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योग दिलाएगा भारत को विश्व गुरु की पदवी
अमर उजाला ब्यूरो/ सीतापुर
Updated Sat, 20 Jun 2015 12:25 AM IST
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आप योग करते हुए अल्लाह का नाम लें, वाहे गुरु का नाम लें, ईशू का नाम लें या भगवान शिव का नाम लें। यह आपकी अपनी निष्ठा पर है पर योग भारतीय संस्कृति की अटूट पहचान है और सदैव रहेगी। वे गीता सत्संग भवन में आयोजित तीन दिवसीय योग महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
सीतापुर महोत्सव समिति, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, भारत विकास परिषद, पतंजलि योग समिति के संयुक्त तालमेल से हुए समारोह में महापौर ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है। भारत आज फिर विश्व गुरु बनने जा रहा है और योग दिवस इसका पहला चरण है। उन्होंने कहा कि योग कोई व्यायाम, पद्धति अथवा क्रियाशील प्रक्रिया नहीं है,
बल्कि योग वह व्यवस्था है, जिससे हम सभी अपने को नियंत्रित कर दूसरों के कल्याण का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति संपूर्ण विश्व में अपनी अलग पहचान रखती है। योग दिवस मनाने के लिये इस्लामिक राष्ट्रों सहित 177 देशों ने ऐसे ही अपनी स्वीकृति नहीं दी। उन्होंने देखा कि भारत के प्रधानमंत्री साढ़े तीन घंटे सोते हैं और बाकी समय फुर्ती के साथ काम करते हैं। कोई थकावट नहीं, कोई निंद्रा नहीं, गुस्से का भाव तक नहीं झलकता। यह सब योग की ही देन है। इस अवसर पर सांसद राजेश वर्मा, विशिष्ट अतिथि महंत शिवेन्द्र नाथ, भाजपा जिलाध्यक्ष ज्ञान तिवारी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में कालीपीठाधीश्वर पं.जगदम्बा शास्त्री, गोपाल टंडन भी मौजूद रहे। इससे पूर्व महापौर ने सीतापुर सेवा संस्थान के अध्यक्ष राम औतार आर्य, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के जय प्रकाश भरतिया को स्मृति चिह्न व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इसके अलावा महोत्सव में विशेष योगदान करने वाले 27वीं वाहिनी पीएसी के रामकुमार, आशीष मिश्र, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के नीरज वर्मा, शिक्षाविद् अरूणेश मिश्र, भारत विकास परिषद के हरीश शाह, राजेश मिश्रा, व्यापारी नेता विनय गुप्ता, शिक्षाविद् मोना आनंद व तैराक खिलाड़ी अभव्या चौहान को पुरस्कृत किया गया।
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सीतापुर महोत्सव समिति, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, भारत विकास परिषद, पतंजलि योग समिति के संयुक्त तालमेल से हुए समारोह में महापौर ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है। भारत आज फिर विश्व गुरु बनने जा रहा है और योग दिवस इसका पहला चरण है। उन्होंने कहा कि योग कोई व्यायाम, पद्धति अथवा क्रियाशील प्रक्रिया नहीं है,
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बल्कि योग वह व्यवस्था है, जिससे हम सभी अपने को नियंत्रित कर दूसरों के कल्याण का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति संपूर्ण विश्व में अपनी अलग पहचान रखती है। योग दिवस मनाने के लिये इस्लामिक राष्ट्रों सहित 177 देशों ने ऐसे ही अपनी स्वीकृति नहीं दी। उन्होंने देखा कि भारत के प्रधानमंत्री साढ़े तीन घंटे सोते हैं और बाकी समय फुर्ती के साथ काम करते हैं। कोई थकावट नहीं, कोई निंद्रा नहीं, गुस्से का भाव तक नहीं झलकता। यह सब योग की ही देन है। इस अवसर पर सांसद राजेश वर्मा, विशिष्ट अतिथि महंत शिवेन्द्र नाथ, भाजपा जिलाध्यक्ष ज्ञान तिवारी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में कालीपीठाधीश्वर पं.जगदम्बा शास्त्री, गोपाल टंडन भी मौजूद रहे। इससे पूर्व महापौर ने सीतापुर सेवा संस्थान के अध्यक्ष राम औतार आर्य, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के जय प्रकाश भरतिया को स्मृति चिह्न व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इसके अलावा महोत्सव में विशेष योगदान करने वाले 27वीं वाहिनी पीएसी के रामकुमार, आशीष मिश्र, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के नीरज वर्मा, शिक्षाविद् अरूणेश मिश्र, भारत विकास परिषद के हरीश शाह, राजेश मिश्रा, व्यापारी नेता विनय गुप्ता, शिक्षाविद् मोना आनंद व तैराक खिलाड़ी अभव्या चौहान को पुरस्कृत किया गया।
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