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कुपोषित किशोरियों की होगी एनीमिया की जांच
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सोनभद्र। जिले में किशोरियों को स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूक किया जाएगा। उनमें एनीमिया की स्थिति जांची जाएगी और एनीमिया पीड़ित किशोरियों का उपचार स्वास्थ्य विभाग से मिल कर कराया जाएगा। इसके अलावा कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों का चिह्नांकन कर उनका टीकाकरण होगा। इसको लेकर आठ से 22 मार्च तक पोषण पखवारा भी चलेगा, जिसमें शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का वजन होगा और लंबाई नापी जाएगी।
देश के अति पिछड़े जिलों में शामिल सोनभद्र में गरीबी ज्यादा है। इसलिए यहां के आदिवासी और दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है। इस नाते बच्चे गौर किशोरियां कुपोषित हो जाती हैं। यहां कुपोषण की एक मुख्य वजह प्रदूषित पानी भी है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की एक रिपोर्ट पर गौर करें तो जिले में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों की संख्या दो लाख 18 हजार 810 है। इसमें से 12156 बच्चे अति कुपोषित हैं, जबकि 51 हजार 317 बच्चे कुपोषित हैं। इसी तरह हजारों किशोरियों भी कुपोषित हैं। तमाम किशोरियां ऐसी भी हैं जो एनीमिया से पीड़ित हैं। लेकिन उनकी समय से जांच न होने के नाते उनके एनीमिक होने का पता नहीं चल पाता। अब बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने अभियान चलाकर किशोरियों में एनीमिया की जांच कराने, पीड़ितों की स्वास्थ्य विभाग से मिलकर उपचार कराने और बच्चों का टीकाकरण कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत विभाग ने तैयारी पूर्ण कर ली है। इस कार्य के लिए विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ ही स्वास्थ्य विभाग में तैनात एएनएम और आशाओं की मदद लेने का निर्णय लिया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि आठ से 22 मार्च तक पोषण पखवारा मनाया जाएगा। इसके तहत शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण कराया जाएगा। किशोरियों में एनीमिया की जांच कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर उनका उपचार कराया जाएगा। इसको लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है।
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देश के अति पिछड़े जिलों में शामिल सोनभद्र में गरीबी ज्यादा है। इसलिए यहां के आदिवासी और दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है। इस नाते बच्चे गौर किशोरियां कुपोषित हो जाती हैं। यहां कुपोषण की एक मुख्य वजह प्रदूषित पानी भी है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की एक रिपोर्ट पर गौर करें तो जिले में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों की संख्या दो लाख 18 हजार 810 है। इसमें से 12156 बच्चे अति कुपोषित हैं, जबकि 51 हजार 317 बच्चे कुपोषित हैं। इसी तरह हजारों किशोरियों भी कुपोषित हैं। तमाम किशोरियां ऐसी भी हैं जो एनीमिया से पीड़ित हैं। लेकिन उनकी समय से जांच न होने के नाते उनके एनीमिक होने का पता नहीं चल पाता। अब बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने अभियान चलाकर किशोरियों में एनीमिया की जांच कराने, पीड़ितों की स्वास्थ्य विभाग से मिलकर उपचार कराने और बच्चों का टीकाकरण कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत विभाग ने तैयारी पूर्ण कर ली है। इस कार्य के लिए विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ ही स्वास्थ्य विभाग में तैनात एएनएम और आशाओं की मदद लेने का निर्णय लिया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि आठ से 22 मार्च तक पोषण पखवारा मनाया जाएगा। इसके तहत शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण कराया जाएगा। किशोरियों में एनीमिया की जांच कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर उनका उपचार कराया जाएगा। इसको लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है।
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