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डग्गामार वाहनों की कमान अक्षम चालकों के हाथ
Updated Mon, 30 Apr 2018 12:08 AM IST
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सोनभद्र। जिले में डग्गामार वाहनों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। इन वाहनों की कमान अक्षम चालकों के हाथों में है, जिससे वे हादसों का सबब बन रहे हैं लेकिन विभाग इसके प्रति पूरी तरह लापरवाह बना है। प्राइवेट बसों समेत इन डग्गामार वाहनों से परिवहन विभाग को प्रति माह लाखों रुपये राजस्व की क्षति उठानी पड़ रही।
डग्गामार वाहन यात्रियों की जान के दुश्मन बन गए हैं। इसके बावजूद इस पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। जिले का कोई ऐसा मार्ग नहीं होगा, जिस पर ये वाहन फर्राटे न भरते हों। रोडवेज के सामने दिनभर सवारियां भरते देखे जा सकते हैं। रोडवेज के अधिकारियों की मानें तो डग्गामार वाहनों के कारण रोज परिवहन निगम को चार से पांच लाख रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है। ओवरलोड सवारी होने के कारण कई बार वाहन दुर्घटनाग्रस्त भी हो चुके है। जिले में स्थित परिवहन निगम के बस अड्डों के आसपास से हर दिन 64 से अधिक अवैध बसें सुबह से देर शाम तक सवारियां भरती हैं। डीएम, एडीएम, एसडीएम सहित कलेक्ट्रेट के अन्य अधिकारी रोज मुख्य मार्ग से गुजरते हैं लेकिन किसी भी अफसरों को ये वाहन नजर नहीं आते हैं। डग्गामार वाहनों से सड़क हादसों की संख्या बढने के बावजूद मौत बनकर दौडने वाले इन अनफिट वाहनों की जांच तक की जहमत नहीं उठाई जाती।
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डग्गामार वाहन यात्रियों की जान के दुश्मन बन गए हैं। इसके बावजूद इस पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। जिले का कोई ऐसा मार्ग नहीं होगा, जिस पर ये वाहन फर्राटे न भरते हों। रोडवेज के सामने दिनभर सवारियां भरते देखे जा सकते हैं। रोडवेज के अधिकारियों की मानें तो डग्गामार वाहनों के कारण रोज परिवहन निगम को चार से पांच लाख रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है। ओवरलोड सवारी होने के कारण कई बार वाहन दुर्घटनाग्रस्त भी हो चुके है। जिले में स्थित परिवहन निगम के बस अड्डों के आसपास से हर दिन 64 से अधिक अवैध बसें सुबह से देर शाम तक सवारियां भरती हैं। डीएम, एडीएम, एसडीएम सहित कलेक्ट्रेट के अन्य अधिकारी रोज मुख्य मार्ग से गुजरते हैं लेकिन किसी भी अफसरों को ये वाहन नजर नहीं आते हैं। डग्गामार वाहनों से सड़क हादसों की संख्या बढने के बावजूद मौत बनकर दौडने वाले इन अनफिट वाहनों की जांच तक की जहमत नहीं उठाई जाती।
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