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स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है सोनभद्र-सिंगरौली की आबोहवा

Wed, 06 Mar 2019 12:57 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 06 Mar 2019 12:57 AM IST
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स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है सोनभद्र-सिंगरौली की आबोहवा
सोनभद्र। भारत के तीसरे सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र का दर्जा रखने वाले सिंगरौली रिजन (सोनभद्र के ओबरा, रेणुकूट, म्योरपुर, अनपरा, शक्तिनगर से लेकर सिंगरौली तक की एरिया) की आबोहवा मानव स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। यह खुलासा गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ग्रीन पीस के अध्ययन और उसकी तरफ से मंगलवार को जारी ग्लोबल एयर पॉल्यूशन 2018 की रिपोर्ट में किया गया है। इसके आंकड़े बताते हैं कि 2017 में सोनभद्र-सिंगरौली में वायु प्रदूषण की स्थिति मापने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अधिकृत संयंत्र न होने से आंकड़ा नहीं मिल सका लेकिन 2018 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जारी आंकड़े और सोनभद्र-सिंगरौली की स्थितियों के अध्ययन के बाद जो स्थिति सामने आई है, उससे स्पष्ट है कि सोनभद्र और सिंगरौली की 15 से 20 लाख की आबादी के स्वास्थ्य पर प्रदूषण की तेजी से मार पड़ रही है। वायु गुणवत्ता सूचकांक का सालाना औसत 150-200 होने का जिक्र करते हुए बताया गया कि पीएम 2.5 (2.5 माइक्रान वाले अति सूक्ष्म कण) की मौजूदगी की स्थिति यहां काफी खराब है। इसका सीधा असर व्यक्ति के फेफड़े पर पड़ रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इससे जहां फेफड़ों के श्वसन की क्षमता कम हो रही है। वहीं लंग कैंसर जैसी बीमारियां लोगों को चपेट में ले रही है। एलर्जी की भी बीमारी बढ़ रही है। रिपोर्ट में एशिया के प्रमुख देश भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के 30 शहरों की रैकिंग क्रमवार तय की गई है, जिसमें भारत के 21 शहरों-स्थानों को शामिल किया गया है। वायु प्रदूषण की रैकिंग में भारत के दिल्ली, गुड़गांव, गाजियाबाद, लखनऊ सहित अन्य शहरों के साथ सिंगरौली रिजन को 16वें स्थान पर जगह दी गई है। वहीं एशिया में 21वें स्थान पर रखा गया है।
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वर्जन
यह तो सिर्फ वायु प्रदूषण का आंकड़ा है। सिंगरौली रिजन में जल प्रदूषण और मृदा प्रदूषण की स्थिति भी साल दर साल गंभीर होती जा रही है। इसको लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात और खराब हो सकते हैं। - सीमा जावेद, पर्यावरण विशेषज्ञ, लखनऊ
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सोनभद्र के हालात एक-दो साल में नहीं, वर्षों पूर्व से खराब है। इसको लेकर कई रिपोर्ट सार्वजनिक हुई। केंद्र और प्रदेश सरकार को कई बार रिपोर्टों को जरिए आगाह भी किया गया लेकिन सोनभद्र में प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर काफी हद तक कागजी घोड़े ही दौड़ाए जा रहे हैं। - डॉ. अनिल गौतम, पर्यावरण वैज्ञानिक, देहरादून
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सोनभद्र में प्रदूषण विकलांगता के साथ ही कैंसर, किडनी सहित कई गंभीर बीमारियां बांट रहा हैं। इसको लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। एनजीटी से भी निर्देश मिले हैं। बावजूद न तो हवा स्वच्छ हो पा रहा है, न ही प्रभावितों की बड़ी एरिया में शुद्ध पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था ही हो पाई है। - रामेश्वर भाई, संयोजक सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी
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