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वतन के वास्ते गर्दन अपनी जो कटाते हैं...........
Updated Wed, 24 Jan 2018 11:36 PM IST
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राबर्ट्सगंज कचहरी स्थित एसबीए सभागार में नेता जी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर मंगलवार की रात्रि अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाओं को सुनाया। कवि प्रद्युम्र त्रिपाठी ने वतन के वास्ते गर्दन अपनी जो कटाते हैं, तिरंगे के हिफाजत में लहू अपना बहाते हैं सुनाकर सराहना बटोरी।
मुख्य अतिथि जिला जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस तथा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। वाराणसी से आई कवयित्री पूनम श्रीवास्तव ने मां तेरी छवि सुखद भवानी, महिमा गाते ऋषि मुनि ज्ञानी वंदना सुनाया। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर ने बाजारों को बस्ती और वीरानों से क्या मतलब, लगे कि नारे की कश्ती को तूफानों से क्या मतलब सुनाया, जिसे खूब सराहा गया। प्रतापगढ़ से आए डॉ. रणजीत सिंह ने माली ही बाग को तबाही दे रहे, ऐ प्रेम के पत्ते पे खूनी स्याही दे रहे, कमलेश राजहंस ने दुश्मन की गोली खाने को जो सरहद पर खड़ा हुआ है, वो किसान का बेटा है जो आंसू पीकर बड़ा हुआ है, रामनरेश पाल ने कोमल हूं फूल से मगर पाहन से सख्त हूं, अंत:करण से मैं यहां भारत का भक्त हूं सुनाकर तालियां बटोरी। गाजीपुर से पधारे शमीम गाजीपुरी ने तारीफ न कीजिए किसी की न सही, लेकिन किसी के ऐब का चर्चा न कीजिए, चंदौली से आए शिवदास, जैराम सोनी, विजय विनीत, सुनील कुमार एवं दिलीप सिंह, कवयित्री अर्चना शुक्ला, अब्दुल हई, नजर मोहम्मद नजर, इसरार अहमद, राकेश शरण मिश्र, अशोक श्रीवास्तव, विकास वर्मा, ओबरा आकाशवाणी के जीपी निराला, उमेश चंद्र द्विवेदी, अब्दुल हबीब, सुशील राही, धर्मेश चौहान आदि ने भी काव्य पाठ किया। संचालन अशोक तिवारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन एसबीए अध्यक्ष ओम प्रकाश पाठक ने किया। इस मौके पर प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय यशवंत कुमार मिश्र, नायब तहसीलदार अभिषेक राय, पूर्व नपा चेयरमैन कृष्णमुरारी गुप्ता, विनोद चौबे, आत्म प्रकाश त्रिपाठी, अमरेश त्रिपाठी, लालता प्रसाद पांडेय, अजीत शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि जिला जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस तथा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। वाराणसी से आई कवयित्री पूनम श्रीवास्तव ने मां तेरी छवि सुखद भवानी, महिमा गाते ऋषि मुनि ज्ञानी वंदना सुनाया। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर ने बाजारों को बस्ती और वीरानों से क्या मतलब, लगे कि नारे की कश्ती को तूफानों से क्या मतलब सुनाया, जिसे खूब सराहा गया। प्रतापगढ़ से आए डॉ. रणजीत सिंह ने माली ही बाग को तबाही दे रहे, ऐ प्रेम के पत्ते पे खूनी स्याही दे रहे, कमलेश राजहंस ने दुश्मन की गोली खाने को जो सरहद पर खड़ा हुआ है, वो किसान का बेटा है जो आंसू पीकर बड़ा हुआ है, रामनरेश पाल ने कोमल हूं फूल से मगर पाहन से सख्त हूं, अंत:करण से मैं यहां भारत का भक्त हूं सुनाकर तालियां बटोरी। गाजीपुर से पधारे शमीम गाजीपुरी ने तारीफ न कीजिए किसी की न सही, लेकिन किसी के ऐब का चर्चा न कीजिए, चंदौली से आए शिवदास, जैराम सोनी, विजय विनीत, सुनील कुमार एवं दिलीप सिंह, कवयित्री अर्चना शुक्ला, अब्दुल हई, नजर मोहम्मद नजर, इसरार अहमद, राकेश शरण मिश्र, अशोक श्रीवास्तव, विकास वर्मा, ओबरा आकाशवाणी के जीपी निराला, उमेश चंद्र द्विवेदी, अब्दुल हबीब, सुशील राही, धर्मेश चौहान आदि ने भी काव्य पाठ किया। संचालन अशोक तिवारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन एसबीए अध्यक्ष ओम प्रकाश पाठक ने किया। इस मौके पर प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय यशवंत कुमार मिश्र, नायब तहसीलदार अभिषेक राय, पूर्व नपा चेयरमैन कृष्णमुरारी गुप्ता, विनोद चौबे, आत्म प्रकाश त्रिपाठी, अमरेश त्रिपाठी, लालता प्रसाद पांडेय, अजीत शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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