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आरओ प्लांट बंद होने से गंदे पानी से बुझा रहे प्यास
Updated Mon, 17 Jul 2017 10:42 PM IST
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सोनभद्र (बीना)। राष्ट्रीय हरित न्याय प्राधिकरण (एनजीटी) भले ही पर्यावरण संरक्षण के साथ ही लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने की पहल कर रहा हो लेकिन जिले में तमाम परियोजनाओं के प्रबंधन उसके ही आदेश को ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला एनसीएल बीना परियोजना से लगे वे नौ गांवों का है जहां कई दिनों से आरओ प्लांट ठप है। इसके चलते ग्रामीण प्रदूषित जल पीने को मजबूर हैं।
एनजीटी के निर्देश पर एनसीएल बीना परियोजना की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में आरओ प्लांट लगाए गए हैं। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी परियोजना प्रबंधन की है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के नौ आरओ प्लांट एक जून से बंद है जिसके चलते ग्रामीणों को पेयजल नहीं मिल रहा है। इसकी वजह से ग्रामीण नदी, नाले, कुओं व चुआड़ का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं जिसके चलते वे संक्रामक बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। पेयजल के लिए ग्रामीणों को भटकना पड़ रहा है। घरसड़ी के ग्राम प्रधान सत्यप्रकाश भारती ने बताया कि बरवानी, चंदुआर, घरसड़ी, कोहरौलिया, कोहरौल व पहाड़ी बस्ती समेत नौ गांवों में लगे आरओ प्लांट बंद होने से करीब सात हजार आबादी दूषित जल पीने के लिए विवश है। जबकि एनजीटी ने एनसीएल प्रशासन को पेयजल मुहैया कराने का निर्देश दिया था। एनसीएल प्रबंधन को आरओ प्लांट दुरुस्त कराने के लिए पत्र भी दिया गया था लेकिन कोई पहल नहीं हुई। बीना परियोजना, स्टाफ अधिकारी योगेश सिंह ने बताया कि नौ गांवों में लगे आरओ प्लांट में कोई खराबी नहीं है बल्कि टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से आरओ प्लांट बंद है। टेंडर प्रक्रिया पूरी कर जल्द कर आरओ प्लांट चालू कर दिए जाएंगे। -
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एनजीटी के निर्देश पर एनसीएल बीना परियोजना की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में आरओ प्लांट लगाए गए हैं। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी परियोजना प्रबंधन की है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के नौ आरओ प्लांट एक जून से बंद है जिसके चलते ग्रामीणों को पेयजल नहीं मिल रहा है। इसकी वजह से ग्रामीण नदी, नाले, कुओं व चुआड़ का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं जिसके चलते वे संक्रामक बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। पेयजल के लिए ग्रामीणों को भटकना पड़ रहा है। घरसड़ी के ग्राम प्रधान सत्यप्रकाश भारती ने बताया कि बरवानी, चंदुआर, घरसड़ी, कोहरौलिया, कोहरौल व पहाड़ी बस्ती समेत नौ गांवों में लगे आरओ प्लांट बंद होने से करीब सात हजार आबादी दूषित जल पीने के लिए विवश है। जबकि एनजीटी ने एनसीएल प्रशासन को पेयजल मुहैया कराने का निर्देश दिया था। एनसीएल प्रबंधन को आरओ प्लांट दुरुस्त कराने के लिए पत्र भी दिया गया था लेकिन कोई पहल नहीं हुई। बीना परियोजना, स्टाफ अधिकारी योगेश सिंह ने बताया कि नौ गांवों में लगे आरओ प्लांट में कोई खराबी नहीं है बल्कि टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से आरओ प्लांट बंद है। टेंडर प्रक्रिया पूरी कर जल्द कर आरओ प्लांट चालू कर दिए जाएंगे। -
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