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गोंदलामऊ में हैंडपंप उगल रहे पीला पानी
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औरंगाबाद/रामगढ़। गोंदलामऊ के हैंडपंपों का जल पीने योग्य नहीं है। अधिकतर हैंडपंप से दूषित पानी आ रहा है। इनसे निकलने वाला पीला पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जब पूरे ब्लॉक में संक्रमण फैल चुका है, तो चिकित्सक भी इसके पीछे दूषित पानी को ही वजह मान रहे है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है जब तक शुद्ध पानी नहीं मिलेगा तब तक मरीज बढ़ते ही जाएंगे। केवल दवा बांटना इसका स्थायी समाधान नहीं है। गोंदलामऊ विकासखंड में संक्रमण फैल चुका है। आठ से अधिक गांव इसकी चपेट में है। सैकड़ों लोग बुखार से ग्रसित है। शुरुआत में जिला प्रशासन ने इसे हल्के में लिया।
मौसम में बदलाव की वजह से बुखार आना बताया। जब यह बीमारी रुकी नहीं तो जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग, जल निगम व विकास विभाग के अफसरों ने गांवों का दौरा किया। उन्हें गांवों में गंदगी फैली मिली। हैंडपंपों का पानी दूषित मिला। जब जांच की गई तो पता चला रामगढ़ इलाके में निकले नाले के किनारे के हैंडपंपों में दूषित पानी आ रहा है।
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जल निगम ने आठ हैंडपंपों के नमूने भरकर जांच कराए थे। इस जांच में भले ही जिला स्तर पर पानी पास हो गया हो। लेकिन अभी लखनऊ से इसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। ग्राम पैरवा में संक्रमण से एक की मौत भी हो चुकी है। यहां कई हैंडपंपों से पीला बदबूदार पानी आ रहा है।
कई बार कीड़े भी निकल आते है। पैरवा, रामगढ़, नटवलग्रंट, बबुरीखेरा, बरियापुर, महुवाकोर सहित कई गांवों में दूषित पानी आ रहा है।
गंदगी व अशुद्ध पेयजल है बीमारी का कारण
गांवों में जांच के बाद दवाएं वितरित की जा रही है। बीमारी फैलने का कारण गंदगी व दूषित जल है। नाले के किनारे व अन्य जगहों पर लगे हैंडपंप दूषित पानी दे रहे है।
जांच में भले ही पानी पास हो गया हो, लेकिन पीला पानी जांच में नहीं आता है। पाइप लाइन में लीकेज की वजह से कीड़े आ रहे है। भला मिट्टी व कीड़ायुक्त पानी स्वास्थ्य के लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है। जब तक पानी शुद्ध नहीं होगा, तब तक इस पर स्थायी रूप से लगाम नहीं लग पाएगी।
- डॉ. आरके नैय्यर, सीएमओ
लखनऊ से कराएंगे जांच
रामगढ़ में नाले के किनारे के हैंडपंपों से पानी के नमूने लेकर जांच कराई गई थी। जिसमें यह पानी पास आया है। अब इसे लखनऊ लैब से जांच कराई जाएगी। फिर से कुछ और हैंडपंपों के नमूने लिए जाएंगे। कई हैंडपंपों में पीला पानी आ रहा है।
- अजय प्रभाकर, सहायक अभियंता, जल निगम
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स्वास्थ्य विभाग का कहना है जब तक शुद्ध पानी नहीं मिलेगा तब तक मरीज बढ़ते ही जाएंगे। केवल दवा बांटना इसका स्थायी समाधान नहीं है। गोंदलामऊ विकासखंड में संक्रमण फैल चुका है। आठ से अधिक गांव इसकी चपेट में है। सैकड़ों लोग बुखार से ग्रसित है। शुरुआत में जिला प्रशासन ने इसे हल्के में लिया।
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मौसम में बदलाव की वजह से बुखार आना बताया। जब यह बीमारी रुकी नहीं तो जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग, जल निगम व विकास विभाग के अफसरों ने गांवों का दौरा किया। उन्हें गांवों में गंदगी फैली मिली। हैंडपंपों का पानी दूषित मिला। जब जांच की गई तो पता चला रामगढ़ इलाके में निकले नाले के किनारे के हैंडपंपों में दूषित पानी आ रहा है।
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जल निगम ने आठ हैंडपंपों के नमूने भरकर जांच कराए थे। इस जांच में भले ही जिला स्तर पर पानी पास हो गया हो। लेकिन अभी लखनऊ से इसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। ग्राम पैरवा में संक्रमण से एक की मौत भी हो चुकी है। यहां कई हैंडपंपों से पीला बदबूदार पानी आ रहा है।
कई बार कीड़े भी निकल आते है। पैरवा, रामगढ़, नटवलग्रंट, बबुरीखेरा, बरियापुर, महुवाकोर सहित कई गांवों में दूषित पानी आ रहा है।
गंदगी व अशुद्ध पेयजल है बीमारी का कारण
गांवों में जांच के बाद दवाएं वितरित की जा रही है। बीमारी फैलने का कारण गंदगी व दूषित जल है। नाले के किनारे व अन्य जगहों पर लगे हैंडपंप दूषित पानी दे रहे है।
जांच में भले ही पानी पास हो गया हो, लेकिन पीला पानी जांच में नहीं आता है। पाइप लाइन में लीकेज की वजह से कीड़े आ रहे है। भला मिट्टी व कीड़ायुक्त पानी स्वास्थ्य के लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है। जब तक पानी शुद्ध नहीं होगा, तब तक इस पर स्थायी रूप से लगाम नहीं लग पाएगी।
- डॉ. आरके नैय्यर, सीएमओ
लखनऊ से कराएंगे जांच
रामगढ़ में नाले के किनारे के हैंडपंपों से पानी के नमूने लेकर जांच कराई गई थी। जिसमें यह पानी पास आया है। अब इसे लखनऊ लैब से जांच कराई जाएगी। फिर से कुछ और हैंडपंपों के नमूने लिए जाएंगे। कई हैंडपंपों में पीला पानी आ रहा है।
- अजय प्रभाकर, सहायक अभियंता, जल निगम