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Sitapur News: पुत्र की लंबी उम्र के लिए आज रखेंगी निर्जला व्रत
Fri, 17 Jan 2025 12:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 17 Jan 2025 12:19 AM IST
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सीतापुर शहर बाजार में तिल व लाई के लड्डू खरीदते लोग। संवाद
सीतापुर। गणेश चतुर्थी (सकट) पूजा शुक्रवार को है। सौभाग्यवती महिलाएं अपने पुत्र की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। सकट की पूर्व संध्या पर महिलाओं ने शहर की बाजार में तिल के लड्डू व अन्य सामग्री की खरीदारी की। इस बार सकट चतुर्थी पर सौभाग्य व शोभन योग बन रहा है।
सनातनी धर्म में गणेश चतुर्थी (सकट) पर्व का विशेष महत्व है। इसे सकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी तिथि में यह व्रत किया जाता है। माताएं अपने पुत्र की दीर्घायु के लिए सकट चौथ का निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत भगवान गणपति को समर्पित है।
मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्रत करने वाले के सारे विघ्न व संकट दूर हो जाते हैं। नैमिषारण्य के प्रभाकर द्विवेदी ने बताया कि चतुर्थी तिथि का आरंभ 17 जनवरी को सुबह 4:06 बजे हो रहा है। इसका समापन 18 जनवरी को सुबह 5:30 बजे होगा। इस दिन सौभाग्य और शोभन योग के शुभ संयोग का भी निर्माण हो रहा है।
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महिलाओं ने सकट की पूर्व संध्या पर शहर की बाजार में तिल के लड्डू व पूजन सामग्री की खरीदारी की। इससे बाजार में रौनक नजर आई।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद होता है पारण
सकट चतुर्थी का व्रत पूरे दिन निर्जला ही रखा जाता है। यह व्रत चंद्रोदय तक होता है। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। शुक्रवार को चंद्रोदय 9:04 बजे होने का अनुमान है।
ये हैं पूजा के मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 5:27 बजे से 6:21 बजे तक।
लाभ मुहूर्त - सुबह 8:34 बजे से 9:53 बजे तक।
अमृत मुहूर्त - सुबह 9:53 बजे से 11:12 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:10 बजे से 12:52 बजे तक।
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सनातनी धर्म में गणेश चतुर्थी (सकट) पर्व का विशेष महत्व है। इसे सकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी तिथि में यह व्रत किया जाता है। माताएं अपने पुत्र की दीर्घायु के लिए सकट चौथ का निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत भगवान गणपति को समर्पित है।
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मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्रत करने वाले के सारे विघ्न व संकट दूर हो जाते हैं। नैमिषारण्य के प्रभाकर द्विवेदी ने बताया कि चतुर्थी तिथि का आरंभ 17 जनवरी को सुबह 4:06 बजे हो रहा है। इसका समापन 18 जनवरी को सुबह 5:30 बजे होगा। इस दिन सौभाग्य और शोभन योग के शुभ संयोग का भी निर्माण हो रहा है।
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महिलाओं ने सकट की पूर्व संध्या पर शहर की बाजार में तिल के लड्डू व पूजन सामग्री की खरीदारी की। इससे बाजार में रौनक नजर आई।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद होता है पारण
सकट चतुर्थी का व्रत पूरे दिन निर्जला ही रखा जाता है। यह व्रत चंद्रोदय तक होता है। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। शुक्रवार को चंद्रोदय 9:04 बजे होने का अनुमान है।
ये हैं पूजा के मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 5:27 बजे से 6:21 बजे तक।
लाभ मुहूर्त - सुबह 8:34 बजे से 9:53 बजे तक।
अमृत मुहूर्त - सुबह 9:53 बजे से 11:12 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:10 बजे से 12:52 बजे तक।