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खुले में शौच जा रहे 945 परिषदीय स्कूलों के बच्चे

Wed, 21 Mar 2018 10:35 PM IST
Updated Wed, 21 Mar 2018 10:35 PM IST
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खुले में शौच जा रहे 945 परिषदीय स्कूलों के बच्चे
केंद्र सरकार का स्वच्छ भारत मिशन सरकारी स्कूलों की दहलीज तक नहीं पहुंच पा रहा है। जनपद के 945 परिषदीय विद्यालयों में पढने वाले एक लाख से अधिक बच्चे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। ऐसा नहीं कि इन विद्यालयों में शौचालय नहीं हैं। शौचालय तो हैं, लेकिन प्रयोग करने के लायक नहीं हैं। अधिकांश शौचालय में पानी की व्यवस्था तक नहीं है।
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जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चल रहा है। प्रत्येक गांव में निगरानी समिति टीम गठित की गई है। स्कूलों में शिक्षक बच्चों को खुले में शौच न करने के लिए जागरूक कर रहे हैं मगर जिले की हकीकत कुछ और ही है। जिले के 1804 प्राथमिक एवं 654 उच्च प्राथमिक स्कूलों में से 945 स्कूलों के शौचालयों में पानी की व्यवस्था ही नहीं है। राबट्र्सगंज में स्थित सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय परिसर में स्थित प्राथमिक विद्यालय प्रथम में शौचालय तो है मगर पानी का इंतजाम नहीं है। अभी तक टंकी नहीं लगाई है। शौचालय के आसपास गंदगी का अंबार लगा है। प्राथमिक विद्यालय लोढ़ी समेत अन्य स्कूलों में भी बने शौचालय शोपीस साबित हो रहे हैं। यहीं हाल चतरा और नगवां ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय गुल्लीडाड़, किरहुलिया, करध, बभनवल, भुसौलिया, नेवारी, करवनिया, सोढ़ा, धर्मदासपुर, भीखमपुर, पटना, सिलथम, करौधिया, बंजरिया, पिथैरी, संडी, संडा, शिवपुर, जयमोहरा, ढोडरी, पुरना कला, केतार, चितबिसराव, चरकोनवा, पकरहट समेत करीब पौने दो सौ विद्यालय का हैं। उधर कोन, घोरावल, बभनी, चोपन, म्योपुर, दुद्धी ब्लॉक क्षेत्र के सैकड़ों प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शौचालयों में पानी की व्यवस्था न होने के कारण जरूरत पडने पर बच्चे खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं। वहीं बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने कहते हैं कि जिन स्कूलों के शौचालयों में पानी की समस्या है वहां पर हैंडपंप लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार कराया गया है। पिछले माह जल निगम को कुछ स्कूलों में हैंडपंप लगाने के लिए धन भी मुहैया कराया जा चुका है।
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