेष जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है। साथ ही मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म होती है। अब पराली जलाने की मानीटरिंग सेटेलाइट सिस्टम से होने लगी है। ऐसे में फसल अपशिष्ट को सुरक्षित जगह पर रखा जाय। यदि दुश्मनी वश किसी अन्य के द्वारा पराली जला दी जायेगी तो भी वास्तविक मालिक के खिलाफ ही प्रथम दृष्टया होगी, बाद में जाकर पुलिस विवेचना में स्थिति स्पष्ट हो पायेगी। उन्होंने पराली जलाने को रोकना बेहद जरूरी है, जिसकी रोकथाम करना पर्यावरण सुरक्षा के लिए अति आवश्यक है। कहा कि किसान सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, टू बी अटैच विद एग्जिस्टिंग कम्बाइन हार्वेस्टर, हैप्पी सीडर, स्ट्रा चापर, मल्चर, रोटेटरी स्लेशर, रिवर्सिबेल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ, रोटावेटर इत्यादि की सहायता से फसल अवशेष को मृदा में मिला दें। फसल अवशेष मृदा में सड़कर जैविक खाद के रूप में प्राप्त होता है, जिससे मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा में वृद्धि होने से फसल उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी।
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कहा कि राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने फसल अवशेषों को जलाने पर अर्थ दंड निर्धारित किया है। जिला स्तर पर एडीएम की अध्यक्षता में एक सेल का गठन किया गया है। यदि किसी कृषक के द्वारा फसल अवशेष को जलाते हुए पाया जायेगा तो दो एकड़ से कम होने पर ढाई हजार, पांच एकड़ से कम होने पर पांच हजार व कृषि भूमि का क्षेत्रफल पांच एकड़ से अधिक होने पर 15 हजार रुपये अर्थदंड वसूली जाएगा। बैठक में अध्यक्ष जिला पंचायत अमरेश सिंह पटेल, सीडीओ डॉ. अमित पाल शर्मा, एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह, डीडी कृषि एके गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय, लालजी तिवारी, हिमांशु सिंह मौजूद रहे।
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