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चोपन पश्चिमी क्षेत्र के 50 गांवों में होलिका स्थापित
Updated Wed, 28 Feb 2018 12:00 AM IST
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सोनभद्र। जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज समेत जिले भर के शहरी क्षेत्रों में जहां होलिका बसंत पंचमी पर ही स्थापित हो गई, वहीं चोपन ब्लॉक के पश्चिमी क्षेत्र के 50 गांवों में मंगलवार को होलिका की स्थापना विधिवत पूजन-अर्चन कर की गई। बुधवार को ग्रामीण दिन-रात लकड़ी इकट्ठा करके होलिका तैयार करेंगे और गुरुवार को रात्रि में होलिका दहन होगा।
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला के बार्डर से सटे चोपन ब्लॉक के पश्चिमी क्षेत्र के नेवारी, भरहरी, कुड़ारी, छितिकपुरवां, सेमिया, शिल्पी, कोरट, कुरछा, रिजूल, चतरवार, घोरिया, जमुअल, कदरा, धलैतवां, पौसिला, भितरी, सरैहवां, बरगवां, मदाईन, चौरा, बिजौरा, अगोरी, जुगैल आदि गांवों में मंगलवार को विधिवत पूजन-अर्चन कर होलिका स्थापित की गई। इसके अलाव मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला अंतर्गत ठटरा, लमसरई, झरकटा, पोड़ी, चितरंगी, धरौली, गांगी, फु़लकेश, बर्दी, खटाई, बरवाडीह, महुअरिया, कुशाही आदि गांवों में भी मंगलवार को होलिका स्थापित की गई। बुधवार को दिन-रात ग्रामीण, बच्चे सभी मिलकर लकड़ी इकट्ठा करके होलिका तैयारी में जुट गए। गुरुवार को जिले भर में होलिका जलाई जाएगी। इस संदर्भ में नेवारी गांव के बुजुर्ग निद्धिनाथ पाठक, रिजूल के लक्ष्मिन शुक्ल, चतरवार के युधिष्ठिर देव पांडेय आदि का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में लकड़ी की कमी होने की वजह से बसंत पंचमी से ही होलिका स्थापित कर दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों खासकर जंगल से सटे गांवों में लकड़ी की कमी नहीं होती। इसकी वजह से तीन दिन में ही होलिका की तैयारी से लेकर जलाने तक का कार्य आसानी से हो जाता है।
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मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला के बार्डर से सटे चोपन ब्लॉक के पश्चिमी क्षेत्र के नेवारी, भरहरी, कुड़ारी, छितिकपुरवां, सेमिया, शिल्पी, कोरट, कुरछा, रिजूल, चतरवार, घोरिया, जमुअल, कदरा, धलैतवां, पौसिला, भितरी, सरैहवां, बरगवां, मदाईन, चौरा, बिजौरा, अगोरी, जुगैल आदि गांवों में मंगलवार को विधिवत पूजन-अर्चन कर होलिका स्थापित की गई। इसके अलाव मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला अंतर्गत ठटरा, लमसरई, झरकटा, पोड़ी, चितरंगी, धरौली, गांगी, फु़लकेश, बर्दी, खटाई, बरवाडीह, महुअरिया, कुशाही आदि गांवों में भी मंगलवार को होलिका स्थापित की गई। बुधवार को दिन-रात ग्रामीण, बच्चे सभी मिलकर लकड़ी इकट्ठा करके होलिका तैयारी में जुट गए। गुरुवार को जिले भर में होलिका जलाई जाएगी। इस संदर्भ में नेवारी गांव के बुजुर्ग निद्धिनाथ पाठक, रिजूल के लक्ष्मिन शुक्ल, चतरवार के युधिष्ठिर देव पांडेय आदि का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में लकड़ी की कमी होने की वजह से बसंत पंचमी से ही होलिका स्थापित कर दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों खासकर जंगल से सटे गांवों में लकड़ी की कमी नहीं होती। इसकी वजह से तीन दिन में ही होलिका की तैयारी से लेकर जलाने तक का कार्य आसानी से हो जाता है।
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