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कृषि के लाजवाब चित्रकार थे मुंशी प्रेमचंद्र
Updated Tue, 31 Jul 2018 11:36 PM IST
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सोनभद्र। उपान्यासकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती मंगलवार को संत कीनाराम सीनियर सेकेंड्री पब्लिक स्कूल में मनाई गई। इसमें उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने प्रेमचंद्र को भारतीय किसान और ग्रामीण जीवन का लाजवाब चित्रकार बताया।
यहां संत कीनाराम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गोपाल सिंह ने कहा कि गोदान एक उपन्यास ही नहीं, बल्कि भारतीय कृषि और किसान का बेजोड़ महाकाव्य है। मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन का संपूर्ण खट्टा-मीठा अनुभव लेकर गोदान की रचना की। गोदान में हमें हिंदुस्तान की वास्तविक झांकी देखने को मिलती है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद्र को पढ़ने के लिए आवश्यक नहीं कि हम उनकी संपूर्ण रचनाओं को पढ़े। अपितु गोदान ही पर्याप्त है। उसकी विषय-वस्तु, पात्र, देश काल, वातावरण, परिस्थितियां सब भारतीय ढर्रे पर ही मिलती है। गोष्ठी में रामप्रवेश मौर्या, विनय मिश्रा, मनोज श्रीवास्तव, विरेंद्रनाथ त्रिपाठी, सूरज गुप्ता, प्रकाश श्रीवास्तव, छविंद्रनाथ त्रिपाठी, शांति प्रसाद, प्रियम सिंह, कमलेश गुप्ता मौजूद रहे। उधर, विंध्य कन्या पीजी कालेज राबर्ट्सगंज में भी जयंती पर मुंशी प्रेमचंद्र याद किए गए। यहां शिक्षकों ने उनके चित्र पर मार्ल्यापण कर उन्हें श्रद्घांजलि दी। मुख्य अतिथि वक्ता असिस्टेंट प्रोफेसर मीरा सिंह ने छात्र-छात्राओं को सिविल परीक्षा की तैयारी के गुण सिखाए। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्य डॉ. अंजली विक्रम सिंह ने छात्राओं को जीवन में सफलता का मंत्र दिया। प्रवक्ता अरुणेंद्र संदल और डॉ. मालती शुक्ला ने कहा कि सभी को प्रेमचंद के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। यहां डॉ. अजय सिंह, डॉ. कैलाश नाथ, डॉ. अश्वनी, पंकज द्विवेदी मौजूद रहे।
बीजपुर।/शक्तिनगर। रिहंद सुपर थर्मल पावर स्टेशन के राजभाषा अनुभाग के तत्वावधान में मंगलवार को प्रशासनिक भवन स्थित सृजन सम्मेलन कक्ष में उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती धूमधाम से मनाई गई । मुख्य अतिथि वरिष्ठ प्रबंधक रविंद्र कुमार ने प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रेमचंद की कृतियों में निहित पारिवारिक एवं सामाजिक संवेदनाओं पर प्रकाश डाला। प्रेमचंद की राष्ट्रचेतना पर संतोष कुमार विश्वकर्मा, अशोक कुमार विश्वकर्मा एवं नंदलाल ने विचार व्यक्त किए। रिहंद साहित्य मंच के मुकेश कुमार, रामजी द्विवेदी, आरडी दूबे, डीएस त्रिपाठी, अरुण श्रीवास्तव एवं लक्ष्मी नारायन ने रचनाएं प्रस्तुत की। संचालन और आगंतुकों का स्वागत सहायक प्रबंधक जन संपर्क एवं राजभाषा मिथिलेश श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने प्रेमचंद की सामाजिक चेतना एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस मौके पर एसके रावत, नसीम अहमद, जाली स्कारिया, केआर विश्वकर्मा, एसएन तिवारी, रुद्र देव दूबे, संतराम, रामानंद यादव, रामआशीष गुप्ता, सुरेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
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उधर, एनटीपीसी सिंगरौली सुपर थर्मल पावर स्टेशन आवासीय परिसर में संचालित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विस्तार परिसर में मंगलवार को मुंशी प्रेमचंद जयंती मनाई गई। विद्यापीठ की छात्रा प्रीति, काजल, रूपा, अंजलि गुप्ता, रोशनी खातुन, अंजली शर्मा, गुड़िया, सोनी, नेहा, सुमित्रा शुक्ला, पूजा श्रीवास्तव और छात्र विकास पांडेय, एमडी अकबर, छोटू और मणिकांत आदि ने विचार रखें। संचालक कर रहे डा. मानिक पांडेय ने प्रेमचंद के संबंध में विस्तार से बताया। इसके अलावा डा. प्रदीप, वीरेन्द्र चौरसिया, डा. छोटेलाल, डा. आनंद श्रीवास्तव ने प्रेमचंद के साहित्यिक अवदानों पर चर्चा की। मुख्य वक्ता शिवकरण दूबे वेदराही ने प्रेमचंद को राष्ट्रीय पुनर्जागरण का अद्वितीय प्रवक्ता बताते हुए उन्हें हिंदी का महान साहित्यकार बताया। डा. योगेंद्र मिश्रा, आदेश पांडेय ने भी विचार रखे। इस मौके पर डा. अपर्णा त्रिपाठी, डा. निशा सिंह, डा. रागिनी श्रीवास्तव एवं नवीनचंद्र श्रीवास्तव मौजूद रहे। अध्यक्षता डा. अनिल दूबे ने की।
यहां संत कीनाराम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गोपाल सिंह ने कहा कि गोदान एक उपन्यास ही नहीं, बल्कि भारतीय कृषि और किसान का बेजोड़ महाकाव्य है। मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन का संपूर्ण खट्टा-मीठा अनुभव लेकर गोदान की रचना की। गोदान में हमें हिंदुस्तान की वास्तविक झांकी देखने को मिलती है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद्र को पढ़ने के लिए आवश्यक नहीं कि हम उनकी संपूर्ण रचनाओं को पढ़े। अपितु गोदान ही पर्याप्त है। उसकी विषय-वस्तु, पात्र, देश काल, वातावरण, परिस्थितियां सब भारतीय ढर्रे पर ही मिलती है। गोष्ठी में रामप्रवेश मौर्या, विनय मिश्रा, मनोज श्रीवास्तव, विरेंद्रनाथ त्रिपाठी, सूरज गुप्ता, प्रकाश श्रीवास्तव, छविंद्रनाथ त्रिपाठी, शांति प्रसाद, प्रियम सिंह, कमलेश गुप्ता मौजूद रहे। उधर, विंध्य कन्या पीजी कालेज राबर्ट्सगंज में भी जयंती पर मुंशी प्रेमचंद्र याद किए गए। यहां शिक्षकों ने उनके चित्र पर मार्ल्यापण कर उन्हें श्रद्घांजलि दी। मुख्य अतिथि वक्ता असिस्टेंट प्रोफेसर मीरा सिंह ने छात्र-छात्राओं को सिविल परीक्षा की तैयारी के गुण सिखाए। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्य डॉ. अंजली विक्रम सिंह ने छात्राओं को जीवन में सफलता का मंत्र दिया। प्रवक्ता अरुणेंद्र संदल और डॉ. मालती शुक्ला ने कहा कि सभी को प्रेमचंद के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। यहां डॉ. अजय सिंह, डॉ. कैलाश नाथ, डॉ. अश्वनी, पंकज द्विवेदी मौजूद रहे।
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बीजपुर।/शक्तिनगर। रिहंद सुपर थर्मल पावर स्टेशन के राजभाषा अनुभाग के तत्वावधान में मंगलवार को प्रशासनिक भवन स्थित सृजन सम्मेलन कक्ष में उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती धूमधाम से मनाई गई । मुख्य अतिथि वरिष्ठ प्रबंधक रविंद्र कुमार ने प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रेमचंद की कृतियों में निहित पारिवारिक एवं सामाजिक संवेदनाओं पर प्रकाश डाला। प्रेमचंद की राष्ट्रचेतना पर संतोष कुमार विश्वकर्मा, अशोक कुमार विश्वकर्मा एवं नंदलाल ने विचार व्यक्त किए। रिहंद साहित्य मंच के मुकेश कुमार, रामजी द्विवेदी, आरडी दूबे, डीएस त्रिपाठी, अरुण श्रीवास्तव एवं लक्ष्मी नारायन ने रचनाएं प्रस्तुत की। संचालन और आगंतुकों का स्वागत सहायक प्रबंधक जन संपर्क एवं राजभाषा मिथिलेश श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने प्रेमचंद की सामाजिक चेतना एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस मौके पर एसके रावत, नसीम अहमद, जाली स्कारिया, केआर विश्वकर्मा, एसएन तिवारी, रुद्र देव दूबे, संतराम, रामानंद यादव, रामआशीष गुप्ता, सुरेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
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उधर, एनटीपीसी सिंगरौली सुपर थर्मल पावर स्टेशन आवासीय परिसर में संचालित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विस्तार परिसर में मंगलवार को मुंशी प्रेमचंद जयंती मनाई गई। विद्यापीठ की छात्रा प्रीति, काजल, रूपा, अंजलि गुप्ता, रोशनी खातुन, अंजली शर्मा, गुड़िया, सोनी, नेहा, सुमित्रा शुक्ला, पूजा श्रीवास्तव और छात्र विकास पांडेय, एमडी अकबर, छोटू और मणिकांत आदि ने विचार रखें। संचालक कर रहे डा. मानिक पांडेय ने प्रेमचंद के संबंध में विस्तार से बताया। इसके अलावा डा. प्रदीप, वीरेन्द्र चौरसिया, डा. छोटेलाल, डा. आनंद श्रीवास्तव ने प्रेमचंद के साहित्यिक अवदानों पर चर्चा की। मुख्य वक्ता शिवकरण दूबे वेदराही ने प्रेमचंद को राष्ट्रीय पुनर्जागरण का अद्वितीय प्रवक्ता बताते हुए उन्हें हिंदी का महान साहित्यकार बताया। डा. योगेंद्र मिश्रा, आदेश पांडेय ने भी विचार रखे। इस मौके पर डा. अपर्णा त्रिपाठी, डा. निशा सिंह, डा. रागिनी श्रीवास्तव एवं नवीनचंद्र श्रीवास्तव मौजूद रहे। अध्यक्षता डा. अनिल दूबे ने की।