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68 स्कूल बसों की जांच में दो फिटनेस में फेल
Updated Mon, 09 Apr 2018 12:12 AM IST
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नया शिक्षण सत्र शुरू होने के आठवें दिन रविवार को परिवहन विभाग ने स्कूल बसों की जांच की। राबर्ट्सगंज के पालीटेक्निक परिसर में चलाए गए अभियान में 10 स्कूलों के 68 बसों की जांच हुई। इसमें एक स्कूल की दो बसें फिटनेस में फेल हो गई। उन्हें सड़क से हटा लेने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा सात बसों में सुधार की हिदायत स्कूल प्रबंधकों को दी गई है।
सहायक उप संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) एसपी सिंह व अवधेश कुमार के नेतृत्व में रविवार को 10 स्कूलों की 68 बसों की जांच की गई। जांच में डीएवी पब्लिक स्कूल राबर्ट्सगंज की दो बसें फिटनेस में फेल हो गई। दोनों बसों को सड़क से हटा लेने का निर्देश स्कूल प्रशासन को दिया गया है। इसके अलावा सात बसों में सुधार को कहा गया है। एआरटीओ अवधेश कुमार ने बताया कि 15 अप्रैल तक बसों की जांच न कराने वाले स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी। इस संबंध में सभी स्कूल प्रबंधकों को पत्र पहले ही भेज दिया गया है। बता दें कि जिले में संचालित प्राइवेट स्कूलों में चलने वाली बसों को मानक के विपरीत चलाने की शिकायत एआरटीओ को मिल रही थी। इनकी रफ्तार पर भी सवाल उठते रहे हैं। शिक्षण सत्र प्रारंभ होने के बाद ड्राईवरों व बसों की जांच की जाती है। इसमें जरूरी सुविधा और सुरक्षा उपकरणों की जांच की जाती है।
इनसेट
स्कूल बस के लिए नियम
निजी स्कूल वाहनों के लिए दर्जनों की संख्या में नियम बनाए गए हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन भी है। इनमें प्रमुख रूप से वाहन पीला कलर, आगे पीछे नंबर, इंडिकेटर, हेडलाइट, वाइपर की स्थिति ठीक होना, ड्राइवर का लाइसेंस और वर्दी में होना अनिवार्य है। गाड़ी फिटनेस, परमिट व बीमा रहना जरूरी है। फस्ट एड बाक्स, खिड़की में जाली जरूरी है। जितने सीटर की बसें है उतने ही बच्चे बैठाएं। कोई भी बच्चा खड़ा न हो।
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इनसेट
40 से अधिक न हो रफ्तार
स्कूलों में चलने वाली बसों की रफ्तार 40 किमी प्रतिघंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालत यह है कि शहर के भीतर तो वाहनों की रफ्तार ठीक-ठाक रहती है, लेकिन शहर से बाहर निकलते ही इनकी रफ्तार 60 से अधिक पहुंच जाती है।
इनसेट
बसों में नहीं लगे सीसीटीवी कैमरे
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बसों के आगे व पीछे सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे बसों के भीतर की सारी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है, लेकिन आदेश के बावजूद जिले के स्कूल वाहनों में सीसीटीवी नहीं लगाए जा सके हैं।
इनसेट
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार बसों में स्पीड गवर्नर आवश्यक है, ताकि वाहनों की रफ्तार कंट्रोल में रहे। लेकिन जिले के अधिकतर स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर लगे ही नहीं है। केवल औपचारिक हिदायत लिख दी गई है कि वाहन 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। इसके अलावा बस में अग्निशमन यंत्र रखना आवश्यक है। इमरजेंसी डोर, फिटनेस और परमिट होना अनिवार्य है।
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सहायक उप संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) एसपी सिंह व अवधेश कुमार के नेतृत्व में रविवार को 10 स्कूलों की 68 बसों की जांच की गई। जांच में डीएवी पब्लिक स्कूल राबर्ट्सगंज की दो बसें फिटनेस में फेल हो गई। दोनों बसों को सड़क से हटा लेने का निर्देश स्कूल प्रशासन को दिया गया है। इसके अलावा सात बसों में सुधार को कहा गया है। एआरटीओ अवधेश कुमार ने बताया कि 15 अप्रैल तक बसों की जांच न कराने वाले स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी। इस संबंध में सभी स्कूल प्रबंधकों को पत्र पहले ही भेज दिया गया है। बता दें कि जिले में संचालित प्राइवेट स्कूलों में चलने वाली बसों को मानक के विपरीत चलाने की शिकायत एआरटीओ को मिल रही थी। इनकी रफ्तार पर भी सवाल उठते रहे हैं। शिक्षण सत्र प्रारंभ होने के बाद ड्राईवरों व बसों की जांच की जाती है। इसमें जरूरी सुविधा और सुरक्षा उपकरणों की जांच की जाती है।
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स्कूल बस के लिए नियम
निजी स्कूल वाहनों के लिए दर्जनों की संख्या में नियम बनाए गए हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन भी है। इनमें प्रमुख रूप से वाहन पीला कलर, आगे पीछे नंबर, इंडिकेटर, हेडलाइट, वाइपर की स्थिति ठीक होना, ड्राइवर का लाइसेंस और वर्दी में होना अनिवार्य है। गाड़ी फिटनेस, परमिट व बीमा रहना जरूरी है। फस्ट एड बाक्स, खिड़की में जाली जरूरी है। जितने सीटर की बसें है उतने ही बच्चे बैठाएं। कोई भी बच्चा खड़ा न हो।
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40 से अधिक न हो रफ्तार
स्कूलों में चलने वाली बसों की रफ्तार 40 किमी प्रतिघंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालत यह है कि शहर के भीतर तो वाहनों की रफ्तार ठीक-ठाक रहती है, लेकिन शहर से बाहर निकलते ही इनकी रफ्तार 60 से अधिक पहुंच जाती है।
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बसों में नहीं लगे सीसीटीवी कैमरे
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बसों के आगे व पीछे सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे बसों के भीतर की सारी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है, लेकिन आदेश के बावजूद जिले के स्कूल वाहनों में सीसीटीवी नहीं लगाए जा सके हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार बसों में स्पीड गवर्नर आवश्यक है, ताकि वाहनों की रफ्तार कंट्रोल में रहे। लेकिन जिले के अधिकतर स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर लगे ही नहीं है। केवल औपचारिक हिदायत लिख दी गई है कि वाहन 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। इसके अलावा बस में अग्निशमन यंत्र रखना आवश्यक है। इमरजेंसी डोर, फिटनेस और परमिट होना अनिवार्य है।